Mrityunjaya Dixit, Author at VisionViksitBharat https://visionviksitbharat.com/author/mrityunjaya-dixit/ Policy & Research Center Sun, 12 Apr 2026 05:53:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.1 https://visionviksitbharat.com/wp-content/uploads/2025/02/cropped-VVB-200x200-1-32x32.jpg Mrityunjaya Dixit, Author at VisionViksitBharat https://visionviksitbharat.com/author/mrityunjaya-dixit/ 32 32 परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की ऐतिहासिक सफलता https://visionviksitbharat.com/indias-historic-achievements-in-the-field-of-nuclear-energy/ https://visionviksitbharat.com/indias-historic-achievements-in-the-field-of-nuclear-energy/#respond Thu, 09 Apr 2026 08:17:25 +0000 https://visionviksitbharat.com/?p=2061 पश्चिमी एशिया युद्ध और तनाव के मध्य भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र मे आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त की है। भारत ने तमिलनाडु के…

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पश्चिमी एशिया युद्ध और तनाव के मध्य भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र मे आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त की है। भारत ने तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित परमाणु ऊर्जा संयंत्र में क्रिटिकैलिटी प्राप्त कर ली है। अब रूस के बाद भारत दूसरा ऐसा देश बन गया है जहां ऑटो मोड में परमाणु चेन रिएक्शन प्रारंभ हो गया है। यह सपना महान वैज्ञानिक स्वर्गीय होमी जहांगीर भाभा का थो जो अब पूर्ण हुआ है।वैज्ञानिकों की यह सफलता भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में सहायता देगी। यह 2070 के नेट जीरो लक्ष्य की ओर बड़ा कदम है।
अगर यह कार्य सफलता पूर्वक आगे बढ़ता रहा तो भारत जल्द ही पारंपरिक जीवाश्म ईंधन से ऊर्जा बनाने की जगह स्वच्छ अक्षय ऊर्जा बनाने के लिए तैयार हो जाएगा। भारत के 500 मेगावाट क्षमता वाले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर के प्रथम क्रिटिकैलिटी स्तर पर पहुंचने के बाद सरकार ने कहा कि फास्ट ब्रीडर रिएक्टर उच्च तापीय दक्षता के साथ विश्वसनीय, कम कार्बन उर्त्सजन वाली बेस लोड बिजली आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। नियंत्रित परमाणु विखंडन श्रृंखला प्रतिक्रिया की शुरूआत का यह मील का पत्थर देश को दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और स्वदेशी परमाणु प्रौद्योगिकी क्षमताओं को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड द्वारा निर्धारित सभी सुरक्षा मानदंडों को पूरा करने के बाद पीएफबीआर ने क्रिटिकैलिटी प्राप्त कर ली।
तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर भारत का पहला स्वदेशी फास्ट ब्रीडर परमाणु रिएक्टर है। 500 मेगावाट क्षमता वाले इस उन्नत रिएक्टर को इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र ने डिजाइन और भारतीय नाभिकीय विद्युत् निगम लिमिटेड ने निर्मित किया है। इसे बनाने में 200 से अधिक भारतीय उद्योगों ओर लघु एवं मध्यम उद्योगों की भूमिका रही है। इस रिएक्टर को भविष्य में थोरियम- 232 का उपयोग करने के लिए भी डिजाइन किया गया है। जो स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के लिए भारत के विशाल थोरियम भंडार का दोहन करने के दीर्घकालिक लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है।
