टैरिफ के बावजूद वर्ष 2026 में भारत की आर्थिक विकास दर छू सकती है नई ऊचाईयां

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दिनांक 1 फरवरी 2026 को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार द्वारा भारतीय संसद में प्रस्तुत किए जाने वाले बजट के पूर्व वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत के आर्थिक विकास से सबंधित प्रथम अग्रिम अनुमान के आंकड़े 7 जनवरी 2026 को जारी किए गए है। इस अनुमान के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में सकल घरेलू उत्पाद में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल हुई थी जो वित्तीय वर्ष 2025-26 में बढ़कर 7.4 प्रतिशत रहने की सम्भावना व्यक्त की गई है। सकल घरेलू उत्पाद से सम्बंधित प्रथम अग्रिम अनुमान के आंकड़ों के आधार पर ही वर्ष 2026-27 के बजट को अंतिम रूप दिया जा रहा है। आर्थिक विकास से सम्बंधित द्वितीय अग्रिम अनुमान 27 फरवरी 2026 को जारी किए जाने हैं। भारत के सकल घरेलू उत्पाद में भारतीय रिजर्व बैंक का अनुमान भी 7.3 प्रतिशत की वृद्धि का ही है परंतु भारतीय स्टेट बैंक के आर्थिक अनुसंधान विभाग का अनुमान 7.5 प्रतिशत अथवा इससे अधिक का है। भारत की आर्थिक विकास दर विश्व के सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच सबसे अधिक रहने की सम्भावना विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, एशियन विकास बैंक (7.2 प्रतिशत), फिच नामक रेटिंग संस्थान (7.4 प्रतिशत) आदि संस्थानों ने भी व्यक्त की है।

भारत के सकल घरेलू उत्पाद में वित्तीय वर्ष 2024-25 में हासिल की गई 6.5 प्रतिशत की वृद्धि से आगे बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 में 7.4 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल करने के कुछ मुख्य कारणों में शामिल हैं – (1) केंद्र सरकार के स्थिर उपभोग खर्च (Govt Fixed Consumption Expenditure) में वृद्धि दर जो वित्तीय वर्ष 2024-25 में 2.3 प्रतिशत की रही थी, वह बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 में 5.2 प्रतिशत रहने की सम्भावना है; (2) विनिर्माण के क्षेत्र में वृद्धि दर वित्तीय वर्ष 2024-25 में 4.5 प्रतिशत की रही थी जो वित्तीय वर्ष 2025-26 में बढ़कर 7.0 प्रतिशत रहने की सम्भावना है; (3) सकल मान योग (Gross Value Addition) में वृद्धि दर का 6.4 प्रतिशत से बढ़कर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है; (4) सकल स्थिर पूंजी निर्माण (Gross Fixed Capital Formation) में वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत से बढ़कर 7.8 प्रतिशत रहने की सम्भावना व्यक्त की गई है; (5) सेवा एवं कृषि क्षेत्र में क्रमश: 9.1 प्रतिशत एवं 3.1 प्रतिशत की सम्भावना व्यक्त की गई है; (6) भारत से विभिन्न उत्पादों के निर्यात में वृद्धि दर का 6.3 प्रतिशत से बढ़कर 6.4 प्रतिशत रहने की सम्भावना होना भी शामिल है। अप्रेल 2025 से नवम्बर 2025 के खंडकाल में राजकोषीय घाटा 9.8 लाख करोड़ का रहा है जो वित्तीय वर्ष 2025-26 के कुल अनुमान का 62.3 प्रतिशत है, अतः बजटीय घाटा भी अभी तक नियंत्रण में ही रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में राजकोषीय घाटा 15.69 लाख करोड़ रहने का अनुमान लगाया गया था, जो सकल घरेलू उत्पाद का 4.4 प्रतिशत होगा। इस प्रकार केंद्र सरकार की आय एवं व्यय से सबंधित स्थिति भी पूर्णत: नियंत्रण में है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर के 7.4 प्रतिशत के अनुमान को उत्साहवर्धक माना जाना चाहिए क्योंकि यह वृद्धि दर ट्रम्प द्वारा भारत से अमेरिका को होने वाले विभिन्न वस्तुओं के निर्यात पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ के बावजूद रहने वाली है। दरअसल ट्रम्प द्वारा भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर लगाए गए टैरिफ को वित्तीय बाजार में बहुत गम्भीरता से लिया जाकर इसके भारतीय अर्थव्यवस्था पर होने वाले प्रभाव को बहुत बढ़ा चढ़ाकर पेश किया गया है। परंतु, वास्तव में भारत के आर्थिक विकास दर पर इसका प्रभाव लगभग नहीं के बराबर रहा है। इसके पीछे मुख्य कारण अमेरिका को भारत से होने वाले निर्यात की कम मात्रा भी है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत से अमेरिका को 7,900 करोड़ अमेरिकी डॉलर के विभिन्न वस्तुओं के निर्यात हुए थे, जबकि भारत का सकल घरेलू उत्पाद 4.29 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर का रहा था। अतः भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात भारत के सकल घरेलू उत्पाद का मात्र 1.85 प्रतिशत ही रहे हैं। वैसे भी भारत की अर्थव्यवस्था निर्यात आधारित है ही नहीं (चीन की अर्थव्यवस्था निर्यात आधारित है, इसीलिए चीन पर अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव अधिक हो सकता है), भारतीय अर्थव्यवस्था मुख्यतः आंतरिक उपभोग पर आधारित है। यदि भारत के नागरिक स्वदेशी उत्पादों का अधिक से अधिक सेवन करते हैं तो ट्रम्प द्वारा भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर लगाए गए टैरिफ के भारतीय अर्थव्यवस्था पर होने वाले प्रभाव को शून्य भी किया जा सकता है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा भी भारतीय समाज को लगातार प्रेरणा दी जा रही है कि वे भारत में निर्मित उत्पादों का ही उपयोग करें ताकि भारत को प्रत्येक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जा सके। संघ ने पंच परिवर्तन नामक एक कार्यक्रम को प्रारम्भ किया है, जिसमें पांच बिंदु शामिल किए गए हैं – स्वदेशी का उपयोग, नागरिक कर्तव्य, सामाजिक समरसता, पर्यावरण, कुटुंब प्रबोधन। भारत में समस्त नागरिकों का यह कर्तव्य है कि वे सनातन हिंदू संस्कृति के संस्कारों का अनुपालन सुनिश्चित करें। इन संस्कारों में भारत के नागरिकों में “देश प्रथम” के भाव का जागरण भी शामिल है। लोकतंत्र की सफलता और स्थिरता नागरिकों की भागीदारी और कर्तव्यों के प्रति सजगता पर निर्भर करती हैं। जब नागरिक अपने कर्तव्यों के प्रति संवेदनशील होते हैं और उनका ईमानदारी से पालन करते हैं तो समाज में सकारात्मक बदलाव आते हैं और देश की प्रगति होती हैं। समाज की प्रगति, सुरक्षा और समृद्धि के लिए नागरिकों की अपने कर्तव्यों के प्रति संवेदनशीलता तथा कटिबद्धत्ता आवश्यक है। करों का समय पर और सही राशि का भुगतान करना नागरिकों का कर्तव्य है। देश की आर्थिक प्रगति के लिए करों का उचित प्रबंधन आवश्यक है। प्रत्येक नागरिक का यह भी कर्तव्य है कि वह समाज की भलाई के लिए स्वच्छता अभियान, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक विकास जैसी सामाजिक सेवाओं में भाग लें।

