Mrityunjaya Dixit, Author at VisionViksitBharat https://visionviksitbharat.com/author/mrityunjaya-dixit/ Policy & Research Center Thu, 08 May 2025 05:53:58 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://visionviksitbharat.com/wp-content/uploads/2025/02/cropped-VVB-200x200-1-32x32.jpg Mrityunjaya Dixit, Author at VisionViksitBharat https://visionviksitbharat.com/author/mrityunjaya-dixit/ 32 32 जो कहा वो किया – आपरेशन सिंदूर https://visionviksitbharat.com/modi-gov-operation-sindoor/ https://visionviksitbharat.com/modi-gov-operation-sindoor/#respond Thu, 08 May 2025 05:53:58 +0000 https://visionviksitbharat.com/?p=1729   “आपरेशन सिंदूर“ प्रधानमंत्री मोदी के उत्कृष्ट नेतृत्व का श्रेष्ठ उदाहरण है। यह आपरेशन बिना किसी दोष का अद्भुत प्रस्तुतीकरण रहा जिसमेंआतंकी ठिकानों और आतंकवादियों को छोड़कर किसी भी निर्दोष…

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“आपरेशन सिंदूर“ प्रधानमंत्री मोदी के उत्कृष्ट नेतृत्व का श्रेष्ठ उदाहरण है। यह आपरेशन बिना किसी दोष का अद्भुत प्रस्तुतीकरण रहा जिसमेंआतंकी ठिकानों और आतंकवादियों को छोड़कर किसी भी निर्दोष नागरिक या पाक सेना के जवान को नुकसान नहीं पहुंचा और भारतीय सेना अपनी कार्यवाही को पूरा करके सकुशल घर वापस आ गई।

 

अप्रैल 22, 2025 पहलगाम में 26-निहत्थे निर्दोष हिन्दुओं की धर्म पूछकर हत्या से पूरा देश आहत था। दुःख और क्रोध दोनों चरम पर थे। गृहमंत्री अमित शाह समाचार मिलते ही घटनास्थल पर पहुँच गए। प्रधानमंत्री अपनी विदेश यात्रा संक्षिप्त कर स्वदेश लौटे। अगले ही दिन मधुबनी रैली में घोषणा की, इस बार ऐसा दंड मिलेगा जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी, इस संकल्प को उन्होंने अपने मन की बात कार्यक्रम में दोहराया। गृहमुंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री के संकल्प को बल देते हुए कहा, “हम एक – एक आतंकी को चुन- चुन कर मारेंगे“ और अंत में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि ये मेरा उत्तरदायित्व है कि देशवासी जो कुछ चाहते हैं वह सब कुछ मोदी सरकार में होकर रहेगा। इन वक्तव्यों के पीछे सरकार और सेना के सभी संकल्पबद्ध राष्ट्रभक्त सामरिक और रणनीतिक तैयारियां कर रहे थे।

पहलगाम की आतंकी घटना के पश्चात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेना को सही समय, सही स्थान और सही लक्ष्य चुन कर सटीक वार करने की छूट दे दी थी। भारतीय सेना ने 6-7 मई 2025 की मध्यरात्रि को अपने पराक्रम का प्रदर्शन करके हर भारतीय का मस्तक गर्व से ऊंचा कर दिया। आज हर भारतीय नागरिक अपनी सेना के साहस को प्रणाम कर रहा है और सेना के साथ खड़ा है। जैसे ही ऑपरेशन सिंदूर के सफलतापूर्वक लांच होने की सूचना आई रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा “भारत माता की जय“ और उसके बाद भारत ही नहीं अपितु पूरे विश्व में ऑपरेशन सिंदूर ट्रेंड करने लगा। भारत पाक सीमा तथा पीओके पर 9 आतंकी ठिकानों के तबाह होते ही देश के अनेक हिस्सों में उत्सव का वातावरण बन गया।

लम्बे विचार विमर्श और तैयारियों, कूटनीतिक पक्ष को साधने के साथ सटीक रणनीति का उपयोग करते हुए “आपरेशन सिंदूर“ के माध्यम से भारतीय सेना ने पक्के सबूतों के साथ पाकिस्तान और गुलाम जम्मू -कश्मीर में स्थित आतंकी ठिकानों पर हमलाकर उन्हें तबाह कर दिया। भारत ने पंजाब प्रांत के बहालवपुर जैश -ए -मोहम्मद के संस्थापक मसूद अजहर के ठिकाने पर जोरदार मिसाइल अटैक किसा जिससे मसूद अजहर के परिवार के 14 सदस्यों के मारे जाने की खबर आ रही है। पाकिस्तानी सेना के चीन में बने एचक्यू -9 एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देते हुए भारतीय सेना ने 9 आतंकी ठिकानों को ध्वस्त करके भारत के सभी दुश्मनों को साफ संदेश दिया है कि अगर कोई उसे छेडे़गा तो वह अब घर में घुसकर मारेगा। यह नया भारत है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार देश के दुश्मनों को उसी भाषा में जवाब दे रही है जो भाषा वो समझते हैं । भारत को परमाणु हमले की धमकी देने वाले फिलहाल किसी बिल में छुपे हैं और अपने देशवसियों को कुछ बता पाने की स्थिति में ही नहीं रह गये हैं। जिन आतंकियों ने पहलगाम में निर्दोषों की हत्याएं करते समय उनकी पत्नियों या परिजनों से कहा था कि हम तुमको नहीं मारेंगे, जाओ मोदी को जाकर बता दो उनको प्रधानमंत्री मोदी ने बता दिया है कि वो सुन चुके हैं । उत्तर इतना तगड़ा और सधा हुआ दिया है कि आज पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठन, सेना व वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई हैरान हैं।

आपरेशन सिंदूर“ को मोदी सरकार में अब तक हुई स्ट्राइक्स में सबसे अलग माना जा रहा है। “आपरेशन सिंदूर“ प्रधानमंत्री मोदी के उत्कृष्ट नेतृत्व का श्रेष्ठ उदाहरण है। यह आपरेशन बिना किसी दोष का अद्भुत प्रस्तुतीकरण रहा जिसमेंआतंकी ठिकानों और आतंकवादियों को छोड़कर किसी भी निर्दोष नागरिक या पाक सेना के जवान को नुकसान नहीं पहुंचा और भारतीय सेना अपनी कार्यवाही को पूरा करके सकुशल घर वापस आ गई।

अब पाकिस्तान को यह समझ में नहीं आ रहा है कि वह पूरे घटनाक्रम पर क्या प्रतिक्रिया व्यक्त करे हालांकि पाक प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ की लंबी आपात बैठक के बाद पाक का बयान आया है कि उसे भारत पर जवाबी कार्यवाही करने का अधिकार प्राप्त है। पहलगाम घटना के बाद से पाकिस्तानी सेना एलओसी पर लगातार फायरिंग कर रही है जिसका भारतीय सेना भी पूरी बहादुरी के साथ लगातार जवाब दे रही है। भारत पाकिस्तान को लगातार चेतावनी दे रहा है कि एलओसी पर फायरिंग बंद करो नहीं तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहो।

आतंकी ठिकानों पर हमले से आतंकी संगठनों की जड़ें हिलीं -भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के अंतर्गत पाकिस्तान और पीओके में 9 आतंकी ठिकानो को तबाह कर दिया है। इसमें कम से कम 120 आतंकवादियों के मारे जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है। यह संख्या बढ़ भी सकती है। पाकिस्तान केवल 26 लोगों के ही मारे जाने का दावा कर रहा है। माना जा रहा है कि इस हमले में सबसे अधिक नुकसान जैश -ए- मोहम्मद के संस्थापक मसूद अजहर को हुआ है और उसके परिवार के 14 सदस्यों को मार गिराया गया है।

जिन 9 ठिकानों को निशाना बनाया गया, उनमें बहावलपुर का मरकज सुभान अल्लाह यह जैश -ए -मोहम्मद का प्रशिक्षण केंद्र है।14 फरवरी 2019 को पुलवामा में हुए हमले में इस केंद्र की मुख्य भूमिका रही है। यहां जैश – ऐ- मोहम्मद के सरगना मालना मसूद अजहर अपने परिवार तथा सहयोगियों के साथ रहता था और आतंकियों को प्रशिक्षित कर उन्हें भारत भेजता था। दूसरा -सबसे बड़ा हमला पंजाब के मुरिदके स्थित मरकजा तैयबा पर हुआ – यह लश्कर ए तैयबा का मुख्य प्रशिक्षण केंद्र है यहां आतंकियों को हर प्रकार से प्रशिक्षित किया जाता है। यहां पर हर वर्ष एक हजार छात्रों की भर्ती की जाती है ओसामा बिन लादेन ने यहां एक मस्जिद व गेस्ट हाउस के निर्माण में आर्थिक मदद की थी व 26/11के मुंबई हमलावरों को प्रशिक्षित किया गया था। इसमें अजमल कसाब भी शामिल था।(पंजाब, पाकिस्तान) के नरावेल जिले में सरजाल तेहर कलां के शकरगढ़ में स्थित यह जैश- ए- मोहम्मद का लांचिग पैड है । यह एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मे संचालित होता है यहसीमासे लगभग 6 किमी दूर है और यहां पर सुरंग निर्माण ड्रोन आदि का संचालन सिखाया जाता है ।

इसी प्रकार सियालकोट का महमूना जोया सेंटर इसका इस्तेमाल हिजबुल मुजाहिदीन करता है। बरनाला का मरकज अहले हदीस यह भी लश्कर को सेंटर है। कोटली का मरकज अब्बास भी एक मुख्य आतंकी केंद्र है जहां पर बड़े आतंकी सरगना घुसपैठ की योजना बनाते हैं और उन्हें सीमा पार कराने में मदद तक करते हैं। मुजफ्फराबाद का शावाई नाल्लाह कैंप भी एक बहुत बड़ा आतंकी शिविर केंद्र है । मुज़फ्फराबाद में लाल किले के सामने स्थित यह जैश -ए मोहम्मद का मुख्य केंद्र है यहां पर पाकिस्तानी सेना के रेंजर आतंकियो को प्रशिक्षण देते हैं। इन सभी केंद्रों पर किसी भी समय में 100 से 600 आतंकी रहते हैं।

आज यह सभी प्रशिक्षण केंद्र व लॉचिंग पैड ध्वस्त हो चके हैं और पाकिस्तान में हाहाकर मचा हुआ है। भारतीय सेना का बदला पूरा हो जाने के बाद भारतीय सेना के इतिहास में पहली बार दो महिला अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम का पत्रकार वार्ता में विधिवत वीडियो जारी किया और ऑपरेशन सिन्दूर की पूरी जानकारी दी।

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ऐतिहासिक निर्णय है जातिगत जनगणना https://visionviksitbharat.com/the-historic-decision-is-the-caste-based-census/ https://visionviksitbharat.com/the-historic-decision-is-the-caste-based-census/#respond Thu, 08 May 2025 05:47:56 +0000 https://visionviksitbharat.com/?p=1724   जातिगत जनगणना पर संघ का दृष्टिकोण भी स्पष्ट है कि यदि जातिगत जनगणना का उद्देश्य न्याय ओैर कल्याण है तो समर्थन योग्य है और यदि उसका उद्देश्य राजनीति और…

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जातिगत जनगणना पर संघ का दृष्टिकोण भी स्पष्ट है कि यदि जातिगत जनगणना का उद्देश्य न्याय ओैर कल्याण है तो समर्थन योग्य है और यदि उसका उद्देश्य राजनीति और समाज को बांटना है तो उसका सदैव विरोध है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इस निर्णय का समर्थन किया है।

 

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा धर्म पूछकर किये गये हिन्दू नरसंहार के बाद जनमानस में उपजे आक्रोष और पाकिस्तान पर कार्यवाही की प्रतीक्षा कर रहा आम जनमानस तथा राजनैतिक दल उस समय हैरान रह गए जब केंद्र सरकार ने जातिगत जनगणना कराने का बड़ा निर्णय सुनाया। केंद्र सरकार का यह निर्णय आते ही देश का राजनैतिक विमर्श जातिगत जनगणना पर केन्द्रित हो गया। आमजन यद्यपि यह सोच रहा है कि इस समय जब हम आतंकवादियों के शवों की प्रतीक्षा कर रहे हैं उस समय प्रधानमंत्री जी को ये क्या सूझ पड़ी, किन्तु आश्वस्त है कि प्रधानमंत्री जी ने ऐसा किया है तो अवश्य इसके पीछे कुछ रणनीति होगी। उधर कांग्रेस के नेतृत्व में इंडी गठबंधन इसे अपनी विजय बताकर प्रसन्नता व्यक्त कर रहा है। कांग्रेस तो इतनी आतुर हो गई कि उसने सोशल मीडिया पर, “सरकार उनकी, सिस्टम हमारा” कैप्शन के साथ राहुल का प्रचार आरम्भ कर दिया, फिर उनको याद दिलाना पड़ा कि ये फिल्म में एक खलनायिका द्वारा कहे गए शब्द हैं जो आतंकवादियों के साथ है।