क्या होती है क्रिटिकैलिटी – यह परमाणु रिएक्टर के संचालन की वह स्थिति है जिसमें परमाणु विखंडन की श्रृंखला प्रक्रिया स्थिर हो जाती है। इसका अर्थ यह है कि यह रिएक्टर अब बिना किसी बाहरी दखल के मौजूदा ईंधन के द्वारा ऊर्जा बनाने के लिए तैयार हो गया है। क्रिटिकैलिटी प्राप्त करना सीधे बिजली बनाना नही है अपितु यह उसके लिए पहली अनिवार्यता है। अब इस रिएक्टर की क्षमता और कुशलता को समझने के लिए कम क्षमता वाले कुछ परीक्षण किये जाएंगे जिसके बाद इसे पावर ग्रिड से जोड़कर बिजली उत्पादन शुरू किया जा सकता है।
यह उपलब्धि मात्र एक रिएक्टर चलाने की नहीं है, इससे भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ेगी। इससे 2070 तक नेट जीरो लक्ष्य प्राप्त करने में सफलता मिलेगी। फास्ट ब्रीडर रिएक्टर कम कचरा पैदा करता है यह यूरेनियम और प्लूटोनियम का बेहतर उपयोग करता है । इससे भविष्य में बिजली सस्ती होगी। देश ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में मजबूत बनेगा। भविष्य में और अधिक ऐसे रिएक्टर बनाए जा सकेंगे जो थोरियम का इस्तेमाल कर बिजली बनाएंगे ।
यह रिएक्टर 2004 में शुरू हुआ था लेकिन कई तकनीकी चुनौतियों, देरी और लागत बढ़ने के कारण अब जाकर क्रिटिकैलिटी प्राप्त कर सका है। तरल सोडियम को संभालना, सुरक्षा मानक पूरा करना और बहुत सारे परीक्षण करना असान नहीं था। इसका बजट बढ़ा किंतु सरकार का पूरा समर्थन मिलता रहा। अब यह सफलता दिखाती है कि भारत कठिन टेक्नोलॉजी में भी आत्मनिर्भर हो सकता है। पूर्व परमाणु ऊर्जा आयोग अध्यक्ष डा. अनिल काकोदकर ने इस सफलता को ऐतिहासिक बताया है और कहा कि यह भारत के तीन चरण के कार्यक्रम को नई दिशा व गति देगा। यह उन्नत रिएक्टर खपत से अधिक ईधन उत्पादन करने में सक्षम है जो देश की वैज्ञानिक क्षमता को और इंजीनियरिंग कौशल की मजबूती को दर्शाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे कार्यक्रम के तीसरे चरण में भारत के विशाल थोरियम भंडार के उपयोग की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस परियोजना में शामिल वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी और इस सफलता को भारत वैज्ञानिक कौशल का प्रमाण बताया।
सरकार ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। जापान फ्रांस और अमेरिका आदि देश सुरक्षा चिंताओं के कारण ऐसी परियोजनाएं बंद कर चुके हैं परंतु भारत की स्थिति और जरूरत दोनों ही अलग है।

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विकसित उत्तर प्रदेश की नई पहचान बनेगा जेवर एयरपोर्ट https://visionviksitbharat.com/jevar-airport-will-become-the-new-identity-of-a-developed-uttar-pradesh/ https://visionviksitbharat.com/jevar-airport-will-become-the-new-identity-of-a-developed-uttar-pradesh/#respond Mon, 30 Mar 2026 16:13:49 +0000 https://visionviksitbharat.com/?p=2054 उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने जा रहे विधानसभा चुनावों से पूर्व विकास योजनाओं के लोकार्पण की लहर चल रही है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विगत…