किसी भी देश के नागरिक यदि स्वदेशी उत्पादों को अपनाना प्रारम्भ करते हैं तो इससे देश में उद्योगों को बढ़ावा मिलता है, अन्य देशों में उत्पादित वस्तुओं का आयात कम होता है और देश में ही रोजगार के नए अवसर निर्मित होते हैं। स्वदेशी का मतलब विदेशी सामान इस्तेमाल नहीं करना है परंतु यह कार्य इतना आसान नहीं है क्योंकि आज विश्व के समस्त देश एक वैश्विक गांव में परिवर्तित हो गए हैं, जिसके चलते उत्पादों का एक देश से दूसरे देश में आयात एवं निर्यात बहुत आसान बन पड़ा है। आचार्य श्री विनोबा भावे जी कहते हैं स्वदेशी का अर्थ है आत्मनिर्भरता और अहिंसा। संघ ने इसमें एक बिंदु जोड़ दिया: आत्मनिर्भरता, अहिंसा और सादगी। प्रत्येक भारतीय नागरिक से अपेक्षा की जाती है कि वह मितव्ययिता से जिए ताकि संसाधनों के दुरुपयोग को रोका जा सके। परंतु, इसका आश्य कंजूसी करना कदापि नहीं है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे सामाजिक संगठनों के साथ ही केंद्र सरकार ने भी आर्थिक क्षेत्र में कई प्रयास किए हैं जिसके चलते हाल ही के समय में भारत की आर्थिक विकास दर में वृद्धि दर में लगातार सुधार दिखाई दिया है। विशेष रूप से ट्रम्प प्रशासन द्वारा भारत से अमेरिका को होने वाले विभिन्न उत्पादों के निर्यात पर लगाए गए 50 प्रतिशत के टैरिफ के प्रभाव को लगभग शून्य करने के उद्देश्य से भारत ने विभिन्न देशों के साथ द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते सम्पन्न किए हैं, इनमे विशेष रूप से शामिल हैं यूनाइटेड किंगडम, ओमान, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, आदि। यूरोपीयन देशों के साथ भी मुक्त व्यापार समझौता शीघ्र ही सम्पन्न होने जा रहा है। सम्भवत 27 जनवरी 2026 को इस मुक्त व्यापार समझौते पर यूरोपीयन यूनियन एवं भारत द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे। साथ ही, अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों के आयात पर लगाए गए 50 प्रतिशत के टैरिफ से प्रभावित होने वाले उत्पादों के लिए भारत ने अन्य देशों के रूप में बाजार तलाश लिए हैं एवं इन देशों को विभिन्न उत्पादों का निर्यात प्रारम्भ हो चुका है जिससे नवम्बर 2025 एवं दिसम्बर 2025 माह में भारत से विभिन्न उत्पादों के निर्यात में वृद्धि दर हासिल की जा सकी है। वैसे, भारत और अमेरिका के बीच भी मुक्त व्यापार समझौते को लगभग अंतिम रूप दिया जा चुका है एवं शीघ्र ही इसकी घोषणा की जा सकती है। इसके बाद तो भारतीय उत्पादों के अमेरिका को होने वाले निर्यात पर लगाए गए 50 प्रतिशत को भी कम अथवा समाप्त किया जा सकता है, इससे अन्य देशों के साथ साथ अमेरिका को भी भारत से होने वाले विभिन्न उत्पादों के निर्यात में और अधिक वृद्धि हासिल की जा सकेगी।


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Prahlad Sabnani

Shri Prahlad Sabanani is a distinguished and experienced personality in the Indian banking sector, having served in various significant positions at the State Bank of India for 40 years. He retired as Deputy General Manager from the Corporate Centre of the State Bank of India in Mumbai. His three books—World Trade Organization: Impact on Indian Banking and Industry, Banking Today, and Banking Update—are highly acclaimed. He is also a prolific writer on economic and social issues of national importance.

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