पहलगाम आतंकी हमले के पश्चात प्रधानमंत्री जी ने कदा रुख अपनाया है और कहा है, हम आतंकवादियों तथा उनके पीछे छुपे लोगों का धरती के अंत तक पीछा करेंगे और सजा देंगे। प्रधानमंत्री ने इस बार पाकिस्तान को कल्पना से अधिक दंड मिलने की बात भी कही है। संभव है, इस प्रक्रिया में समय लगे और लम्बे समय तक युद्ध की परिस्थितियां बनी रहें। उस समय में विपक्ष अपना राजनैतिक अस्तित्व बचाए रखने के लिए क्या – क्या कर सकता है? स्वाभाविक रूप से जाती जनगणना जैसे मुद्दों को हवा देगा। भारत की अवश्यम्भावी विजय के उपरांत विपक्ष के पास क्या मुद्दा होगा? स्वाभाविक है वो पुनः अत्यंत आक्रामक रूप से जातिगत जनगणना के मुद्दे को उठाएगा यही कारण है कि केंद्र सरकार ने पहले ही जातिगत जनगणना का निर्णय लेकर उन वर्गों की चिंताओं को दूर कर दिया है जो मानती है कि जातिगत जनगणना उनके पक्ष में होगी और जिनको विश्वास में लेकर राहुल गाँधी तथा उनके मित्र देश और समाज का वातावरण बिगाड़ सकते हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सामाजिक समरसता के विचारों को आत्मसात करते हुए तथा संघ को अपने निर्णय में साथ लेकर केंद्र सरकार ने यह निर्णय लिया है।

कांग्रेस ने जातिगत जनगणना को एक राजनतिक हथियार के रूप में उपयोग करके 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के मिशन 400 को पूरा होने से रोक दिया यद्यपि उसके बाद हरियाणा, दिल्ली और महाराष्ट्र में भाजपा के नए नारों “एक रहेंगे नेक रहेंगे“ और “बटेंगे तो कटेंगे“ ने परिस्थितियाँ पूरी तरह बदल दीं। वर्तमान में भारत -पाक के मध्य चल रहे तनाव के समय सरकार द्वारा लिया गया जातिगत जनगणना का निर्णय विपक्ष के लिए तनाव पैदा करने है भले ही इस समय वो इस फैसले को अपनी जीत मानकर जश्न मना रहा है। वास्तविकता यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सहयोगियों व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ मिलकर विरोधी दलों के खतरनाक राजनीतिक एजेंडे पर पॉलटिकिल सर्जिकल स्ट्राइक कर दी है और एक बड़ा मुद्दा उनके हाथों से छीन लिया है।

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सदन और सदन के बाहर हमेशा यही कहते थे कि जब भी हमें मौका मिलेगा हम संसद से जातिगत जनगणना का प्रस्ताव पारित करवाकर रहेंगे। प्रधानमंत्री मोदी जी ने उनके इस कथन का पटाक्षेप कर दिया है और यह भी स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस जातिगत जनगणना पर केवल राजनीति ही करती रही है।

वर्ष 1931 में जब देश में अंग्रेजों की सरकार थी तब जातिगत जनगणना हुई थी, स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत में अधिकांश समय कांग्रेस की सरकारें ही रहीं किंतु कांग्रेस ने कभी भी जातिगत जनगणना करवाने का साहस नहीं किया अपितु पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से लेकर मनमोहन सिंह सरकार के गृहमंत्री पी चिदम्बरम तक ने सदन मे खड़े होकर 16 बिन्दुओं को आधार मानकर जातिगत जनगणना का कड़ा विरोध किया था और इसे देशहित के खिलाफ बताया था। यह एक कटु सत्य है किआज जिस कांग्रेस के नेता राहुल गाँधी जातिगत जनगणना के नाम पर देश को अराजकता की आग में झोकने का प्रयास कर रहे हैं उस कांग्रेस ने जातिगत जनगणना का हमेशा विरोध किया और इसे लागू नहीं होने दिया।

पत्रकार वार्ता में जातिगत जनगणना के निर्णय की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि जातिगत जनगणना कराना समता, समरसता, सुशासन और सामाजिक न्याय के एक नये युग का आरंभ है। अब जातिगत जनगणना का मुद्दा पूरी तरह से बीजेपी के पाले में है। भाजपा ने कभी भी जातिगत जनगणना का विरोध नहीं किया। स्मरणीय है कि जब बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री नीतिश कुमार इंडी गठबंधन में शामिल थे और उन्होंने जातिगत जनगणना को लेकर सर्वदलीय बैठक बुलाई थी तब बीजेपी ने भी उस बैठक में भाग लिया था और जातिगत जनगणना का समर्थन किया था यद्यपि बीजेपी को विपक्ष के तौर तरीकों पर आपत्ति थी क्योंकि जनगणना मूलतः केंद सरकार का विषय है और इसमें राज्य सरकारों की कोई भूमिका नहीं है। अभी तक जिन राज्यों में यह जनगणना हुई है वह राजनीति से प्रेरित तथा सामाजिक तनाव बढ़ाने वाली रही है।

केंद्र सरकार की जातिगत जनगणना से पहली बार वास्तविक आंकड़े सामने आयेंगे।इस जनगणना के माध्यम से कई चीजे स्पष्ट हो सकेंगी जिसमें एक यह बड़ा मुददा भी है कि हर जाति के दंबग लोग ही आरक्षण का लाभ उठाते चले आ रहे हैं जबकि उन्हीं जातियों और समाज के अन्य लोग पिछड़ते ही चले जा रहे हैं, उन्हें आरक्षण व सरकार की अन्य सुविधाओं का प्रत्यक्ष लाभ नहीं मिल पा रहा है अर्थात क्रीमिलेयर का भी वास्तविक वर्गीकरण हो सकेगा।

विपक्ष की जातिगत जनगणना केवल हिंदू समाज को जातियों में विभाजित करने की नीयत से थी जबकि मोदी सरकार अब संपूर्णता के आधार पर जातिगत जनगणना कराने जा रही हैं देश के इतिहास में पहली बार मुस्लिम समाज की जातियों की भी जनगणना होने जा रही है। इस जनगणना के माध्यम से धर्मांतरण करने वालों का आंकड़ा भी जुटाया जायेगा। धर्म परिवर्तन करने के कारण देश के कई हिस्सों की जनसंख्या और भौगोलिक संरचना में तेजी से बदलाव देखा गया है ।ऐसे में सरकार के यह भी पता करने का इरादा है कि किन धर्मों और जाति विशेष के लोगों में धर्मांतरण हुआ और किस हिस्से में इसका प्रभाव अधिक है। जातिगत जनगणना का परिणाम सामने आने के बाद सामाजिक आर्थिक स्थिति का सटीक डेटा मिल सकेगा। वंचित समूहों के लिए नीतियां बनाने में मदद मिल सकेगी संसाधनों और अवसरो का समान वितरण हो सकेगा तथा समाजिक असमानता को कम करने में मदद मिलने के साथ जाति व्यवस्था के कारण होने वाले भेदभाव की समस्या का भी समाधान हो सकेगा।

जातिगत जनगणना पर संघ का दृष्टिकोण भी स्पष्ट है कि यदि जातिगत जनगणना का उद्देश्य न्याय ओैर कल्याण है तो समर्थन योग्य है और यदि उसका उद्देश्य राजनीति और समाज को बांटना है तो उसका सदैव विरोध है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इस निर्णय का समर्थन किया है। संघ का विचार है कि “जाति का अंत आांकड़ों से नहीं, आत्मीयता से होगा लेकिन आंकड़ो के बिना न तो नीति बनेगी न्याय मिलेगा।“ वैसे भी संघ का मूल कार्य सामाजिक समरसता ही है और वह आगामी समय में सामाजिक समरसता का एक महा अभियान चलाने वाला है। वर्तमान जातिगत जनगणना का स्वरूप संघ के दृष्टिकोण से मेल खाता है।

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हिन्दुओं पर आतंक की कुदृष्टि एवं मोदी की कल्पना से भी बड़ी सजा का संकल्प https://visionviksitbharat.com/a-resolve-to-punish-those-who-cast-a-terrorizing-eye-on-hindus-with-consequences-beyond-imagination/ https://visionviksitbharat.com/a-resolve-to-punish-those-who-cast-a-terrorizing-eye-on-hindus-with-consequences-beyond-imagination/#respond Fri, 25 Apr 2025 05:53:01 +0000 https://visionviksitbharat.com/?p=1655 जब ऐसा प्रतीत होने लगा कि कश्मीर आतंकवाद के साए से निकलकर विकास और शांति के पथ पर आगे बढ़ रहा है तब ही पाकिस्तान ने अपने आतंकी संगठनों और…

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जब ऐसा प्रतीत होने लगा कि कश्मीर आतंकवाद के साए से निकलकर विकास और शांति के पथ पर आगे बढ़ रहा है तब ही पाकिस्तान ने अपने आतंकी संगठनों और कश्मीर में अपने बचे खुचे स्लीपर सेल की सहायता से एक बार फिर आतंक का नंगा नाच किया। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में जो हुआ उसने देश की नब्बे के दशक की डरावनी स्मृतियां ताज़ी कर दीं। हथियारबंद आतंकवादियों ने बैसरन पहुंचे हिन्दू पर्यटकों अंधाधुंध फायरिंग कर मौत के घाट उतार दिया। हिन्दुओं से उनका धर्म पूछा, कलमा सुनाने को कहा, नीचे के कपड़े उतारकर मजहब जांचा और सिर में गोली मार दी। बिलखते हुए औरतों और बच्चों से कहा जाओ- मोदी को बताओ।

आतंकवादियों ने यह घृणित काम उस समय किया जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे डी वेंस भारत में थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब के दौरे पर। आतंकवादियों ने हिंदुओं का नरसंहार करने के लिए मंगलवार का दिन चुना जिसे हिन्दू बहुत पवित्र मानते हैं। आतंकवादी बॉडी कैमरा पहने हुए थे, उन्होंने हत्याओं का वीडियो भी बनाया। पाकिस्तानी आतंकवादियों ने सोचा था कि ऐसा कुछ करके वो भारत को एक बार फिर अस्थिर कर देंगे लेकिन वो भूल गए कि अब भारत बहुत आगे बढ़ चुका है और ईंट का जवाब पत्थर से देगा। घटना की सूचना आते ही प्रधानमंत्री सऊदी अरब से, गृह मंत्री से बात करते हैं और गृहमंत्री अमित शाह तत्काल श्रीनगर पहंचकर सुरक्षा समीखा बैठकें करते हैं, घटन स्थल पर जाते हैं, पीड़ितों से मिलते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना दौरा बीच में ही छोड़कर वापस आ जाते हैं और एअरपोर्ट पर भी बैठक कर अद्यतन जानकारी लेते हैं । वित्तमंत्री अमेरिका से भारत निकल पड़ती हैं। उसी दिन कैबिनेट समिति की बैठक होती है और पाकिस्तान सम्बन्धी कूटनीतिक निर्णय लिए जाते हैं। पहलगाम हिंदू नर संहार के प्रत्येक पीड़ित का शव सैनिक सम्मान के साथ घर पहुंचाया जा रहा है।

भारत सरकार ने पाकिस्तान को कूटनीतिक दृष्टि से कड़ा संदेश देते हुए 1960 का सिन्धु जल समझौता निलंबित कर दिया है, ज्ञातव्य है कि 1965 और 1971 के युद्ध में भी इसे निलंबित नहीं किया गया था। अटारी बार्डर बंद कर दिया गया है। सभी पाकिस्तानी नागरिकों का वीजा रद्द करते हुए उनको 48 घंटे में भारत छोड़ने के लिए कहा गया है और भारत अपने नागरिकों को पाकिस्तान से वापस बुला रहा है। दूतावासों अधिकारियों की संख्या 55 से घटाकर 30 की जा रही है। यही नहीं भारतीय सेनाओं को हाई एलर्ट कर दिया गया है । कश्मीर घाटी में भी आपरेशन आलआउट में तीव्रता लाई जा रही है। भारत के सभी प्रमुख राजनयिकों के साथ बैठक करके उन्हें भारत के पक्ष से अवगत करा दिया है। रूस, अमेरिका, इजराइल, इटली जैसे सभी प्रमुख राष्ट्रों ने भारत की आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता ( जीरो टॉलरेंस) की नीति का समर्थन किया है।