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उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने जा रहे विधानसभा चुनावों से पूर्व विकास योजनाओं के लोकार्पण की लहर चल रही है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विगत 28 मार्च को जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को देश को समर्पित किया। यह एयरपोर्ट आधुनिकतम सुविधाओं का अद्भुत संगम होगा। प्रधानमंत्री ने इस एअरपोर्ट का लोकार्पण जनता द्वारा उनके मोबाइल की फ़्लैश लाइट ऑन करा कर करवाया गया। एअरपोर्ट से पहली उड़ान यूपी सरकार के विमान ने भरी जिसमें प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यात्री बने। इस एयरपोर्ट से चार सप्ताह बाद यात्रियों के लिए नियमित उड़ानें प्रारंभ हो जाएंगी। नोएडा में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की स्थापना का प्रस्ताव 2001 में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री व वर्तमान रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने रखा था किंतु निहित राजनैतिक कारणों से यह अधर में लटका रहा। इस प्रकार इस परियोजना के प्रथम चरण के ही पूर्ण हेने में 25 वर्ष लग गए जिस कारण उत्तर प्रदेश के साथ साथ दिल्ली एनसीआर क्षेत्र का विकास भी अटका रहा।
जेवर एयरपोर्ट के लोकार्पण के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नोएडा एयरपोर्ट के साथ ही विकसित यूपी और विकसित भारत अभियान का एक नया अध्याय शुरू हो गया है। यूपी अब देश के सबसे अधिक अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट वाले राज्यों में से एक हो गया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि जेवर एयरपोर्ट के लोकार्पण के पूर्व ही केंद्र सरकार ने उड़ान 2.0 योजना को मंजूरी प्रदान की है जिसके अंतर्गत 100 नए एयरपोर्ट व 200 नये हैलीपैड बनेंगे जिसके लिए 29,000 करोड़ रुपए स्वीकृत किये गये हैं। इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार सपना है कि हवाई चप्पल वाले भी हवाई यात्रा का सुगम आनंद ले सकें और उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उड़ान 1.0 योजना में 1.6 करोड़ लोगों ने हवाई यात्रा की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लिए सबका प्रयास जरूरी है इस परियोजना के लिए किसानों ने भी अपनी जमीन दी है।आधुनिक कनेक्टिविटी का जो विस्तार हो रहा है उसे पश्चिम यूपी में फूड प्रोसेसिंग को बल मिलेगा और यहां के कृषि उत्पाद दुनिया के बाजारों में और बेहतर तरीके से पहुँच सकेंगे।

जेवर एयरपोर्ट की अहम विशेषताएं – जेवर एयरपोर्ट एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा तथा प्रथम चरण में ही यह 1.2 करोड़ यात्रियों को एक रन वे से सेवा प्रदान करने की क्षमता रखता है। यह देश का पहला ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट होगा जो सौर ऊर्जा का उपयोग करेगा और कार्बन उत्सर्जन को कम करेगा। इस एयरपोर्ट में आगामी चरणों में 5 रन वे का निर्माण होने के बाद यात्री क्षमता बढ़कर 22.5 करोड़ यात्री प्रतिवर्ष हो जाएगी। यह एयरपोर्ट पूरी तरह से डिजी यात्रा ऐप के माध्यम से चलेगा।
एयरपोर्ट में आइएलएस कैट -3 सिस्टम है जिससे घने कोहरे में भी विमान आसानी से उतर सकेंगे। इस एयरपोर्ट में अत्याधिुनक तकनीक का उपयोग किया गया है जिसमें यात्रियों के लिए डिजीलाकर आधारित बायोमैट्रिक चेक इन फेस स्कैन से प्रवेश और एआई आधारित सुरक्षा होगी। यहां का रनवे 3900 मीटर लंबा रन वे होगा जो बड़े विमानों का संचालन कर सकेगा। यह यमुना एक्सप्रेस वे से सीधा जुड़ा है और इसे मेट्रो रेल और प्रस्तावित रैपिड रेल से जोड़ने की योजना है। यहाँ यात्रियों के लिए प्रवेश से लेकर बोर्डिंग गेट तक पहुंचने की प्रक्रिया बहुत तेज होगी जो लगभग 20 मिनट में पूरी हो सकती है। यहां पर 30 एकड़ में कार्गो टर्मिनल का भी निर्माण किया गया है जिस पर 800 करोड़ की लागत आई है तथा 48 चेक इन प्वाइंट बनाए गए हैं। यहां की मल्टीमाइल कार्गो सुविधा की क्षमता आरम्भ में 2.5लाख मीटिक टन माल की ढुलाई की है जिसे बढ़ाकर 18 लाख मीट्रिक टन किया जा सकता है। यहां पर 57 एकड़ में 700 करोड़ की लागत से वेयर हाउस एवं लॉजिस्टिक सुविधा विकसित की गई है। इस एयरपोर्ट के प्रथम चरण के निर्माण में 11200 करोड़ की लागत आई है।

