भारत सरकार द्वारा विकसित भारत@2047 के लिए किए गए संकल्प जिसका लक्ष्य वर्ष 2047 (स्वतंत्रता के 100 वर्ष) तक भारत को वैश्विक स्तर पर आर्थिक वृद्धि, सामाजिक प्रगति, पर्यावरणीय स्थिरता व सुशासन के क्षेत्र में भारत को सर्वश्रेष्ठ बनाना है। इसी दिशा में तकनीकी विकास के क्षेत्र को और तेज गति देने के लिए भारत सरकार द्वारा ‘India’s Techade’ जैसे महत्वपूर्ण विजन को तय किया गया है जिसका उद्देश्य वर्ष 2021-2030 के दशक को तकनीकी व नवाचार के लिए समर्पित करके भारत के अभूतपूर्व विकास के लिए तय लक्ष्यों को प्राप्त कर भारत को तकनीकी विकास के क्षेत्र में वैश्विक पटल पर अग्रणी भूमिका में लाना है। मानवीय सभ्यता व नवाचार के क्षेत्र में आर्टफिशल इंटेलिजें(AI) इस युग का एक बड़ा व महत्वपूर्ण खोज है जिसमें भारत के सर्वांगीण विकास को तीव्र गति देने की व्यापक क्षमता है।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने मानव उत्पादकता में वृद्धि होने के साथ-साथ कृत्रिम मेधा(AI) पर वैश्विक स्तर पर 40 प्रतिशत नौकरियों को प्रभावित कर सकने की आशंका जताई है। AI के माध्यम से वैश्विक सामाजिक-आर्थिक आयामों पर पड़ने वाले महत्वपूर्ण प्रभावों का व्यापक अध्ययन करने वाली एक संस्था मैकिन्ले ग्लोबल इंस्टिट्यूट द्वारा ‘नोट्स फ्रॉम द फ़्रंटिएर’ नाम से प्रस्तुत एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि AI 2030 तक वैश्विक स्तर पर 30 ट्रिलियन डालर तक आर्थिक लाभ पहुचानें में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। प्रोद्योगिकी, व्यवसाय, समाज, सरकार तथा अन्य सामाजिक संस्थाओं में एक शक्तिशाली परिवर्तन के साधन के रूप में अपनाए जाने से कृतिम मेधा(AI) उत्पादकता व कार्यकुशलता में तेजी से सुधार के कारक के रूप में उभरी है। अमेरिका, जापान , सिंगापुर ब्रिटेन जैसे देश अपने सरकारी कार्यों में जेनेरेटिव AI सहित आर्टफिशल इंटेलिजेंस का भरपूर उपयोग कर रहे, वहीं भारत भी इस AI के सरकारी कामकाज में प्रयोग के कार्य को तेजी से गति दे रहा है।
अनुमानों के अनुसार कृतिम मेधा (AI) के माध्यम से भारतीय अर्थव्यवस्था में यहां योगदान करने की संभावना है। इसके माध्यम से देश की GDP में वृद्धि की जा सकती है।
वैश्विक कल्याण के लिए AI का उपयोग करने का भारत का दृष्टिकोण
लंबे समय से AI के क्षेत्र में सफलता एक चुनौती रूप में थी। ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट कंप्यूट पावर में वृद्धि, डीप माइंड जैसे अग्रणी उद्योगों से व्यापक स्तर पर भाषा मॉडल कि उत्पत्ति व गूगल, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और टेस्ला जैसे बड़ी प्रोद्योगिक कंपनियों द्वारा महत्वपूर्ण निवेश के साथ AI के क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन के साथ व्यापक उन्नति के मार्ग प्रशस्त हुए हैं, जिसमें जेनेरेटिव AI, विस्तृत भाषा मॉडल की उपलब्धता और अरबों पैरामीटर माडेल विभिन्न क्षेत्रों में लोगों को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करने के लिए तत्पर है, जो देश के पहले से ही तेजी से बढ़ रही डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए एक क्रियाशील प्रवर्तन बना रहेगा।
दिसंबर 2023 में नई दिल्ली में सम्पन्न हुए AI पर केंद्रित महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन ‘ग्लोबल पार्ट्नरशिप ऑन आर्टिफिसियल इन्टेलिजेन्स’ जिसमें 29 देशों के विशेषज्ञों को एक साथ लाते हुए एक मंच प्रदान किया गया जिसका उद्देश्य AI के सिद्धांत व अभ्यास के बीच के अंतर को पाटना था। भारत ने AI के प्रयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रगट करते हुए इसे मानव केंद्रित रखते हुए उच्च गुणवत्ता के अनुसंधान व व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से लोक कल्याण के लिए महत्वपूर्ण माना है। डिजिटल इंडिया के परिवर्तनकारी यात्रा में AI की भूमिका का अग्रणी स्थान है, जिसको ‘इंडिया AI’ नामक मिशन के माध्यम से सरकार जन कल्याण के लिए इसके व्यापक संभावनाओं को साधने में पूरा जोर लगा रही है कि किस