प्रधानमंत्री ने 24 अप्रैल को बिहार के मधुबनी में अत्यंत सख्त शब्दों का प्रयोग करते हुए चेतावनी दी है, कि इस घटना में शामिल तथा इसके पीछे के षड्यंत्रकारियों की पहचान करके उनको दंड देने के लिए भारत धरती के किसी भी कोने में जाएगा। इस बार इन षड्यंत्रकारियों को ऐसा दंड मिलेगा जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं करी होगी। अब उनकी बची खुची जमीन को भी मिट्टी में मिलाने का समय आ गया है। प्रधानमंत्री जी ने इस बात को अंग्रेजी में दोहराते हुए, सम्पूर्ण विश्व को भी ये सन्देश दिया कि. भारत अब रुकने वाला नहीं है।
धारा 370 हटने के बाद से ही पाकिस्तान तथा उसके आतंकी नेटवर्क में बेचैनी थी और ये लोग बड़ी वारदात को अंजाम देने का लगातार प्रयास कर रहे थे अंततः उमर अब्दुल्ला सरकार की सरकार वापस आने के बाद उनको यह मौका मिल ही गया। आतंकवादी गुट कश्मीर में लगातार बढ़ रहे पर्यटन से परेशान थे क्योंकि गरीब कश्मीरी मुसलमानों जिनमें गुज्जर, बकरवाल जैसे शिया मुस्लमान शामिल हैं उनसे उनको समर्थन नहीं मिल पा रहा था। कश्मीर के गरीब परिवार पर्यटकों के आगमन से ही फलते -फूलते हैं और उनका जीवन -यापन चलता है। बीते दिनों घाटी में पर्यटकों के खिलाफ बयानबाजी की गई और पर्यटकों के खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास किया गया इनमें सत्ताधारी ओमर अब्दुल्ला की पार्टी के लोग भी शामिल थे।

आज प्रधानमंत्री के अनथक प्रयासों से कश्मीर के हालात भले ही बदल रहे हों लेकिन स्थानीय स्तर पर विशेष रूप से घटी के अब्दुल्ला और मुफ़्ती परिवारों के आस पास अभी भी ऐसे तत्व मौजूद हैं जिनके मन में पाकिस्तान के प्रति प्रेम जागता रहता है और वो अनर्गल बयानबाजी करते रहते हैं। पहलगाम की आतंकी घटना जहाँ घटी वो स्थान अमरनाथ यात्रा के दौरान ही खुलता है, इस स्थान को टूर ऑपरेटर्स ने बिना सुरक्षा बलों को सूचित किये कैसे खोल दिया? वो कौन से टूर ऑपरेटर्स हैं? स्वाभाविक है ये हमला बिना स्थानीय लोगों की मिलीभगत के नहीं हुआ है और यही कारण है कि हमलावरों की खोज, पहचान के लिए अब तक 500 से अधिक संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है।

आतंकी हमले में मारे गए मंजुनाथ की पत्नीपल्लवी राव, जिनसे आतंकियों ने कहा – जाओ मोदी को बताओ ने , रिपब्लिक चैनल पर अर्नब गोस्वामी से बात करते हुए कहा – “मेरी एक ही रिक्वेस्ट है मोदी जी से कि भारत का सुनते ही आतंकियों को कांपना चाहिए” और मोदी जी ने पुरे विश्व के समक्ष इसकी घोषणा भी कर दी है। उधर मुस्लिम तुष्टीकरण में अंधे दल इस दुखद अवसर को भी अपने वोट बैंक को खुश करने के लिए भुना लेना चाहते हैं । पहले कांग्रेस पार्टी के दामाद राबर्ट्र वार्ड्रा ने हैरान करने वाला बयान दिया फिर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने पहलगाम आतंकी हमले को महज एक हादसा बताकर हल्का करने का असफल प्रयास किया,इसी प्रकार का आपत्तिजनक बयान शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने दिया। इन सभी दलों के नेता और प्रवक्ता इस सत्य को झुठलाने में लगे हैं कि आतंकवादियों ने घर्म पूछकर हिंदुओं का नरसंहार किया है। यह लोग पाकिस्तान की निंदा तक नही कर पा रहे हैं, इनका व्यवहार पाकिस्तान व आंतकियों के लिए कवर फायर का काम कर रहा है।

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भारतीय मिसाइलों व रक्षा उपकरणों का बज रहा दुनिया में डंका https://visionviksitbharat.com/indian-missiles-and-defense-equipment-are-earning-global-acclaim/ https://visionviksitbharat.com/indian-missiles-and-defense-equipment-are-earning-global-acclaim/#respond Fri, 25 Apr 2025 05:47:11 +0000 https://visionviksitbharat.com/?p=1652 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सर्वांगीण विकास के पथ पर बढ़ता हुआ आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है। रक्षा क्षेत्र भी इस धारा से अछूता नहीं है इसमें भी…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सर्वांगीण विकास के पथ पर बढ़ता हुआ आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है। रक्षा क्षेत्र भी इस धारा से अछूता नहीं है इसमें भी अहम और व्यापक परिवर्तन दिख रहा है । 2014 के पूर्व मात्र एक दशक पूर्व तक भारत की पहचान रक्षा उपकरणों के खरीदार की हुआ करती थी। रक्षा खरीद में घोटालों के समाचार आना सामान्य बात थी फिर भी ख़रीदे गए हथियारों की समय पर आपूर्ति नहीं होती थी।

मोदी जी के नेतृत्व में ये परिस्थितियाँ तीव्रता के साथ बदल रही हैं। अब भारत जल, थल और नभ तीनों सेनाओं के सभी अंगों को सुदृढ़ करने के लिए दिन-रात प्रयास कर रहा है जिससे रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता और बल दोनों निरंतर बढ़ रहे हैं। भारत के रक्षा वैज्ञानिक निरंतर शोध में में व्यस्त हैं। हर दिन किसी न किसी मिसाइल का सफल परीक्षण किया जा रहा है, रक्षा उपकरणों का उत्पादन बढ़ाया जा रहा है जिसके फलस्वरूप भारत की मिसाइलों व रक्षा उपकरणों का डंका विश्व बार में बजने लगा है। अब भारत रक्षा उपकरणों तथा तकनीक का क्रेता ही नहीं विक्रेता भी बन रहा है। द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के अंतर्गत होने वाले समझौतों में भारत यह बात भी शामिल करता है कि क्रय किये जा रहे हथियारों का निर्माण व सम्बंधित प्रशिक्षण भी भारत में हो। राफेल लड़ाकू विमान इसका प्रमुख उदाहरण है।

आज भारतीय मिसाइलों की क्षमता से विश्व प्रभावित हो रहा है और कई देश भारतीय मिसाइलें खरीदकर उन्हें अपनी सीमाओं की सुरक्षा में लगाना चाहते हैं । वह छोटे देश तथा जिनकी सीमा चीन से लगी हुई है या फिर जिन पर विस्तारवादी चीन की गिद्ध दृष्टि लगी है, विशेष रूप से भारत की ब्रह्मोस मिसाइल खरीदकर अपने यहां तैनात कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक कुशल रणनीतिकार की तरह चीन व पाकिस्तान को चारों ओर से घेरने का काम कर रहे हैं, जिसमें ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें महत्वपूर्ण हैं। ब्रह्मोस एक ऐसी उन्नत मिसाइल है जिसे न केवल दक्षिण चीन सागर के राष्ट्र अपितु बड़े मुस्लिम राष्ट्र भी खरीद रहे हैं।

चीन के शत्रु फिलीपींस को भारत ने ब्रह्मोस दी है। फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइलो का निर्यात भारत द्वारा किसी भी देश के साथ किया गया अब तक का सबसे बड़ा रक्षा विक्रय समझौता है। भारत ने ब्रह्मोस सुपर सोनिक मिसाइल की आपूर्ति के लिए जनवरी 2022 में फिलीपींस के साथ 375 मिलियन डालर का समझौता किया था जो कि अब लागू हो चुका है। अप्रैल- 2024 फिलीपींस को ब्रह्मोस की पहली खेप मिली । इंडोनेशिया भी भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल खरीदने वाला है। वियतनाम और मलेशिया जैसे दक्षिण पूर्व एशियाई देशों ने भी इस अत्याधुनिक मिसाइल को खरीदने में रुचि दिखाई है।

आगामी दिनों में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश भी ब्रह्मोस मिसाइल के बड़े खरीददार बन सकते हैं। श्रीलंका जैसे छोटे देश जिनकी सीमा चीन से मिलती है उन सभी देशों के साथ ब्रह्मोस को तैनात करने के लिए बातचीत चल रही है। साथ ही यह वर्ष ब्रह्मोस मिसाइल का 25वां वर्ष मनाया जा रहा है इसलिए 25 देशों के साथ ब्रह्मोस की डील को लेकर वार्ता चल रही है जिसमें कुछ देशों के साथ वार्ता अंतिम चरण में पहंच चुकी है।

ब्रह्मोस की विषेषता – सबसे तेज सुपरसेनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस भूमि, वायु, जल यानि समुद्र की गहराइयों में भी पलक झपकते ही शत्रु को निशाना बना लेती है। 12 जून 2001 को मिसाइल ने अपनी पहली सफल उड़ान भरी थी । यह भारत और रूस की एक संयुक्त परियोजना है जिस पर लगातार काम चल रहा है। इस मिसाइल का नामकरण भारत की नदी ब्रह्मपुत्र और मास्को की नदी मोसक्वा के नाम पर किया गया है। 24 जनवरी 2024 के ब्रह्मोस के नये उन्नत वर्जन का सफल परीक्षण किया गया। मिसाइल की रेंज को बढ़ाया गया है और साथ ही तकनीक को भी बेहतर बनाया गया है।यह मिसाइल अपनी सटीकता के लिए जानी जाती है। अब इस मिसाइल की रेंज बढ़कर 800 किमी हो गई है जबकि पहले रेंज केवल 200 किमी तक ही सीमित थी। यह हवा में ही रास्ता बदलने तथा चलते फिरते टारगेट को भी ध्वस्त करने में सक्षम है। यह 10 मीटर की ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम हैं । यह एक ऐसी मिसाइल है जिसे शत्रु अपने रडार से देख नहीं पायेगा। यह मिसाइल 1200 यूनिट की ऊर्जा पैदा करती है जो किसी भी बड़े टारगेट को पलक झपकते ही ध्वस्त कर सकती है। ब्रह्मोस मिसाइल भारतीय नौसेना के कई युद्धपोतों पर तैनात है।

ब्रह्मोस मिसाइल के बाद भारत के कई अन्य हथियार भी विदेशी की सेनाओं में होंगे जिसमें आकाश मिसाइल, अर्जुन टैंक, लाइट एयरक्राफ्ट जैसे कई उपकरण शामिल हैं जिनके निर्यात करने की तैयारियां चल रही हैं।

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भारत कोई धर्मशाला नहीं : बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ ऐतिहासिक कदम https://visionviksitbharat.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%88-%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%be/ https://visionviksitbharat.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%88-%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%be/#respond Fri, 25 Apr 2025 05:43:29 +0000 https://visionviksitbharat.com/?p=1649 2025 में बजट के अतिरिक्त भी कई ऐतिहासिक विधेयक पारित हुए हें जिनमें से एक है आब्रजन और विदेशियों विषयक विधेयक -2025 । यह विधेयक भारत को वर्ष 2047 तक…

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2025 में बजट के अतिरिक्त भी कई ऐतिहासिक विधेयक पारित हुए हें जिनमें से एक है आब्रजन और विदेशियों विषयक विधेयक -2025 । यह विधेयक भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में अग्रणी भूमिका निभाने वाला तो है ही साथ ही भारत की आंतरिक व वाह्य सुरक्षा तंत्र और आर्थिक तंत्र को भी मजबूत बनाने वाला भी है। जब यह विधेयक अधिसूचित होकर पूरे भारत में लागू हो जायेगा तब बांग्लादेशी व रोहिंग्याओं की अवैध घुसपैठ सहित अनेक प्रकार के अपराधों पर भी लगाम लग सकेगी।

इस विधेयक के कानून बन जाने के बाद कोई भी विदेशी नागरिक पहले की तरह भारत में घुस कर, भारत के किसी भी हिस्से में जाकर निवास करते हुए भारत विरोधी गतिविधियों में संलिप्त नहीं हो पाएगा। अब सीमा पार करने वाले हर व्यक्ति का पूरा डाटा एकत्र किया जायेगा । अभी भारत आने वाले विदेशी नागरिकों का कोई डाटा उपलब्ध नहीं है। यह विधेयक भारत की एकता, अखंडता तथा सुरक्षा के लिए अतयंत महत्वपूर्ण है । इस बिल के लागू हो जाने के बाद अवैध रोहिंग्या/बांग्लादेशी घुसपैठ पर रोकथाम ही नहीं लगेगी अपितु ऐसे अराजक तत्व जो समाज में घुल मिलकर छोटे मोटे अपराधों में संलिप्त हो रहे हैं तथा समाज का वातावरण प्रदूषित करते हुए लवजिहाद व धर्मान्तरण जैसी गतिविधियों में संलिप्त हो जाते हैं उनसे भी निपटा जा सकेगा।