इस एयरपोर्ट के निर्माण व संचालन के बाद दिल्ली- एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश (ग्वालियर – मुरैना), राजस्थान ( धौलपर -भरतपुर) के हिस्सों को मिलाकर करीब सात करोड़ आबादी को सीधा लाभ मिलने जा रहा है। इस एयरपोर्ट के कारण जेवर एयरोट्रोपोलिस सिटी के रूप में चमकेगा। गौतमबुद्ध नगर और आसापास के जिलों के बीच क्षेत्रीय जुड़ाव और विकास होगा। इनके उत्पाद और सेवाओ के समक्ष आने वाली चुनौतियां भी कम होंगी। यह एयरपोर्ट पूर्ण हो जाने के बाद शहर में तमाम होटल व कार्यालय, शापिंग मॉल, लॉजिस्टिक हब आदि का निर्माण भी तीव्र गति से होने जा रहा है। शहर भर में अगली पीढ़ी वाली सुविधाएं विकसित होंगी।
यह एयरपोर्ट केवल रनवे नहीं प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देने का आधार बनेगा। यह एयरपोर्ट प्रदेश के उज्जवल भविष्य का आधार बनेगा क्योंकि यह उत्तर भारत के विदेश व्यापार व औद्योगिक विकास को नई ऊंचाई तक पहुंचाते हुए व्यापाक रोजगार का भी सृजन करेगा। यह एयरपोर्ट पश्चिमी यूपी के किसानों, छोटे और लघु उद्योगों युवाओं के लिए भी नए अवसर लेकर आने वाला है।

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संघ और रॉ पर प्रतिबंध की मांग: भारत विरोधी डीप स्टेट की नई साजिश https://visionviksitbharat.com/demand-to-ban-the-sangh-and-raw-a-new-conspiracy-of-an-anti-india-deep-state/ https://visionviksitbharat.com/demand-to-ban-the-sangh-and-raw-a-new-conspiracy-of-an-anti-india-deep-state/#respond Fri, 20 Mar 2026 09:00:36 +0000 https://visionviksitbharat.com/?p=2040 युद्ध के वैश्विक वातावरण के मध्य अमेरिका में भारत विरोधी डीप स्टेट की गतिविधियां भी चल रही हैं। विभिन्न अवरोधों व वैश्विक उथल- पुथल के बाद भी भारत तीव्रता के…

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युद्ध के वैश्विक वातावरण के मध्य अमेरिका में भारत विरोधी डीप स्टेट की गतिविधियां भी चल रही हैं। विभिन्न अवरोधों व वैश्विक उथल- पुथल के बाद भी भारत तीव्रता के आगे बढ़ रहा है। विश्व भर के निवेशकों की दृष्टि भारत पर है और यह बात भारत विरोधी शक्तियों को पसंद नहीं आ रही है। अमेरिका के अंतररष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने अपनी एक रिपोर्ट में अमेरिकी प्रशासन से, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारत की खुफिया एजेंसी रॉ पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। अमेरिकी आयोग की यह रिपोर्ट भारत के खिलाफ गहरी सुनियोजित साजिश के अंतर्गत तैयार की गई रिपोर्ट है जो भारत की सम्प्रुभता पर तीखा परोक्ष हमला है । भारत के मुख्य विरोधी दल कांग्रेस ने अपनी परंपरा के अनुरूप विदेशी आयोग की इस भारत विरोधी मांग का समर्थन किया है।
अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने अपनी एक रिपोर्ट में संघ और रॉ के कामकाज पर सवाल खड़े करते हुए ट्रम्प प्रशासन से इन दोनों पर प्रतिबंध लगाने को कहा है। आयोग का कहना है कि संघ लोगों की धार्मिक आजादी के लिए खतरनाक है। ये धर्म के आधर पर भेदभाव बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है। कांग्रेस पार्टी का कहना है कि आयोग की रिपोर्ट में संघ पर तुरंत प्रतिबंध लगाने, संपत्ति को जब्त करने और संघ के लोगों के अमेरिका मे प्रवेश को प्रतिबंधित करने की मांग की गई है। कांग्रेस ने अमेरिकी आयोग की रिपोर्ट से आगे जाकर कहा कि महात्मा गांधी की हत्या के बाद सरदार पटेल ने संघ को भारत में प्रतिबंधित किया। संघ मनुस्मृति से देश को चलाने की वकालत करता है, संघ संविधान विरोधी है, देश की एकता और भाईचारे के लिए जहर है।
अमेरिका का धार्मिक स्वतंत्रता आयोग वर्ष 1998 में अमेरिकी कांग्रेस द्वारा बनाया गया एक स्वतंत्र आयोग है। यह विश्व भर में धार्मिक स्वतंत्रता की निगरानी करता है और अमेरिकी सरकार को केवल सुझाव देता है। अमेरिकी आयोग की रिपोर्ट और कांग्रेस द्वारा उसका समर्थन करने पर किसी भी राष्ट्रभक्त नागरिक को हैरानी नहीं हुई है क्योकि कांग्रेस पार्टी लम्बे समय से भारत विरोधी टूलकिट क्रियान्वित कर रही है। कांग्रेस का वर्तमान नेतृत्व गुलामी की मानसिकता से ग्रस्त है। कांग्रेस का दिल पाकिस्तान के लिए ही धड़कता है। कांग्रेस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तुलना मुस्लिम ब्रदरहुड जैसे कुख्यात आतंकी संगठन से कर चुकी है। कांग्रेस को पता होना चाहिए कि जैसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हर विपरीत परिस्थिति में राष्ट्र व समाज की सेवा करता है वैसे ही भारत की खुफिया एजेंसी रॉ भारत की सेवा करते हुए भारत को अनेकानेक आंतरिक और वाह्य खतरों से बचाती है।
आश्चर्य की बात है कि जब बांग्लादेश में हिंदुओं का निर्मम नरसंहार हो रहा था, हिंदू महिलाओं पर बर्बर अत्याचार, बलात्कार व हत्याएं हो रही थीं, 700 से अधिक मंदिरों का विध्वंस कर दिया गया तब इस तथाकथित धार्मिक आयोग की घिग्घी बंध गई थी । तब भारत व संपूर्ण विश्व में हिन्दुओं की सुरक्षा के लिए किसी ने आवाज उठाई थी तो वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या उससे जुड़े समवैचारिक संगठन ही थे। आज पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान के हिंदू “गायब“ हो चुके है अर्थात अल्पसंख्यक से भी बहुत कम हो गए हैं, यह आयोग इन देशों में हिन्दुओं के धार्मिक अधिकारों के लिए क्यों नहीं बोलता?
भारत ने अमेरिकी धार्मिक अयोग की रिपोर्ट सिरे से खारिज करते हुए कहा कि, अमेरिकी आयोग के लिए यह बेहतर होगा कि वह अमेरिका में हिंदू मंदिरो पर तोड़फोड़ और हमलों की परेशान करने वाली घटनाओं, भारत को निशाना बनाने, वहां रहने वाले भारतीय समुदाय के प्रति बढ़ती असिहष्णुता और उन्हें डराने- धमकाने के मामलो पर विचार करें। अमेरिकी आयोग पूर्वाग्रह से ग्रसित है और यह उसका एक सुनियोजित एजेंडा है। अमेरिका तथा वहां के तथाकथित आयोग को यह बात अच्छी तरह से पता होनी चाहिए कि भारत की 140 करोड़ से अधिक की आबादी में हर धर्म के अनुयायी रहते हैं। भारत सह अस्तित्व मे भरोसा करता है।
