भारतीय राष्ट्रवाद के वैचारिक अधिष्ठान है अटल जी!

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आजीवन माँ भारती की सेवा का व्रत धारण कर राष्ट्रसाधना में स्वयं को समर्पित करने वाले भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारतरत्न पंडित अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति में उस ध्रुवतारे के समान हैं, जो समय के किसी भी अंधकार में अपनी आभा कभी नहीं खोता। उनकी राजनीति सत्ता प्राप्ति की सीढ़ी नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का पवित्र माध्यम थी। उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्रहित में समर्पित जिजीविषा का ऐसा प्रतीक रहा, जिसने भारत और भारतीयता के उत्थान को एक नई दिशा दी। अटल जी की पंक्तियाँ उनके जीवन मूल्यों का प्रतिबिम्ब बनाती है, उन्होंने कहा था कि

“भारत जमीन का टुकड़ा नहीं,

जीता जागता राष्ट्रपुरुष है”

           अटल जी केवल एक राजनेता नहीं थे, वे एक विचार, एक चेतना और एक संस्कार बनकर भारतीय जनमानस में स्थायी रूप से प्रतिष्ठित हो गए।

 

अटल बिहारी वाजपेयी का नाम आते ही साहित्य, साधना और समाजसेवा का अद्भुत समन्वय दृष्टिगोचर होता है। वे उन विरले राजनेताओं में से थे, जिनके लिए राजनीति सत्ता-सुख का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण का दायित्व थी। जब सदन में उनका कवि हृदय ललकार उठता था..

“सरकारें आएंगी, जाएंगी, पार्टियां बनेंगी, बिगड़ेंगी मगर ये देश रहना चाहिए।”

                  उनकी वैचारिक निष्ठा और राजनीतिक आचरण में अद्भुत सामंजस्य था। आज की राजनीति में जहाँ अवसरवाद और स्वार्थ प्रधान होते जा रहे हैं, वहाँ अटल जी की राजनीति ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना और वैचारिक प्रतिबद्धता का आदर्श प्रस्तुत करती है। ऐसे व्यक्तित्व राजनीति में अत्यंत दुर्लभ होते हैं, जो सत्ता से ऊपर उठकर सिद्धांतों के केंद्र में रहकर राष्ट्रहित की राजनीति करते हैं।

अटल जी की सामाजिक स्वीकार्यता और राजनीतिक सहमति भारतीय राजनीति में अद्वितीय रही। वे ऐसे गैर-कांग्रेसी नेता थे, जिन्हें न केवल अपने दल में, बल्कि विपक्ष में भी सम्मान और विश्वास प्राप्त था। उनके भाषणों में ओज था, पर मर्यादा के साथ; विरोध था, पर संवाद के साथ। संसद में उनकी उपस्थिति भारतीय लोकतंत्र की गरिमा को और ऊँचाई प्रदान करती थी। जब एक बार सदन में उनकी सरकार एक मत से गिर गई, तब उन्होंने मुस्कराते हुए विपक्ष में बैठना स्वीकार किया।

आपातकाल के दौर में अटल बिहारी वाजपेयी की भूमिका भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दमन हो रहा था और लोकतंत्र बंधक बना लिया गया था, तब अटल जी ने निर्भीक होकर तानाशाही के विरुद्ध आवाज उठाई। जेल की चारदीवारी भी उनके विचारों को बाँध न सकी। उसी पीड़ा में उनका साहित्य भाव पंक्तियों में उतरा.

अनुशासन के नाम पर अनुशासन का खून

भंग कर दिया संघ को, कैसा चढ़ा जुनून…

यह संघर्ष सत्ता के लिए नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए था। आपातकाल ने यह सिद्ध कर दिया कि अटल जी केवल एक नेता नहीं, बल्कि लोकतंत्र के सजग प्रहरी थे।

प्रधानमंत्री के रूप में अटल जी का सबसे ऐतिहासिक निर्णय 1998 का पोखरण परमाणु परीक्षण रहा। इस परीक्षण ने भारत को विश्व पटल पर एक सशक्त, आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी राष्ट्र के रूप में स्थापित किया। अंतरराष्ट्रीय दबावों और प्रतिबंधों की परवाह किए बिना उन्होंने यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। पोखरण अटल जी की दूरदृष्टि, साहस और राष्ट्रहित में लिए गए कठोर निर्णयों का प्रतीक है।

विकास के क्षेत्र में भी अटल जी की सोच उतनी ही व्यापक और दूरदर्शी थी। स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना केवल सड़कों का जाल नहीं थी, बल्कि भारत की आर्थिक गति को नई ऊर्जा देने वाला क्रांतिकारी कदम था। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई को जोड़ने वाली यह योजना देश के औद्योगिक, व्यापारिक और सामाजिक ढाँचे को सुदृढ़ करने वाली सिद्ध हुई। अटल जी का विश्वास था कि सशक्त सड़कें केवल शहरों को नहीं, बल्कि सपनों को भी जोड़ती हैं।

कारगिल युद्ध के समय देश ने अटल बिहारी वाजपेयी के संयमित, दृढ़ और साहसी नेतृत्व को निकट से देखा। उन्होंने सेना को पूर्ण स्वतंत्रता और समर्थन दिया तथा अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का पक्ष प्रभावी ढंग से रखा। कारगिल विजय केवल सैन्य सफलता नहीं थी, बल्कि अटल जी के निर्णायक नेतृत्व और अटूट राष्ट्रभक्ति का प्रमाण थी। युद्ध के बाद भी उन्होंने शांति का मार्ग चुनते हुए स्पष्ट किया था “हम युद्ध नहीं चाहते, पर शांति हमारी कमजोरी नहीं है।”

अटल बिहारी वाजपेयी का व्यक्तित्व उन्हें राजनीति का अजातशत्रु बनाता है। वे सिद्धांतों पर अडिग रहे, पर संवाद और सहमति के सदैव पक्षधर रहे। उनकी राजनीति में कटुता नहीं, गरिमा थी; विरोध था, पर सम्मान के साथ। उनका साहित्यिक पक्ष भी उतना ही प्रभावशाली था। उनकी कविताएँ राष्ट्रभावना, मानवीय संवेदना और आत्मचिंतन से परिपूर्ण हैं

हिंदू तन-मन, हिंदू जीवन

रग-रग मेरा हिंदू परिचय…

                           यही कारण है कि अटल बिहारी वाजपेयी केवल सत्ता के प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि जन-जन के प्रधानमंत्री बने। आज जब भारतीय राजनीति कटुता, अविश्वास और दिशाहीनता के दौर से गुजर रही है, तब अटल जी का जीवन और विचार हमें लोकतांत्रिक मर्यादा, वैचारिक निष्ठा और राष्ट्रसेवा का शाश्वत मार्ग दिखाते हैं। वे भारतीय राजनीति के ऐसे प्रकाशस्तंभ हैं, जिनकी रोशनी आने वाली पीढ़ियों को भी सदैव प्रेरित करती रहेगी।


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Dr. Shivesh Pratap

Shivesh Pratap is a management consultant, author, and public policy analyst, having written extensively on the policies of the Modi government, foreign policy, and diplomacy. He is an electronic engineer and alumnus of IIM Calcutta in Supply Chain Management. Shivesh is actively involved in several think tank initiatives and policy framing activities, aiming to contribute towards India's development.

https://visionviksitbharat.com

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