इस विधेयक पर संसद के दोनों सदनों में चर्चा के दौरान स्पष्ट हुआ कि भारत में अवैध घुसपैठ की समस्या कितना विकराल रूप ले चुकी है। भारत के सभी मेट्रो शहर अवैध अराजक तत्वों के निशाने पर हैं। भारत के अधिकांश सीमावर्ती क्षेत्रों तथा समस्त पूर्वी राज्यों जिनमें असम और पश्चिम बंगाल प्रमुख हैं में यह समस्या नासूर बन चुकी है। पश्चिम बंगाल के तीन सीमावर्ती जिलों की डेमेग्राफी अवैध घुसपैठ के कारण बदल चुकी है । गृह राज्यमंत्री नित्यांद राय ने जब सदन में बताया कि बांग्लादेशी घुसपैठ की सबसे अधिक समस्या कांग्रेस शासित राज्यों कर्नाटक, झारखंड, तेलंगना तथा तृणमूल कांग्रेस शासित राज्य पश्चिम बंगाल में है क्योंकि यहां की राज्य सरकारें सहयोग नहीं कर रही हैं तब विपक्षी दलो ने हंगामा करते हुए सदन का बहिष्कार कर दिया। गृहराज्य मंत्री ने अवगत कराया कि बंगाल सरकार सीमा पर बाड़ नहीं लगाने दे रही है साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सीमा पर टीएमसी के कार्यकर्ता ही बीएसएफ के कार्यों में बाधा डालने का काम कर रहे हैं जिसके कारण बांग्लादेशी घुसपैठ पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। लोकसभा में बहस के दौरान ही गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट कर दिया कि भारत कोई “धर्मशाला“ नहीं हैं।

विधेयक पर बहस के दौरान घुसपैठ व शरणार्थी शब्द को स्पष्ट किया गया क्योंकि विपक्षी दलों के सांसद तुष्टिकरण की विकृत राजनीति के कारण इन दोनों शब्दों का घालमेल कर रहे थे। ये विपक्षी सांसद इस विधयेक को वसुधैव कुटुंबकम की भवना से परे बताकर भ्रम व अराजकता की राजनीति करने का प्रयास कर रहे थे किंतु सरकार ने अपने तर्कों से विपक्ष को बेनकाब कर दिया जिसके परिणामस्वरूप वे राज्यसभा में हंगामा करते हुए सदन से बाहर चले गये।

इस नये कानून में विदेशी अधिनियम 1946, पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम 1920 तथा विदेशियों का पंजीकरण अधिनियम 1939 और आब्रजन (वाहक दायित्व ) अधिनियम 2000 को निरस्त करते हुए एक नया व्यापक कानून बनाने की आवयकता की पहचान करते हुए नया आब्रजन और विदेशी विधेयक 2025 लाया गया है। नये कानून का एक उद्देश्य यह भी है कि कानूनों की बहुलता और अतिव्यापन से बचा जाये तथा विदेशियों से संबंधित मामलों को विनियमित किया जाए, जिसमें वीजा की आवश्यकता, पंजीकरण और अन्य यात्रा संबंधी दस्तावेज (पासपोर्ट) आदि शामिल है । इस नये कानून के माध्यम से भारत में प्रवेश करने और बाहर जाने वाले सभी लोगों के लिए सभी प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया जा सकेगा।

नये कानून के अनुसार किसी भी विदेशी को बिना वैध पासपोर्ट या दस्तावेजों के भारत आने पर 7 साल की जेल और 10 लाख रुपये का जुर्माना देना होगा। गलत जानकारी देने या दस्तावेजों में गड़बड़ी करने पर 3 साल की जेल और 3 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है। भारत में बिना वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेजों के माध्यम से प्रवेश करने पर तुरंत हिरासत में लिया जायेगा। अब इस विधेयक के नये नियमों के अनुरूप अगर कोई मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है तो अधिक कड़ी कार्यवाही की जायेगी। यह विधेयक केंद्र सरकार को उन स्थानों का नियंत्रण करने का अधिकार भी देता है जहां विदेशियो काआना जाना लगा रहता है । इसके तहत मालिक को परिसर को बंद करने, निर्दिष्ट शर्तों के साथ इसके उपयोग की अनुमति देने या सभी या निर्दिष्ट वर्ग के विदेशियों को प्रवेश देने से मना करने का अधिकार का दिया गया है।

निरस्त किये गए कानून की कमियों का लाभ उठाकर ही बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भारत आ रहे थे क्योंकि उस क़ानून में उनकी जांच करने तथा व्यापक पूछताछ की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी। इसी कारण से आज लाखों की संख्या में अवैध नागरिक भारत में रह रहे हैं और अब वह राष्ट्रीय समाजिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं।

गृहमंत्री अमित शाह ने सदन में अपने भाषण के दौरान कहा कि हम नियम बनाकर अवैध घुसपैठ को रोक रहे हैं। हमारी सीमा पर कुछ संवदेनशील स्थान हैं, सेना के अड्डे हैं, उनको दुनियाभर के लिए खुला नहीं छोड़ सकते। पहले भी घुसपैठियो को रोका जा सकता था किंतु कोई नियम नहीं था अतः हमने नियम बनाने का साहस किया है । इस नये कानून से भारत आने वाले विदेशी नागरिकों की जानकारी पुख्ता होगी । सुरक्षा की दृष्टि से ड्रग्स कार्टल, घुसपैठियों की कार्टल, हवाला व्यापारियों को समाप्त करने की व्यवस्था इस विधेयक में की गई है।
गृहमंत्री अमित शाह ने सदन को बताया कि सबसे अधिक बांग्लादेशी व रोहिंग्याओं की घुसपैठ बंगाल से हो रही है। अब तक जितने घुसपैठिये पकड़े गये हैं, उनके आधार कार्ड बंगाल के 24 परगना क्षेत्र के है। तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता ही इन लोगों के अवैध कागज बनवा रहे हैं। नये कानून में अवैध कागज बनवाने वाले भी सजा के दायरे में आ गये हैं। नया कानून 36 धाराओं में निहित है । सभी को कानूनी रूप दिया गया है । सदन में गृहमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि अब जो भारत में केवल भारत के हित के लिए आयेगा वहीं यहां पर रह सकेगा। अब भारत धर्मशाला नही है । सरकार उन लोगों का स्वागत करने के लिए तैयार है जो पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, सेवा या व्यापार के लिए भारत आना चाहते हैं सरकार केवल उन लोगों को भारत आने से रोकेगी जिनके इरादे गलत हैं और जो हमारे लिए खतरा पैदा करेंगे उनसे गंभीरता से निपटा जायेगा।

इस कानून के माध्यम से भारत में गैरकानूनी तरीके से घुसना और यहां बसना मुश्किल हो जायेगा। रोहिंग्या/ बांग्लादेशी घुसपैठ अब चुनाव में भी एक बड़ा मुददा बन गई है । दिल्ली में तो आम आदमी पार्टी कई विधायक बांग्लादेशी व रोहिंग्याओं का फर्जी पासपोर्ट, आधार कार्ड व राशन कार्ड आदि बनवा रहे थे जिनकी जांच चल रही है । केंद्र की सरकार को पूर्ण विश्वास है कि नक्सलवाद, आतंकवाद की तरह आने वाले समय में रोहिंग्या/ बांग्लादेशी घुसपैठ का भी समाधान हो जायेगा और भारत तीव्रता के साथ विकास के पथपर अग्रसर हो सकेगा।

 

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उत्तर प्रदेश का उत्कर्ष काल https://visionviksitbharat.com/the-zenith-of-uttar-pradesh/ https://visionviksitbharat.com/the-zenith-of-uttar-pradesh/#respond Wed, 02 Apr 2025 04:56:46 +0000 https://visionviksitbharat.com/?p=1567   8 वर्षों में प्रति व्यक्ति आय 46 हजार से बढ़कर 1 लाख 24 हजार हो गयी है। अब प्रदेश में आयुध निर्माण भी होने लगा है। महिला, किसान, छात्र,…

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8 वर्षों में प्रति व्यक्ति आय 46 हजार से बढ़कर 1 लाख 24 हजार हो गयी है। अब प्रदेश में आयुध निर्माण भी होने लगा है। महिला, किसान, छात्र, युवा सभी वर्ग के लोग सरकारी योजनाओं से सीधे लाभान्वित हो रहे हैं।

 

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के 8 वर्ष का कार्यकाल पूर्ण हो चुका है। इन 8 वर्षों की सफलताओं और उपलब्धियों को आधार बनाकर भारतीय जनता पार्टी ने मिशन 2027 की तैयारियां भी आरम्भ कर दी हैं। प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने 25 से 27 मार्च 2025 तक हर जिले में तीन दिवसीय विकास उत्सव मनाया जिसमें सरकार की उपलब्धियों का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत किया गया तथा विभिन्न लाभार्थियों से संपर्क कर धरातल को भी परखा गया। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि “प्रदेश वही है, तंत्र वही है बस सरकार बदलने से बदलाव हुआ है और प्रदेश बीमारू प्रदेश से देश का ग्रोथ इंजन बन रहा है, आज प्रदेश श्रम शक्ति से अर्थ शक्ति बने की ओर अग्रसर है।
भाजपा का दावा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में, सबका साथ सबका विकास की नीति व अपराध पर जीरो टालरेंस की नीति को सफलता के साथ पूरा किया जा रहा है। अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करते हुए 222 दुर्दांत अपराधियों का एनकाउंटर किया गया और 930 से अधिक अपराधियों के खिलाफ एरनएसए की कार्यवाही हो चुकी है।

मुख्यमंत्री योगी की बुलडोजर बाबा की छवि प्रदेश की जनता को पसंद है। अब तो अन्य राज्यों में भी लोग “मुख्यमंत्री हो तो योगी जैसा” की बात करने लगे हैं। प्रदेश के अपराधियों में भय का वातावरण उत्पन्न हुआ है क्योंकि अपराधी अगर अपराध करके दूसरे राज्यों में भागकर संरक्षण प्राप्त करने का प्रयास करता है तब भी वह बच नहीं पा रहा है । बेहतर होती कानून व्यवस्था के कारण प्रदेश के हर क्षेत्र में सर्वांगीण विकास में योगदान देने के लिए राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय निवेशक आकर्षित हो रहे हैं। प्रदेश में सांप्रदायिक दंगे नहीं होते, जिससे हिंदू व मुसलमान दोनों ही सुरक्षित महसूस करते हैं। प्रदेश में लव जिहाद व धर्मांतरण जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कानून बनाये गये हैं। प्रदेश में परीक्षाओं में होने वाली नकल को रोकने के लिए भी प्रभावी कानून बनाया गया है जिसका प्रभाव भी दिख रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में सनातन की पुनर्प्रतिष्ठा हो रही है। अयोध्या में प्रभु राम की जन्मस्थली पर दिव्य भव्य मंदिर का उदघाटन संपन्न होने, काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का निर्माण होने और अब प्रयागराज में महाकुंभ -2025 के सफल आयोजन से सनातन धर्मियों के बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता बढ़ी है। आस्था के केन्द्रों के विकास के कारण प्रदेश में तीर्थाटन के लिए आने वालों की संख्या में रिकार्ड वृद्धि हो रही है । अयोध्या, काशी, मथुरा सहित अन्य सभी धार्मिक स्थलों ने घरेलू पर्यटन के क्षेत्र में प्रदेश को बड़ी बढ़त दिलाई है। वर्ष 2024 में प्रदेश में 64.90 करोड़ पर्यटकों का आगमन हुआ जिसके अंतर्गत विदेशी पर्यटकों की संख्या में 6.67 लाख थी। प्रदेश में धार्मिक पर्यटन सहित पर्यटन की अन्य संभावनाओं का भी विकास किया जा रहा है।