भारत के कांग्रेस व वामपंथी दलों की राजनीतिक दुकान विदेशी आयोगों की झूठ पर आधारित रिपोर्टों के सहारे ही चलती है। राहुल गांधी ऐसे नेता प्रतिपक्ष हैं जो विदेशों में जाकर भारत के संविधान, संसद व न्यायपालिका तक की आलोचना करते हैं । भारत जब पाकिस्तान पर स्ट्राइक करता है तो वे सेना व सरकार से सबूत मांगने निकल पड़ते हैं। आज वो एक विदेशी आयोग की झूठी रिपोर्ट के समर्थन में खड़े हैं। ऑपरेशन सिंदूर के समय भी कांग्रेस ने संसद में सरकार का साथ नहीं दिया। राहुल कांग्रेस ने अमेरिकी आयोग की रिपोर्ट का समर्थन करके अपनी मंशा को स्पष्ट कर दिया है कि वह भारत को कमजोर करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एकमात्र संगठन है जो विश्व भर में हिन्दुओं के साथ होने वाली अप्रिय घटनाओं पर आवाज उठाता है। संघ ही है जो हिंदू समाज की सेवा कर रहा है। आज मजहबी ताकतें धन -बल और पशु -बल द्वारा भारी संख्या में हिन्दुओं का मतांतरण करा रही हैं अगर उसकी कोई रोकथाम कर रहा है तो वह संघ ही है। यही कारण है कि संघ पर प्रतिबंध की मांग फिर से उठाई गई है। संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर संघ ने करोड़ों घरों में संपर्क किया और एक नई हिन्दू चेतना का संचार हुआ। भारी संख्या में जेन -जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व समवैचारिक संगठनों के साथ जुड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के साथ लोग जुड़ नहीं रहे अपितु दूर भाग रहे हैं। संभवतः संघ से ईर्ष्या के वशीभूत होकर भी कांग्रेस ने अमेरिकी आयोग की भारत विरोधी रिपोर्ट का समर्थन किया हो।
अमेरिकी आयोग को संघ व भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के विषय में अनर्गल टिप्पणियां करने से पूर्व अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग में भारत विरोधी व पाक परस्त लोगों का प्रभुत्व है राहुल गांधी इनकी प्रोपेगंडा मशीनरी का हिस्सा बन गए हैं।
भारत के विपक्षी दलों को समझना चाहिए कि वे सरकार के प्रतिपक्षी हैं न कि भारत देश के।

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युद्धकाल का संकट, राजनीति और नागरिक कर्तव्य https://visionviksitbharat.com/wartime-crisis-politics-and-civic-duty/ https://visionviksitbharat.com/wartime-crisis-politics-and-civic-duty/#respond Tue, 17 Mar 2026 08:29:49 +0000 https://visionviksitbharat.com/?p=2038 अमेरिका -इजराइयल और ईरान युद्ध को प्रारंभ हुए 15 दिन का समय व्यतीत हो चुका है और अभी भी युद्ध का दायरा बढ़ ही रहा है। खाड़ी देशों में चल…

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अमेरिका -इजराइयल और ईरान युद्ध को प्रारंभ हुए 15 दिन का समय व्यतीत हो चुका है और अभी भी युद्ध का दायरा बढ़ ही रहा है। खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध और आक्रामकता के कारण संपूर्ण विश्व में तेल और गैस की आपूर्ति बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। अन्य आवश्यक उत्पादों के जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है। विश्व के तमाम देशों की सरकारें एवं विपक्षी दल कदम से कडम मिलाकर तेल, गैस व ऊर्जा संकट, आर्थिक अनिश्चितता तथा कार्यालयों के पलायन के कारण उत्पन्न हो रहे संकट का सामना कर रहे हैं। सभी देशों में सत्तापक्ष व विपक्ष मिलजुल कर कर रहे हैं वहीं भारत में विपक्ष इस संकट का उपयोग अपने ही देश को नीचा दिखाने के लिए कर रहा है।