प्रकार से AI का प्रयोग सेवा, सुरक्षा , शिक्षा, स्वास्थ, रोजगार, कृषि व पर्यावरण सुरक्षा के विभिन्न आयामों में सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में तथा सकारात्मक परिवर्तन की दृष्टि से किया जा सकता है। भारत के दृष्टिकोण में AI से संबद्ध नियमों की स्थापना, उनसे जुड़े नुकसान तथा अपराधों की एक विस्तृत सूची शामिल है। विकास के क्रम में AI पर नियमों को लागू करने के बजाय भारत का पक्ष है की मॉडल प्रशिक्षण के दौरान पूर्वाग्रह और दुरुपयोग को रोकने को लेकर सभी AI प्लेटफॉर्मों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश बनाए जाएँ।
AI का यह युग विभिन्न संभावनाओं के साथ-साथ चुनौतियों से भरा हुआ है, जिसमें भारत मानव केंद्रित AI को लेकर प्रतिबद्ध व आशान्वित है।
शिक्षा क्षेत्र में AI- AI के प्रयोग से कुशल कक्षा प्रबंधन, चैटबोट व वर्चुअल असिस्टेंस, पाठ्यक्रम नियोजन, स्मार्ट कंटेन्ट नियोजन करने में सहायता मिलती है तथा एडुटेन्मेंट व गेमिफिकेसन के माध्यम से शिक्षा को अधिक रोचक बनाया जाता है। AI का प्रयोग से प्राक्टरिंग को सरल बनाता है जिसके माध्यम से परीक्षा केंद्र पर निगरानी रखी जाती है जो परीक्षा के दौरान किए जा रहे संदिग्ध गतिविधियों का विश्लेषण कर के कंट्रोल रूम को सूचित करता है जिससे परीक्षा की शुचिता कायम रहे।
स्वास्थ सेवा में AI- AI के ‘मशीन लर्निंग’ टूल, एल्गोरिदम के माध्यम से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का शुरुआती दौर में ही पता लगाकर उपचार संभव है। AI के मदद से X-रे , MRI व CT स्कैन जैसे जांच रिपोर्ट का सटीक विश्लेषण करने में सहायता प्राप्त होगी।
मानव सुरक्षा में AI- ‘फेसीयल रेकॉगनिसन’ (मशीन द्वारा चेहरे से पहचान करना), विडिओ विश्लेषण व सार्वजनिक स्थलों पर AI तकनीक के माध्यम से संभावित आपातकाल परिस्थितियों का अनुमान लगाते हुए निश्चित समय के भीतर निराकरण करने में सहायता मिलेगी जिससे नागरिकों के सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक बेहतर किया जा सकता है।
स्मार्ट कृषि में AI- कृषि के क्षेत्र में नवाचार की दृष्टि से AI की महत्वपूर्ण भूमिका है। AI का प्रयोग कृषि संबंधित डाटा का विश्लेषण, मौसम पूर्वानुमान, पशुधन स्वास्थ, सप्लाई चेन का अनुकूलन तथा AI ड्रोन जैसी तकनीक का प्रयोग कर के कृषि क्षेत्र में गुणवत्ता व किसानों के कार्यकुशलता में अपूर्व वृद्धि की जा सकती हैं।
इकनॉमिक सर्वे रिपोर्ट 2022-23 के अनुसार भारत की लगभग 65 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्र में निवास करती है। डिजिटल साक्षरता दर के आकड़ों से स्पष्ट होता है की डिजिटल संरचना के आधारभूत जानकारी को ठीक से समझने लिए अभी भारतीय समाज संघर्ष कर रहा है। जिसका एक आधार क्षेत्रीय व सामाजिक पृष्ठभूमि भी है। AI से जुड़े सुरक्षा व गोपनीयता संबंधी चिंताएँ जैसे डीप फेक, डिजिटल अरेस्ट, डाटा चोरी जैसी समस्याएँ भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था के लिए अभी भी गंभीर चुनौती बनी हुई है जिसके लिए उचित कानून व दिशानिर्देश की अत्यंत आवश्यकता है। AI एल्गोरिदम, मॉडल और तकनीकी के जटिल संरचना के कारण इसमें विशेषज्ञता प्राप्त करना सभी के लिए आसान नहीं है जिससे ‘डिजिटल डिवाइड’ के खाई को पाटना नीति निर्माताओं के लिए एक चुनौतीपूर्ण कार्य है।
AI जनित चुनौतियों से निपटने के लिए जिम्मेदार AI के तरफ ध्यान देने की अत्यंत आवश्यकता है। नीति आयोग ‘सभी के लिए जिम्मेदार AI’ पर चर्चा पत्र प्रकाशित करता रहता है जो AI को जिम्मेदारी पूर्वक लागू करने में महत्वपूर्ण रूपरेखा तय करता है। ऐसी संस्कृति का निर्माण करना महत्वपूर्ण है, जो नैतिक मुद्दों पर चर्चा व बहस को प्रोत्साहित करे विचार-मंथन के लिए एक चेकलिस्ट निष्पक्षता, पारदर्शिता ,गोपनीयता, सुरक्षा और नैतिक उपयोग के पाँच आयाम हो सकते हैं। इस तरह मानव प्रयास के सभी विषयों और क्षेत्रों में संदेह, धारणाएँ, चिंताएँ, मुद्दे और समस्याएँ हैं लेकिन इसके लिए मानव अस्तित्व पर एआई के प्रभाव को संक्षेप में खारिज करने की आवश्यकता नहीं है।