एक जिला -एक उत्पाद योजना की ही तरह एक जिला एक पर्यटन स्थल का भी विकास किया जा रहा है। जैसे सीतापुर जिले में नैमिषारण्य, लखनऊ में चंद्रिका देवी मंदिर तथा पुराना हनुमान मंदिर, बाराबंकी में लोधेश्वर महादेव। मीरजापुर जिले में स्थित मां विन्ध्यवासिनी धाम में भी कारिडोर का निर्माण कार्य प्रगति पर है। अयोध्या व काशी के बाद मथुरा वृंदावन के वृहद स्तर पर विकास की बात मुख्यमंत्री जी सदा करते हैं। इस कार्य को सही रूप से पूर्ण करने के के लिए श्री अयोध्या जी तीर्थ विकास परिषद, श्री देवीपाटन तीर्थ विकास परिषद, उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद, श्री विन्ध्य धाम तीर्थ विकास परिषद, चित्रकूट धाम तीर्थ विकास परिषद एवं नैमिषारण्य धाम तीर्थ विकास परिषद का गठन किया गया है ।

प्रदेश में एक्सप्रेस -वे बन रहे हैं और फिर उसी गति से अंतर्जनपदीय सड़कों का भी निर्माण हो रहा है। 8 वर्षों में प्रति व्यक्ति आय 46 हजार से बढ़कर 1लाख 24 हजार हो गयी है। अब प्रदेश में आयुध निर्माण भी होने लगा है। महिला, किसान, छात्र, युवा सभी वर्ग के लोग सरकारी योजनाओं से सीधे लाभान्वित हो रहे हैं। प्रदेश में 8 वर्षे में पौधरोपण अभियान भी व्यापक पैमाने पर चल रहा है जिसके अंतर्गत अब तक 204 करोड़ पौधरोपण हो चुका है जिसका असर यह हुआ है कि 2 लाख एकड़ में हरीतिमा बढ़ी। प्रदेश सरकार सामाजिक सरोकारों में अग्रणी है जिसके अंतर्गत अनाथ परिवारों की सहायता की जा रही है। प्राकृतिक आपदाओं में भी सरकार भरपूर सहायता उपलब्ध करा रही है।
उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बनने की और अग्रसर है जो जीरो पावर्टी स्टेट यानि गरीबी मुक्त प्रदेश होगा। प्रदेश में 15 करोड़ नागरिकों को निशुल्क राशन का वितरण किया जा रहा है।60 लाख माताओं को प्रधानमंत्री मातृ वंदना सहायता का लाभ मिल रहा है। 1 करोड़ परिवारों को घरौनी प्रमाणपत्र मिलने से गांवों में जमीन संपत्ति संबंधी विवादों का निपटारा हो रहा है।

युवाओं को बड़ी संख्या में रोजगार उपलब्ध होने के कारण बेरोजगारी की दर मात्र 3 प्रतिशत रह गई है। केंद्र सरकार की कई जनकल्याणकारी योजनाओं को क्रियान्वित करने में प्रदेश नंबर बन चुका है, इनमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत योजना में सबसे अधिक आयुष्मान कार्ड बने हैं, प्रधामनंत्री आवास योजना के सर्वाधिक लाभर्थी उत्तर प्रदेश से हैं।स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत देश में सबसे अधिक 2.75 करेड से अधिक शौचालय बने। कौशल विकास नीति को लागू करनेवाला देश का प्रथम राज्य यूपी बना है।खाद्यान्न, दूध, आलू आंवला, आम, गन्ना, चीनी और एथेनाल उत्पादन में प्रदेश नंबर वन बन चुका है।400 लाख टन सब्जियों का उत्पादन कर यूपी देश में प्रथम स्थान पर है। एक जिला एक मेडिकल कॉलेज के अंतर्गत प्रदेश के सभी 80 जिलों में मेडिकल कालेज का संचालन किया जा रहा है।

आज प्रदेश में सर्वाधिक एयरपोर्ट हैं । 2017 से पूर्व किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि अयोध्या व श्रावस्ती में भी भव्य एयरपोर्ट बन सकता है किंतु अब एअरपोर्ट कार्य कर रहे है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि अब प्रदेश बेहतर कानून व्यवस्था के बल पर सभी क्षेत्रों मे प्रगति के पथपर अग्रसर हो रहा है। यूपी देश की बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। प्रदेश में गुलामी के प्रतीकों का महिमामंडन नहीं होता अपितु प्रदेश की योजनाओं का नामकरण महापुरुषों के नाम पर किया जा रहा है।
महाकुंभ 2025 के सफल आयोजन के बाद तो यूपी सरकार की प्रतिष्ठा पुरे विश्व में बढ़ गई है। प्रदेश में सांस्कृतिक पुनर्जागरण की गूंज सुनाई दे रही है और निस्संदेह इसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूमिका अत्यंत मतवपूर्ण है। योगी जी के नेतृत्व में प्रदेश अभ्युदय काल देख रहा है।

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भारत और मॉरीशस – प्रगाढ़ होते सम्बन्ध https://visionviksitbharat.com/india-and-mauritius-deepening-relations/ https://visionviksitbharat.com/india-and-mauritius-deepening-relations/#respond Sun, 16 Mar 2025 05:13:06 +0000 https://visionviksitbharat.com/?p=1413   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीन रामगुलाम ने अपने देश का सर्वोच्च सम्मान “द ग्रैंड कमांडर आफ द आडर आफ द स्टार एंड की ऑफ द इंडियन…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीन रामगुलाम ने अपने देश का सर्वोच्च सम्मान “द ग्रैंड कमांडर आफ द आडर आफ द स्टार एंड की ऑफ द इंडियन ओशन“ से सम्मानित किया। मॉरीशस का सर्वोच्च नागरिक सम्मान स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उन भारतीयों का सम्मान है जिन्होंने पीढ़ी दर पीढ़ी इस धरती की सेवा की और मॉरीशस को इस ऊंचाई पर लेकर आए।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय मॉरीशस की यात्रा संपन्न हो चुकी है जो कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण रही है, इस यात्रा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मॉरीशस के 57वें राष्ट्रीय दिवस पर मुख्य अतिथि रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मॉरीशस यात्रा का महत्व इस बात से ही समझा जा सकता है पोर्ट लुई एयरपोर्ट पर उनके स्वागत के लिए वहां का उच्च नेतृत्व अपने दलबल के साथ उपस्थित रहा। प्रधानमंत्री के मॉरीशस एयरपोर्ट पहुंचने पर भारतीय समुदाय की महिलाओं ने “गीत गवई” नामक पारपंरिक बिहारी सांस्कृतिक प्रस्तुति के माध्यम से उनका स्वागत किया गया।
भारत और मॉरीशस के मध्य सम्बंध वैसे तो लम्बे समय से हैं किंतु 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राजग गठबंधन की सरकार आने के बाद से ये संबंध निरंतर प्रगाढ़ हो रहे हैं। भारत और मारीशस के मध्य सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, आध्यात्मिक संबंध सदा रहे हैं जिनमें अब आर्थिक, सामरिक व रणनीतिक पक्ष भी जुड़ गए हैं। भारत और विशेष रूप से प्रधानमंत्री मोदी मॉरिशस के साथ अपने संबंधों को कितना महत्व देते है इसका पता इसी बात से चलता है कि प्रधानमंत्री मोदी 2015 में भी मॉरीशस राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए थे। भारत की वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 2024 में मारीशस के राष्ट्रीय दिवस की मुख्यअतिथि बनीं। 2014, 2019 और 2024 में मारीशस के प्रतिनिधि नरेन्द्र मोदी जी के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने आए थे। नई दिल्ली में आयोजित जी -20 शिखर सम्मेलन में मॉरीशस एक “विशेष आमंत्रित सदस्य“ था। इस अवसर पर मॉरीशस ने भारत व अन्य देशों के साथ मिलकर वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन का शुभारंभ किया था।
इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीन रामगुलाम ने अपने देश का सर्वोच्च सम्मान “द ग्रैंड कमांडर आफ द आडर आफ द स्टार एंड की ऑफ द इंडियन ओशन“ से सम्मानित किया। मॉरीशस का सर्वोच्च नागरिक सम्मान स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उन भारतीयों का सम्मान है जिन्होंने पीढ़ी दर पीढ़ी इस धरती की सेवा की और मॉरीशस को इस ऊंचाई पर लेकर आए।भारत और मॉरीशस के संबंध कितने पुराने और प्रगाढ़ है इस बात का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि 12 मार्च का दिन वही दिन है जब महात्मा गांधी ने गुलामी के खिलाफ दांडी सत्याग्रह प्रारम्भ किया था।प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में याद दिलाया कि जब अयोध्या के राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा हो रही थी तब मॉरीशस में भी आस्था और भावना का प्रबल ज्वार दिखाई पड़ रहा था। मॉरीशस सरकार ने उस दिन आधे दिन का अवकाश घोषित किया था जिससे लोग प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम सीधा देख सकें । अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने इस वर्ष घोषित मखाना बोर्ड का भी उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब भी विदेश यात्रा पर जाते है तो वहां निवास करने वाले भारतीय मूल के समुदाय को संबोधित करते हुए सांस्कृतिक ,सामाजिक व आत्मीय संबंधो को और मजबूत करने का प्रयास करते हैं जिसका व्यापक प्रभाव दोनों देशों के संबंधों पर भी पड़ता है। प्रधानमंत्री मोदी ने मॉरीशस में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि यहां की मिट्टी में, हवा में, पानी में अपनेपन का एहसास है। उन्होंने वहां उपस्थित समुदाय को भोजपुरी भाषा में भी संबोधित किया क्योंकि मॉरीशस में भारी संख्या में भोजपुरी बोलने वाले बिहारी लोग निवास करते हैं। प्रधानमंत्री के संबोधन के बीच उपस्थित जनसमुदाय भी मोदी- मोदी के नारे लगा रहा था।
रणनीतिक, कूटनीतिक और सामरिक दृष्टिकोण से मॉरीशस के साथ मजबूत रिश्ते भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यह एक ऐसा पुल है जो भारत को ग्लोबल साउथ से जोड़ता है। भारत और मॉरीशस के रिश्तों के मध्य हिंद महसागर में आपसी साझेदारी बढ़ाना मुख्य उददेश्य है।यह भारतीय सुरक्षा रणनीति का ही हिस्सा रहा है कि चागोस द्वीप पर मारीशस का समर्थन किया है क्योंकि यह विउपनिवेशकरण का हिस्सा है जो भारत की विदेश नीति का अहम् पक्ष है। चागोस द्वीप को लेकर ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच 50 वर्षों से विवाद चल रहा था और 5 माह पूर्व भारत के सहयोग से ही समझौता हुआ है।
इस बार भारत और मॉरीशस के मध्य कुल आठ समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने मॉरीशस के साथ संबंधों को और प्रगाढ़ करने के लिए मॉरिशस के नये संसद भवन का निर्माण भारत के सहयेग से संपन्न करवाने की घोषणा करी है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनरामचंद्र रामगुलाम के मध्य द्विपक्षीय स्तर की वार्ता हुई जिसमें दोनों नेताओं ने पारस्परिक संबंधों को बढ़ाने के लिए नये मार्ग खोजने पर भी विचार विमर्श किया।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत मारीशस संबंध केवल हिंद महासागर से नहीं अपितु हमारी साझी सांस्कृतिक परंपराओं ओैर मूल्यों से भी जुड़े हैं। हम आर्थिक और सामाजिक प्रगति की राह पर एक-दूसरे के साथी हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि अगले 5 वर्षो में भारत में 500 सिविल सर्वेंट को प्रशिक्षित किया जायेगा। साथ ही भारत और मॉरीशस के मध्य स्थानीय करेंसी पर व्यापार करने में सहमति बन चुकी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी यात्रा के दौरान मॉरिशस के प्रधानमंत्री नवीनरामचंद्र रामगुलाम जी व उनके परिवार को अमूल्य उपहार भेंट किये। वहीं उन्होंने प्रयागराज महाकुंभ का पवित्र जल भी भेंट किया। यह पवित्र जल वहां 1972 में बनाये गये गंगा तालाब में विधिवत पूजा अर्चना के बाद मिलाया गया जिसके बाद मॉरीशस के वे लोग जो महाकुंभ नहीं आ सके अब उस पवित्र गंगा तालाब में स्नान कर पुण्य प्राप्त कर सकेंगे। मॉरिशस का गंगा तालाब एक प्रसिद्ध संत द्वारा निर्मित किया गया है जहाँ भगवान गणेश ,शिव जी सहित हिंदू देवी“ देवताओं के मंदिर स्थित हैं । कुम्भ जल मिलने के बाद से इस स्थान की महत्ता और अधिक बढ़ गई है।
सांस्कृतिक, सामरिक, रणनीतिक सभी दृष्टियों से प्रधानमंत्री मोदी की मॉरीशस की यह यात्रा अब तक की सबसे सफल यात्रा कही जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