भारत में इस युद्ध तथा उससे उपजे वैश्विक संकट पर अलग ही राजनीति हो रही है। जब से युद्ध आरम्भ हुआ है भारत में लखनऊ से लेकर श्रीनगर और जम्मू कश्मीर के बडगाम जिले तक अमेरिका -इजराइल के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करने के लिए आक्रामक विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। विरोध प्रदर्शन कर रहे इन लोगों ने पहले कभी भारत में होने वाले आतंकवादी हमलों निंदा तक नहीं की है। विपक्ष में बैठे राजनीतिक दल तथा उनके नेता इन प्रदर्शनों को हवा दे रहे हैं। कांग्रेस पार्टी की श्रीमती सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे आदि सरकार की विदेश नीति के खिलाफ अनवरत लेख लिख रहे हैं और किसी न किसी बहाने प्रधानमंत्री मोदी की छवि को नुकसान पहुंचाने के प्रयास कर रहे हैं।
युद्धकाल के कारण पूरी दुनिया में आपूर्ति व्यवस्था बाधित हो जाने के कारण तेल, गैस व अन्य उत्पादों की कीमतों में वृद्धि हो रही है। चीन, जापान, कोरिया जैसे समृद्ध देश और पाकिस्तान ,बांग्लादेश व श्रीलंका जैसे हमारे पड़ोसी देश पेट्रोल व डीजल की कीमतों में 10 प्रतिशत से लेकर 60 प्रतिशत तक की वृद्धि कर चुके हैं। कई देशों में महंगाई चरम सीमा पर पहुंच रही है पड़ोसी पाकिस्तान में तो लाकडाउन जैसे हालात पैदा हो गए हैं जबकि भारत मे पेट्रोल व डीजल के दाम काफी स्थिर हैं। भारत में केवल घरेलू रसोई गैस के दामों में ही 60 रुपए की वृद्धि की गई है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी युद्ध से पैदा हुए संकट पर स्वयं नजर रख रहे हैं। भारत के विदेश मंत्री तथा प्रधानमंत्री मोदी दुनियाभर के नेताओं के साथ संपर्क में हैं तथा आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने के लिए नए मार्ग ढूंढ रहे हैं। अभी तक भारत केवल 27 देशों से ही तेल व गैस की खरीदता था किंतु अब 40 देशों के साथ क्रय सम्बन्ध बनाए जा रहे हैं।
विडंबना है कि विपक्ष इस संकट का उपयोग राजनीति के लिए कर रहा है। विपक्षी दल के नेता, आईटी सेल तथा कार्यकर्ता अपने आकाओं की शह पाकर अफवाह बाज बनकर सड़क पर आ गए हैं। बड़े नेता ऊपर संसद ठप कर रहे हैं और छोटे -बड़े जमाखोरों के साथ मिलकर आम जनमानस का पैनिक बटन दबाकर गैस सिलेंडर के लिए लंबी -लंबी कतारें लगवा रहे हैं। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दल प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं जबकि प्रधानमंत्री मोदी व उनकी सरकार की पहल का ही परिणाम है कि ईरान -अमेरिका- ईजरायल जंग के बीच होर्मुज स्ट्रेट से दो भारतीय जहाज शिवालिक और नंदादेवी 927000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर भारत आ रहे हैं। भारत सरकार व अधिकारियों के प्रयास से ही फारस की खाड़ी में सभी भारतीय सुरक्षित हैं ।भारत के 253 नाविक अब तक सुरक्षित वापस आ चुके हैं। भारत सरकार ऊर्जा आपूर्ति और नागरिक सुरक्षा पर पर्याप्त ध्यान दे रही है।प्रधानमंत्री मोदी कैबिनेट की बैठक में अपने मंत्रियों से स्पष्ट कर चुके हैं कि युद्ध का असर आम जनता पर नहीं पड़ना चाहिए।
युद्धकाल में जो लोग भारत की विदेश नीति को फेल बताने वालों को स्मरण रखना चाहिए कि कि जब संघर्ष के कारण उड़ानें प्रभावित होने पर कई ईरानी नागरिक भारत में फंस गए थे भारत ने ही उन्हें ईरान की सहायता से उनके देश पहुँचाया । वहीं युद्ध के बीच 1.72लाख भरतीय सकुशल भारत वापस आए हैं।
भारत सरकार युद्धकाल में जनता को कोई समस्या न हो इसके लिए लगातार कार्य कर रही है किंतु क्या हम सभी नागरिक अपने कर्तव्य का पालन कर रहे हैं? परिस्थितियां इसका उत्तर नहीं में दे रही हैं। यदि नागरिक भी कर्त्तव्य बोध से बंधे होते तो आज देश में गैस सिलेंडर को लेकर जो पैनिक मचा हुआ है वह न होता। ऊर्जा संकट की आहट मात्र से अफवाह बाज सक्रिय हो गए और ऐसी अफवाहें उड़ाई गई कि जमाखोरी और कालाबाजारी शुरू हो गई है। जिन घरों मे एक या दो भरे हुए एलपीजी सिलिंडर मौजूद हैं वो भी हल्ला मचा रहे हैं । प्रतिदिन होने वाली सिलिंडर बुकिंग 55 लाख से बढ़कर 75 लाख हो गई। देशभर मे अजीब नजारे देखने को मिल रहे हैं। जो परिवार 853 रुपए का गैस सिलेंडर खरीदने में भार का अनुभव करते थे अब वही लोग चोर बाजार से 3500 तक का सिलेंडर खरीदने की हैसियत दिखा रहे हैं।