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सनातन, आस्था व विकास को समर्पित योगी सरकार का बजट https://visionviksitbharat.com/yogi-governments-budget-dedicated-to-sanatan-faith-and-development/ https://visionviksitbharat.com/yogi-governments-budget-dedicated-to-sanatan-faith-and-development/#respond Mon, 24 Feb 2025 11:02:51 +0000 https://visionviksitbharat.com/?p=1259   अयोध्या में पर्यटन अवस्थापना विकास के लिए 150 करोड़ रु. का प्रावधान किया गया है। इसी तरह मथुरा में 125 करोड़ नैमिषारण्य मे 100 करोड़ चित्रकूट में 50 करोड़…

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अयोध्या में पर्यटन अवस्थापना विकास के लिए 150 करोड़ रु. का प्रावधान किया गया है। इसी तरह मथुरा में 125 करोड़ नैमिषारण्य मे 100 करोड़ चित्रकूट में 50 करोड़ खर्च करने का प्रावधान किया गया है। मिर्जापुर में मां विन्ध्यवासिनी मंदिर,मां अष्टभुजा मंदिर मां काली खोह मंदिर के परिक्रमा पथ व जनसुविधा स्थलों का विकास किया जायेगा। संरक्षित मंदिरो के जीर्णोद्वार के लिए 30 करोड़, महाभारत सर्किट के पर्यटन विकास के लिए 10 करोड़, जैन सर्किट के विकास के लिए भी धन उपलब्ध कराया गया है।

 

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने वर्ष 2025 -26 के लिए सनातन को समर्पित करते हुए सामाजिक सरोकारों वाला व्यापक बजट प्रस्तुत किया है जिसमें समाज के प्रत्येक वर्ग तथा जीवन के हर क्षेत्र का ध्यान रखा गया है। सर्वसमावेशी होने के कारण छात्र, किसान, व्यापारी, महिलाएं, विषय विशेषज्ञ और उद्योगपति सभी इस बजट की सराहना कर रहे हैं। बजट में धर्मस्थलों के विकास व पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त धन दिया गया है। प्रदेश सरकार के बजट में हर उस क्षेत्र तक पहुंच बनाने का प्रयास किया गया है जो आर्थिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। बजट में अयोध्या, मथुरा, नैमिषारण्य और चित्रकूट जैसे धार्मिक स्थलों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
प्रदेश के वित्तमंत्री सुरेश खन्ना ने बजट भाषण का प्रारम्भ महाकुंभ के आयोजन से किया और फिर धर्मस्थलों के विकास के लिए अपना खजाना खोल दिया।

श्री काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर व मां विन्ध्यवासिनी कॉरिडोर की स्थापना के बाद सरकार मथुरा में श्री बांकेबिहारी जी महाराज मंदिर, मथुरा -वृंदावन कॉरिडोर का निर्माण करायेगी। इसके लिए भूमि उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 100 करोड़ और निर्माण के लिए 50 करोड़ रु. का प्रावधान किया गया है। नैमिषारण्य में वेद विज्ञान केंद्र की स्थपना के लिए 100 करोड़ रु. खर्च किये जायेंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए पहले ही 25 करोड़ बजट के साथ पांच एकड़ भूमि आवंटित की जा चुकी है। इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के केंद्र में वैदिक पर्यावरण, वैदिक गणित, वैदिक विधिशास्त्र, वैदिक योग विज्ञान, वैदिक वन औषधियां वनस्पति आदि पाठ्यक्रम होंगे। यहां पर बड़े वैदिक पुस्तकालय का भी निर्माण कराया जाएगा, साथ ही वेदशाला,वैदिक संग्रहालय, तारा मंडल, संगोष्ठी कक्ष बनाये जाएंगे। केंद्र में गुरुकुल व आधुनिक पद्धति के अंतर्गत कक्षाएं बनायी जायेंगी।

मुख्यमंत्री पर्यटन स्थल विकास योजना के तहत 400 करोड़ रु.खर्च किये जायेंगे। अयोध्या में पर्यटन अवस्थापना विकास के लिए 150 करोड़ रु. का प्रावधान किया गया है। इसी तरह मथुरा में 125 करोड़ नैमिषारण्य मे 100 करोड़ चित्रकूट में 50 करोड़ खर्च करने का प्रावधान किया गया है। मिर्जापुर में मां विन्ध्यवासिनी मंदिर,मां अष्टभुजा मंदिर मां काली खोह मंदिर के परिक्रमा पथ व जनसुविधा स्थलों का विकास किया जायेगा। संरक्षित मंदिरो के जीर्णोद्वार के लिए 30 करोड़, महाभारत सर्किट के पर्यटन विकास के लिए 10 करोड़, जैन सर्किट के विकास के लिए भी धन उपलब्ध कराया गया है। विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए भी धन का प्रावधान किया गया है।गुरुस्वामी हरिदास की स्मृति में अंतरराष्ट्रीय संगीत समारोह के लिए एक करोड़ और अयोध्या में जिला स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय के लिए भी एक करोड़ की धनराशि रखी गई है।योगी सरकार ने वर्तमान बजट से धार्मिक पर्यटन के माध्यम से सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की लौ प्रदीप्त की है।
बजट में महापुरुषों पर भी ध्यान दिया गया है जिसके अंतर्गत बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर के नाम पर लखनऊ में स्मारक और सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही हर जिले में 100 एकड़ में पीपीपी मॉडल पर सरदार पटेल जनपदीय आर्थिक क्षेत्र स्थापित किया जायेगा। संत कबीर के नाम पर 10 वस्त्रोद्योग पार्क तथा संत रविदास के नाम पर दो चर्मोद्योग स्थापित किये जाएंगे।

पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेयी के जन्म शताब्दी वर्ष में उनके सम्मान में नगरीय क्षेत्रों में पुस्तकालय की स्थापना की जाएगी।लखनऊ स्थित अटारी कृषि प्रक्षेत्र पर 251 करोड़ रु. की लागत से पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चरण सिंह के नाम पर सीड पार्क की स्थापना होगी।प्रत्येक कृषि मंडी में माता शबरी के नाम पर कैंटीन और विश्रामालाय स्थापित किये जायेंगे।बजट में युवाओं और छात्राओं को आकर्षित करने के लिए भी प्रावधान किये गये हैं। अब प्रदेश की हर मेधावी छात्रा को स्कूटी दी जायेगी छात्राओं के लिए 400 करोड़ रु. रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना का ऐलान किया गया है। यही नही माता अहिल्याबाई होल्कर के नाम पर श्रमजीवी महिलाओं के लिए छात्रावास भी बनेंगे।

प्रदेश के बजट में युवा उद्यमी अभियान के लिए भी 1000 करोड़ रु. का प्रावधान किया गया है।संपूर्ण उत्तर प्रदेश के व्यापक विकास का विस्तृत खाका बजट में रखा गया है।बजट के अनुसार अवध में केवल अयोध्या का ही विकास नहीं हो रहा अपितु अवध के हर जिले के विकास की अद्भुत पटकथा लिखी जायेगी।बजट के प्रावधान इस प्रकार से बनाये गये हैं कि एक प्रकार से यह आगामी 25 वर्षों के विकास का रोडमैप प्रस्तुत कर रहा है।

उत्तर प्रदेश में चार नए एक्सप्रेस वे के निर्माण से तीन तीर्थस्थलों काशी, प्रयागराज व हरिद्वार की यात्रा सरल हो जायेगी।चार नए एक्सप्रेस वे के लिए बजट में 1,050 करोड़ रु. की व्यवस्था कर दी गई है। गंगा एक्सप्रेस वे को प्रयागराज, मिर्जापुर , वाराणसी, चंदौली होते हुए सोनभद्र से जोड़ने के लिए विन्ध्य लिंक एक्सप्रेस वे का निर्माण किया जायेगा।इससे इस क्षेत्र के विकास की गति दोगुनी हो जायेगी व धार्मिक पर्यटन और बढ़ेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह युवाओं को रोजगार देने वाला बजट है।बजट में एमएसएमई, नई तकनीक, एआई व साइबर सुरक्षा का भी ध्यान रखा गया है।नए एक्सप्रेस- वे बनने से दूर की यात्रा आसान होगी।नए एक्सप्रेस वे बनने से व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।एआई सिटी बनाने की घोषणा से स्टार्टअप और आईटी उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।प्रदेश का बजट इंफ्रास्टक्चर को बढ़ावा देने के साथ बेरोजगारों को रोजगारपरक बनाने वाला बजट है। यह बजट राज्य की तकनीकी प्रगति औद्योगिक विकास और स्वास्थ्य अवसंरचना के लिए प्रतिबद्धता को दर्शा रहा है। प्रदेश के बजट में सड़क राजमार्ग के चौड़ीकरण पर भी पर्याप्त फोकस किया गया है। इसका सर्वाधिक लाभ राजधानी लखनऊ व उसके आसपास के जिलों व कस्बों आदि को मिलेगा ।मोहनलालगंज -गोसाईगंज होते हुए पूर्वांचल एक्सप्रेस- वे निकल रहा है इसका चौड़ीकरण किया जायेगा। इसी तरह बनी से ही एक रोड हरौनी होते हुए मोहन को निकली है इसे भी दो लेन का किया जायेगा।
यह बजट समग्र विकास वाला बजट है। इसमें किसानों, उद्यमियों, महिलाओं और युवाओं के लिए अनेक प्रावधान किये गये हैं। बजट में कोरोना काल में अनाथ 1430 बच्चों को आर्थिक सहायता प्रादन करने के लिए 250 करोड़ रु. का प्रावधान किया गया है। बजट में सात सरोकारों पर्यावरण संरक्षण ,नारी सशक्तीकरण, जल सरंक्षण, सुशिक्षित समाज, जनसंख्या नियोजन, स्वस्थ समाज, गरीबी उन्मूलन पर भी ध्यान दिया गया है।पर्यावरण संरक्षण के लिए बजट का 23 प्रतिशत हिस्सा पर्यावरण अनुकूलन पहली पर खर्च किया जायेगा।

सरकार वनीकरण, कार्बन अवशोषण और पयार्वरण एवं प्राकृतिक संसाधनों के सरंक्षण को और अधिक बढ़ावा देने जा रही है।इसी प्रकार सुशिक्षित समाज के अंतर्गत शिक्षा क्षेत्र पर कुल बजट का 13 प्रतिशत हिस्सा खर्च किया जायेगा।इसी प्रकार स्वस्थ समाज के लिए कुल बजट का छह प्रतिशत हिस्सा स्वास्थ्य क्षेत्र पर खर्च होगा। प्रदेश में जलसंरक्षण को बढ़ावा देने के लिए 4500 करोड़ रु. की व्यवस्था की गई है। इसके अंतर्गत वर्षा जल संचयन एवं भूजल संवर्धन के लिए 90 करोड़ रु. की व्यवस्था प्रस्तावित है।इसमें तालाबों का जीर्णोद्धार तथा निर्माणा भी शामिल है। जनसंख्या नियोजन के अंतर्गत युवाओं को नवाचार से जोड़ने के लिए इनोवेशन फंड स्थापित किया जा रहा है। गरीबी उन्मूलन के लिए भी 250 करोड़ रु. की व्यवस्था प्रस्तावित है। बजट में सभी मंडल मुख्यालयों पर विकास प्राधिकरणों ,नगर निकायों द्वारा कन्वेंशन सेंटर का निर्माण कराया जायेगा।ग्राम पंचायतों में वैवाहिक उत्सव एवं अन्य सामाजिक आयोजनों के लिए उत्सव भवन निर्माण की कार्ययोजना पर भी कार्य किया जायेगा।

यह बजट सभी वर्गो के लिए है अर्थात समग्रता पर आधारित है जिससे इसकी छाप वैश्विक होने जा रही है । प्रदेश की सुदृढ़ होती कानून -व्यवस्था से देश विदेश के निवेशक भी अब आकर्षित हो रहे हैं तथा प्रदेश में भारी निवेश भी हो रहा है। प्रदेश सरकार ने वर्तमान बजट से 2050 तक का लक्ष्य साधने का प्रयास किया है यही कारण है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद यह अब तक का सबसे बड़ा बजट है जिसका सीधा अर्थ यह हे कि विकास का लक्ष्य और पैमाना बहुत बड़ा है। यह तुष्टिकरण वाला बजट नहीं अपितु सभी के संतुष्टिकरण वाला बजट है।

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समान नागरिक संहिता लागू करने वाला प्रथम राज्य बना उत्तराखंड https://visionviksitbharat.com/uttarakhand-became-the-first-state-to-implement-the-uniform-civil-code/ https://visionviksitbharat.com/uttarakhand-became-the-first-state-to-implement-the-uniform-civil-code/#respond Sat, 15 Feb 2025 06:01:25 +0000 https://visionviksitbharat.com/?p=1173 देवभूमि उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है। वर्ष 2022 में उत्तराखंड विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा ने राज्य में सत्ता में आने…

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देवभूमि उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है। वर्ष 2022 में उत्तराखंड विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा ने राज्य में सत्ता में आने पर समान नागरिक संहिता लागू करने का संकल्प लिया था। मुख्यमंत्री बनते ही अपने मंत्रिपरिषद की पहली बैठक में पुष्कर सिंह धामी ने समान नागरिक संहिता के प्रस्ताव तथा उसके लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन करने की अनुमति दी थी। उत्तराखंड विधानसभा में यह विधेयक पारित हो जाने के बाद 27 जनवरी 2025 को यह कानून लागू हो गया है। कानून के क्रियान्वयन के लिए एक पोर्टल भी लांच किया गया है जिसमें सभी दिशा निर्देश जारी किये गये हैं । समान नागरिक संहिता कानून लागू होने के कारण राज्य में व्यापक बदलाव होने जा रहा है । यह कानून महिला सुरक्षा को व्यापक स्तर पर प्राथमिकता दे रहा है। यह कानून अनुसूचित जातियों/जनजातियों को छोड़कर संपूर्ण उत्तराखंड राज्य तथा राज्य से बाहर रहने वाले उत्तराखंड के समस्त निवासियों पर लागू होगा।

पोर्टल लांच करते समय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कानून में किसी भी धर्म की मूल मान्यताओं और प्रथाओं को समाप्त नहीं किया गया है। इस कानून द्वारा सभी लोगों के लिए शादी, तलाक और उत्तराधिकार के नियमों को समान किया गया है। सभी धर्म के लोग अपने- अपने रीति रिवाज के अनुसार शादी कर सकते हैं।

स्वाभाविक रूप से कांग्रेस के नेतृत्व वाली सेक्युलर ताकतों तो यह कानून पसंद नहीं आ रहा है,वहीं कुछ मुस्लिम कट्टरपंथी संगठन इस कानून को कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अनेक अवसरों पर समान नागरिक संहिता कानून की बात रख चुके हैं।स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से संबोधन तथा संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण का जवाब देते हुए भी प्रधानमंत्री मोदी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए प्रतिबद्धता जता चुके है और उत्तराखंड के माध्यम से यह पहल आगे बढ़ रही है। समान नागरिक संहिता लागू हो जाने के बाद सभी धर्म, जाति व पंथ के लोगों को समान अधिकार मिलने प्रारम्भ हो जायेंगे। इस कानून में महिलाओं को विशिष्ट लाभ प्राप्त होगा।

मुस्लिम तुष्टिकरण की विकृत राजनीति के चलते कांग्रेस ने सदा समान नागरिक संहिता का विरोध किया। अगर कांग्रेस में इच्छाशक्ति होती तो यह कानून पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू जी के समय में ही लागू हो गया होता किंतु वह मुस्लिम तुष्टिकरण में इतने डूब चुके थे कि उन्हें पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय डॉ. राजेंद्र प्रसाद सहित कई कांग्रेसी नेताओं के विचार अच्छे नहीं लगे। यहां तक कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर भी संविधान में ही समान नागरिक संहिता को रखने के प्रबल पक्षधर थे और इन्हीं सब मुद्दों के कारण डॉ.अम्बेडकर और नेहरू जी के मध्य विवाद था।
उत्तराखंड विधानसभा द्वारा पारित विधेयक चार खंडों में विभाजित है। पहला खंड – यूजीसी की धाराओं के उल्लंघन पर छह माह तक कारावास व 50 हजार रूपये जुर्माने की व्यवस्था की गई है। विवाह विच्छेद के मामलों में तीन वर्ष का कारावास रखा गया है। पुनर्विवाह के लिए तय नियम के उल्लंघन पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना व छह मास तक के कारावास का प्रबंध किया गया है।

महिलाओं को समान अधिकार- संपत्ति में सभी धर्मों की महिलाओं को समान अधिकार दिया गया है। सभी जीवित बच्चे पुत्र अथवा पुत्री संपत्ति में बराबर के अधिकारी बनाये गये हैं।अगर कसी व्यक्ति की वसीयत नहीं है और उसकी कोई संतान अथवा पत्नी नहीं है तो उत्तराधिकार के लिए रिश्तेदारों को प्राथमिकता दी गई है।

समान नागरिक संहिता का तीसरा खंड अत्यंत विशिष्ट है। जिसमें आजकल प्रचलन में आए लिव इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है । लिव इन में पैदा हुए बच्चे को भी वैध संतान माना गया है।अब नये कानून के अंतर्गत लिव इन रिलेशनशिप को कोई भी पक्ष समाप्त भी कर सकता है। यदि किसी भी धर्म का कोई पुरुष अपनी पत्नी को छोड़ देता है तो वह उसे भरण पोषण की मांग कर सकती है। किसी एक पक्ष के नाबालिग अथवा विवाहित होने पर लिव इन की अनुमति नही दी जाएगी।

उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता विधेयक में पति की क्रूरता और विवाहेत्तर संबंधों पर पत्नी को भी तलाक का अधिकार दिया गया है।प्रस्तावित कानूनों के अंतर्गत नपुंसकता या जानबूझकर यौन संबंध नहीं बनाने पर विवाह शून्य हो जायेगा। समान नागरिक संहिता में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस अधिनियम के अलावा किसी अन्य प्रथा/ परंपरा के अंतर्गत तलाक मान्य नहीं होगा। किसी प्रथा रूढ़ी या परंपरा के तहत तलाक देने पर तीन साल की जेल और सजा का प्रावधान भी किया गया है। पूर्व की पत्नी होने के बावजूद पुनर्विवाह करने पर तीन वर्ष की जेल एक लाख रुपये तक जुर्माना और सजा भी बढ़ाई जा सकती है।

यह कानून उत्तराखंड के सभी नागरिकों को समान अधिकार और अवसर देगा, विशेषकर उन महिलाओं के सम्मान व अधिकार की रक्षा होगी जिन परंपराओें में पुरुष वर्चस्व का चलन है। देवभूमि उत्तराखंड की मुस्लिम महिलाओं को अब तीन तलाक, बहुविवाह और हलाला जैसी बर्बर प्रथाओं से मुक्ति मिलेगी। लिव इन रिलेशनशिप को लेकर जो व्यवस्था समान नागरिक संहिता में की गई है उससे लव जिहाद में फंसकर अपने प्राणों तक की आहुति देने वाली बेटियों को भी एक बड़ा सुरक्षा कवच मिल गया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कई अवसरों पर माना और कहा कि केंद्र सरकार को एक समान नागरिक संहिता लानी ही चाहिए और जिसे उत्तराखंड की सरकार ने पूर्ण कर दिखाया है।उत्तराखंड विधानसभा से समान नागरिक संहिता विधेयक पारित हो जाने के बाद अब उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश आदि अनेक प्रांतों ने भी इसे लागू करने की तैयारी प्रारम्भ कर दी है।

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता कानून को यूनिफार्म की बजाय कॉमन सिविल कानून नाम दिया गया है। यह एक प्रगतिशील कानून है। इस कानून का एकमात्र उद्देश्य महिलाओं और बाल अधिकारों को सुरक्षित करना है। यह कानून लोगों के अधिकार छीनने का नहीं अपितु लोगो को अधिकार देने से सम्बंधित है।यह कानून सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस कानून से विभिन्न धर्मों के वैवाहिक रीति –रिवाजों पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। ज्ञातव्य है कि समान नागनिक संहिता के विरोधी इसे बढ़ा चढ़ाकर अपने हिसाब से प्रस्तुत कर रहे हैं। इस कानून के अंतर्गत मुसलमानों में निकाह, सिखों में आनंद कारज, हिंदुओं में अग्नि के समक्ष फेरे और ईसाई की विवाह अपनी -अपनी मान्यताओं के अनुसार ही होते रहेंगे।

उच्चतम न्यायालय ने कई अवसरों पर समान नागरिक संहिता लागू करने पर बल दिया है सन 1973 में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश एम. एच. बेग ने बहुविवाह जैसी कुप्रथा पर रोक लगाने और तलाक के मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप की सिफारिश की थी। केरल उच्च न्यायालय के जज वी. खालिद ने भी मार्च 1973 में मुसलमानों से अनुरोध किया था कि वह महिला अधिकारों की दिशा में सुधार पर ध्यान दें। 10 मई 1995 को उच्चतम न्यायालय ने तत्कालीन प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिंह राव से अनुच्छेद 44 पर पुनर्विचार करने को कहा था उस खंडपीठ में न्यायाधीश कुलदीप सिंह और आरएम सहाय शामिल थे।13 सितंबर 2019 को उच्चतम न्यायालय ने एक बार फिर समान नागरिक संहिता पर बल दिया। 11मई 1962 को कांग्रेस की राज्यसभा सांसद श्रीमती सीता परमानंद ने एक निजी विधेयक प्रस्तुत किया था जिसका शीर्षक था यूनिफार्म सिविल कोड फॉर कंट्री। 29 जुलाई 1986 को केंद्रीय विधि मंत्री हंसराज भारद्वाज ने वादा किया था कि समान नागरिक कानून के प्रस्ताव को लागू करने के लिए सरकार तीव्र गति से प्रयास कर रही है किंतु कांग्रेस यह वादा ही रह गया।

समान नागरिक कानून लागू हो जाने से सबसे अधिक सुरक्षा उन महिलाओं को प्राप्त होगी जो किसी न किसी कुप्रथा का शिकार हो रही थीं। इस कानून से लव जिहाद के माध्यम से होने वाले धर्मांतरण व अवैध गतिविधियों पर भी लगाम लग सकेगी। मुस्लिम समाज के लिए – समान नागरिक संहिता के अंतर्गत मुस्लिम समाज को अब चार शादी करने की छूट नहीं है और बिना तलाक दूसरी शादी भी नहीं हो सकती। सभी धर्मों में लड़कियों की विवाह करने की न्यूनतम आयु 18 और लड़कों की 21 वर्ष निर्धारित की गई है।

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भारत -अमेरिका मैत्री के नये युग का प्रारम्भ https://visionviksitbharat.com/a-new-chapter-of-india-usa-friendship-in-2025/ https://visionviksitbharat.com/a-new-chapter-of-india-usa-friendship-in-2025/#respond Sat, 15 Feb 2025 05:50:47 +0000 https://visionviksitbharat.com/?p=1170 पूरा विश्व जिन दो नेताओं की परस्पर भेंट की प्रतीक्षा कर रहा था, वह हो चुकी है, यानि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की…

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पूरा विश्व जिन दो नेताओं की परस्पर भेंट की प्रतीक्षा कर रहा था, वह हो चुकी है, यानि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भेंट। इस भेंट के साथ ही विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संबंधों तथा भारत और अमेरिका के मध्य द्विपक्षीय संबंधों को लेकर जो तरह- तरह के संदेह व्यक्त किये जा रहे थे वे भी दूर हो चुके हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय अमेरिका यात्रा और उनके परम मित्र अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी बहु प्रतीक्षित वार्ता भी संपन्न हो चुकी है। प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति की मित्रता किसी से छिपी नही है और इन दोनों के मिलने के बाद यदि कहीं सबसे अधिक घबराहट का वातावरण बना है तो वह डीप स्टेट है जो अमेरिका में बैठकर भारत विरोधी गतिविधियों का संचालन करता रहा है। दूसरे नंबर पर पाकिस्तान है जहां भारत विरोधी आतंकवादी गतिविधियां बेधड़क संचालित हो रही हैं। मोदी – ट्रम्प के मिलने से जो व्यक्तिगत रूप से घबरा रहा होगा वो बांग्लादेश का नया तानाशाह मोहम्मद यूनुस है, जिसके शासनकाल में अल्पसंख्यक हिंदुओं तथा राजननैतिक विरोधियों पर घोर अत्याचार हो रहा है। बांग्लादेश का भाग्य अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर छोड़ दिया है।

नरेन्द्र मोदी की इस अमेरिका यात्रा के दौरान भारत और अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए एकजुट हुए हैं जिसका उल्लेख साझा पत्रकार वार्ता में किया गया तथा पाकिस्तान,जैश- ए- मोहम्मद और लश्कर ए तैयबा जेसे खतरनाक आतंकवादी संगठनों का नाम भी लिया गया है । यह इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि पूर्ववर्ती बाइडेन प्रशासन ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में बहुत ही ढुलमुल रवैया अपनाया था।

प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा में एक अप्रत्याशित क्षण वह था जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ अपने गर्मजोशी भरे संबंधों को याद करते हुए अपनी भारत यात्रा पर लिखी एक पुस्तक भेंट की, उस समय भी ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक महान नेता बताया।

अमेरिकी राष्ट्रपति से मुलाकात के पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने अमेरिकी प्रशासन के कई महत्वपूर्ण लोगों के साथ बैठकें करीं जिनमें द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने तुलसी गबार्ड तथा एलन मस्क से लेकर अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइकल वाल्ट्ज तक से मुलाकात की। एलन मस्क के साथ जहाँ व्यापारिक हितों व समझौतों को लेकर वार्ता हुई, वहीं अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइकल वाल्ट्ज के साथ हुई बैठक में रक्षा ,तकनीक हस्तांतरण और सुरक्षा क्षेत्रों जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा हुई है। बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाल्ट्ज को “भारत का एक महान मित्र“ कहा है जिसके कई मायने निकाले जा रहे हैं। वाल्ट्ज के साथ हुई बैठक में दोनो देशों की वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा हुई है। इसमें रणनीतिक साझेदारी के साथ साथ आतंकवाद के खिलाफ लडाई, रक्षा औद्योगिक सहयोग और नागरिक परमाणु ऊर्जा पर बल दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिका में भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी के साथ भारत अमेरिका संबंधों इनोवेशन, बायो तकनीक और भविष्य को आकार देने में उद्यमिता की भूमिका पर गहन चर्चा हुई।

प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की वार्ता के बाद आयोजित साझी प्रेसवार्ता ने पूरे विश्व का ध्यान आकृष्ट किया जहाँ दोनों नेताओं की एक और एक ग्यारह वाली मित्रता एक बार फिर देखने को मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ने वर्ष 2030 तक व्यापार को 500 अरब डालर तक बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। वार्ता के दौरान रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया है जिसमें अमेरिका भारत को एफ- 35 लड़ाकू विमान बहुत जल्द देने पर सहमत हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने मुंबई हमले के सरगना तनव्वुर राणा को भारत भेजने के लिए अनुमति प्रदान कर दी है। साथ ही भारत, अमेरिका, आस्ट्रेलिया और जापान को मिलाकर 2017 मे बनाए गये क्वाड समूह को फिर मजबूत व सक्रिय करने पर बल दिया गया है। पत्रकार वार्ता में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहाकि भारत और अमेरिका के मध्य मित्रता बहुत मजबूत है इस समय दोनों देशों के सम्बन्ध सबसे अच्छे दौर में है। दोनों नेताओं ने कहा कि हम आतंकवाद के मुद्दे पर एक दूसरे के साथ दृढ़ता से खड़े हैं। दोनो नेताओं ने सीमा पार आतंकवाद के उन्मूलन के लिए ठोस कार्रवाई पर बल दिया। भारत और अमेरिका सबसे बेहतर व्यापार मार्ग के विकास के लिए संकल्पबद्ध दखे ओैर इसकी घोषणा भी कर दी गई है। यह व्यापार मार्ग भारत मध्य पूर्व- यूरोप आर्थिक गलियारा होगा जिसमें अमेरिका भी एक साझेदार होगा ।

स्पष्ट है कि अब भारत और अमेरिका के मध्य दोस्ती का एक नया दौर प्रारम्भ हो रहा है।आगामी समय में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भी भारत दौरे पर आने वाले हैं तब तक दोनों देशों के मध्य टैरिफ सहित विभिन्न विवादित मुद्दों का हल भी निकल आयेगा।

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स्पैडेक्स मिशन के साथ आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर भारत की अंतरिक्ष में लंबी छलांग https://visionviksitbharat.com/indias-giant-leap-towards-self-reliance-in-space-with-the-spadex-mission/ https://visionviksitbharat.com/indias-giant-leap-towards-self-reliance-in-space-with-the-spadex-mission/#respond Fri, 03 Jan 2025 09:05:39 +0000 https://visionviksitbharat.com/?p=570 स्पैडेक्स मिशन के साथ ही अब भारत डॉकिंग और अनडॉकिंग क्षमता प्रदर्शित करने वाला चौथा देश बनेगा। इस समय दुनिया के मात्र तीन देश अमेरिका , चीन और रूस के…

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स्पैडेक्स मिशन के साथ ही अब भारत डॉकिंग और अनडॉकिंग क्षमता प्रदर्शित करने वाला चौथा देश बनेगा। इस समय दुनिया के मात्र तीन देश अमेरिका , चीन और रूस के पास अंतरिक्ष यान को अंतरिक्ष में डॉक करने की क्षमता है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के नेतृत्व में अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत लगातार प्रगति के पथ पर बढ़ते हुए आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की ऐतिहासिक यात्रा 1962 में डा.विक्रम साराभाई के नेतृत्व में गठित भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति की स्थापना के साथ आरम्भ हुई । भारत के पहले साउंडिंग रॉकेट का प्रक्षेपण 1963 में केरल के थुंबा से हुआ था। इसरो के वर्तमान स्वरूप की स्थापना 15 अगस्त 1969 को हुई ओर इसरो का प्रथम उपग्रह आर्यभट्ट 1975 में यूएसएसआर से प्रक्षेपित किया गया। इसरो का प्रथम स्वदेशी उपग्रह एसएलवी -3 था जिसने 1980 में रोहिणी उपग्रह को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया। इसरो अपनी सफलता की यात्रा में अब तक 99 लांचिंग कर चुका है और कई कीर्तिमान स्थापित किये हैं। योजनानुसार आगे बढ़ते हुए इसरो वर्ष 2025 तथा आगे आने वाले वर्ष में वह करिश्मा करने जा रहा है जिससे पूरा भारत एक बार फिर गर्व का अनुभव करेगा।

संघर्षों को सफलता की गाथा

आरंभिक दिनों में धनी तथा वैज्ञानिक दृष्टि से आगे माने जाने वाले देशों द्वारा उपहास बनाए जाने, साईकिल व बैल गाड़ी पर लादकर रॉकेट के पुर्जे ले जाने, गरीबी के कारण अंतरिक्ष अनुसंधान पर खर्च को लेकर सवाल उठने के बाद भी भारतीय वैज्ञानिक कभी निराश नहीं हुए वह कठिन दौर अब बहुत पीछे छूट चुका है, आज चन्द्रमा पर शिव शक्ति बिंदु के रूप में तिरंगा फहरा रहा है । इसरो के वैज्ञानिकों की अडिग प्रतिबद्धता और दृढ़ता कभी डिगी नहीं, नवाचार, परिश्रम और राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पण से उन्होंने संघर्षों को सफलता की गाथा में बदल दिया।

भारत के वैज्ञानिकों ने सिद्ध कर दिया है कि संकल्प और दृष्टि के, साहसिक सपने साकार किए जा सकते हैं। इसरो ने वर्ष 2014 में प्रथम प्रयास में, सबसे कम लागत में मंगलयान मिशन को सफलतापूर्वक लांच किया। चंद्रयान -1 ने चन्द्रमा पर जल अणुओं की खोज की और वर्ष 2023 में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतपूर्वक लैंडिंग की जिसे पूरे विश्व ने टीवी पर लाइव देखा, आज लैंडिंग का यह बिंदु शिवशक्ति बिंदु के नाम से जाना जाता है ।

इसरो ने 2024 के आरम्भ में सूर्य का अध्ययन करने के लिए आदित्य एल- 1 का सफलतातपूर्वक प्रक्षेपण किया तथा अंत में स्पैडैक्स मिशन के साथ श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 44.5 मीटर लंबे ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएल वी – सी 60) रॉकेट ने दो छोटे अंतरिक्ष यानों चेजर और टारगेट के साथ सफलतापूर्वक छोड़ा है। अब चेजर और टारगेट को 475 किमीटर की वृत्ताकार कक्षा में स्थापित कर दिया गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार आगामी 7 जनवरी तक डॉकिंग प्रक्रिया पूर्ण हो जायेगी। स्पैडेक्स मिशन के साथ ही अब भारत डॉकिंग और अनडॉकिंग क्षमता प्रदर्शित करने वाला चौथा देश बनेगा। इस समय दुनिया के मात्र तीन देश अमेरिका , चीन और रूस के पास अंतरिक्ष यान को अंतरिक्ष में डॉक करने की क्षमता है।अंतरिक्ष यान से दूसरे अंतरिक्ष यान के जुड़ने को डॉकिंग और अंतरिक्ष यानों के अलग होने को अनडॉकिंग कहते हैं।

स्पैडेक्स मिशन

स्पैडेक्स मिशन भारत के लिए कई दृष्टियों से बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भविष्य के मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए महत्वपूर्ण तकनीक है।यह अतंरिक्ष में डॉकिंग के लिए बहुत ही किफायती प्रौद्योगिकी मिशन है। इसकी सफलता चंद्रमा पर मानव को भेजने व नमूने लाने के लिए जरूरी है।इसकी सफलता से भविष्य में भारत के वैज्ञानिक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के निर्माण और संचालन में भी आत्मनिर्भर होंगे क्योकि इसरो की 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की योजना है। वही एक से अधिक रॉकेट लांच करने के लिए भी इस तकनीक की जरूरत है।

यह अंतरिक्षयान दो वर्षों तक पृथ्वी की परिक्रमा करेंगे।दोनों अंतरिक्ष यानों का वजन 220 किग्रा है।इस मिशन की सफलता से अंतरिक्ष कचरे की समस्या से निपटने में भी सफलता मिलेगी। पीओईएम इसरो का प्रायोगिक मिशन है इसके तहत कक्षीय प्लेटफार्म के रूप में पीएस 4 चरण का उपयोग करके कक्षा में वैज्ञानिक प्रयोग किया जाता है।पीएसलवी -चार चरणों वाला रॉकेट है इसके पहले तीन चरण प्रयोग होने के बाद समुद्र में गिर जाते हैं और अंतिम चरण उपग्रह को कक्षा में प्रक्षेपित करने के बाद अतंरिक्ष में कबाड़ बन जाता है। पीओईएम के तहत रॉकेट के इसी चौथे चरण का इस्तेमाल वैज्ञानिक प्रयोग करने में किया जायेगा।

वर्ष 2025 में और कमाल करेगा इसरो 

अंतरिक्ष क्षेत्र के विशेषज्ञों का मत है कि अभी तक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो ने जो कुछ किया है वह तो ट्रेलर मात्र है आगामी कुछ वर्षों में इसरो के वैज्ञानिक और भी कमाल करने की तैयारी कर रहे हैं और जिसके बाद भारत का अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो जायेगा। इस वर्ष इसरो की 36 सेउपग्रहों का प्रक्षेपण करने की योजना तो है ही साथ ही रूस और अमेरिका के साथ मिलकर अंतरिक्ष यात्री भेजने की तैयारी भी है। लो अर्थ ऑर्बिट में कुल 36 सेटेलाइट लांच होने जा रहे हैं। जो देश के कई सेक्टरों को लाभान्वित करेंगे।इससे कृषि, संचार और परिवहन जैसे क्षेत्रों का सुविधा मिलेगी और आम जनजीवन में सुधार होगा।

नये वर्ष में अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की तैयारियों में प्रमुख है कि इसरो ने निजी कंपनियों को प्रक्षेपण यान के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरित करने का निर्णय लिया है। इससे भारत में प्रक्षेपण यान का एक बड़ा बाजार तैयार होने जा रहा है। इसमें एएसएलवी एक नई शक्ति के रूप में स्थापित होगा। चंद्रयान-3 और आदित्य एल -1 के बाद स्पैडेक्स मिशन की सफलता पर केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत अब स्वदेशी डॉकिंग सिस्टम विकसित करने वाला विश्व का चौथा देश बन गया है।

इसरो का यह मिशन अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक नये युग का आरम्भ है। स्पैडेक्स मिशन छोटे अंतरिक्ष यानों के साथ पहला ऐसा मिशन है। हम इसे बड़े अंतरिक्ष यानों के साथ आगे बढ़ायेंगे। मंत्री का कहना है कि नये साल में इसरो नासा सिथेंटिक एपर्चर रडार उपग्रह लांच करने के लिए तैयार है। भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान के तहत व्योममित्र रोबोट को भी इस वर्ष लांच करने की तैयारी की है। मार्च से पहले गगनयान मिशन के लिए क्रू एस्केप सिस्टम के परीक्षण की भी योजना है।

2025 के मध्य या 2026 के प्रारम्भ में ही हमारी मानव अंतरिक्ष उड़ान -गगनयान को लांच किया जायेगा। गगनयान मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्रियों को 400 किमी कक्षा में भेजा जायेगा और उन्हें भारतीय समुद्री क्षेत्र में उतारा जायेगा। जनवरी 2025 में ही जीएसएलवी मिशन के साथ 100वीं लांचिंग भी होने जा रही है। कुल मिला कर आने वाला समय भारत के सूर्य के अन्तरिक्ष में उदय होने का है।

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