समाज मे नैतिकता व सदाचार की कमी के कारण ही जमाखोरी व कालाबाजारी एक सामाजिक बुराई का रूप ले चुकी है । युद्धकाल में देशवासियों का एक बहुत बड़ा वर्ग कर्तव्य से विमुख होकर अपने लिए मुनाफे का अवसर खोज रहा है। अभी भारत का युद्ध से कोई सबंध नहीं है और यह युद्ध भारत से बहुत दूर हो रहा है तब भी जिस प्रकार का पैनिक भारत में हुआ है वह कुछ भारतीयों की ही विकृत मानसिकता को प्रदर्शित कर रहा है। संकट है किंतु अगर कुछ भी कर्त्तव्य बोध होता तो हालात बिल्कुल सामान्य ही रहते। अंततः अब सरकार ने जमाखोरों और कालाबाजारियों पर कार्यवाई आरम्भ कर दी है और उसके नतीजे भी सामने आने लगे हैं।
ईरान -अमेरिका इजरायल युद्ध अभी काफी लंबा चलने की आशंका है तथा हालात अभी और भी खराब ही हो सकते हैं किन्तु भारत ही एकमात्र ऐसा राष्ट्र है जिसके लिए होमुर्ज स्ट्रेट का रास्ता खोला गया है। सरकार अपना काम कर रही है किंतु अब समय आ गया है कि भारतीय नागरिक भी अपने कर्तव्य का पालन करें और पैनिक न हों।

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नेपाल में ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन और भारत https://visionviksitbharat.com/historic-change-of-power-in-nepal-and-india/ https://visionviksitbharat.com/historic-change-of-power-in-nepal-and-india/#respond Sat, 14 Mar 2026 17:46:49 +0000 https://visionviksitbharat.com/?p=2035 भारत के अहम पड़ोसी राष्ट्र नेपाल में युवाओं के व्यापक आंदोलन के बाद संपन्न हुए चुनावों के परिणाम आ चुके हैं। काठमांडू के पूर्व मेयर रैपर बालेन शाह का नेपाल…

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भारत के अहम पड़ोसी राष्ट्र नेपाल में युवाओं के व्यापक आंदोलन के बाद संपन्न हुए चुनावों के परिणाम आ चुके हैं। काठमांडू के पूर्व मेयर रैपर बालेन शाह का नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बनना निश्चित हो चुका है। नेपाल के इतिहास में पहली बार किसी राजनैतिक दल को पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ है अतः अब देश में विकास की धारा बहने की आशा भी बलवती है।
नेपाल विगत दो दशकों से राजनैतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा था जिसके कारण वहां भ्रष्टाचार चरम पर पहुँच गया था और जनता त्रस्त थी। नेपाल के चुनाव परिणाम बताते हैं कि देश कोई भी हो जनता राजनैतिक अस्थिरता, परिवारवाद व नेताओं व दलों के मध्य बारंबार होने वाले अनैतिक गठबंधनों को पसंद नहीं करती है, उसको जैसे ही अवसर मिलता है वह परंपरागत दलों को हटाकर नया विकल्प चुन लेती है फिर चाहे यह विकल्प अनुभवहीन ही क्यों न हो। नेपाल को पहली बार ओली और प्रचंड की नूरा कुश्ती से स्वतंत्रता मिली है। नेपाल के वामपंथी दलों ने गठबंधन बनाकर स्वयं को जीवित रखने का प्रयास किया था किंतु नेपाल की जनता ने उन्हें पूरी तरह बाहर का रास्ता दिखाकर बता दिया कि अब वामपंथ की दुनिया उजड़ रही है।
नेपाल की प्रातिनिधि सभा में 275 सदस्य होते हैं जिसमें 164 सदस्य सीधे मतदान के माध्यम से चुने जाते है। इन चुनावों में बालेन शाह के नेतृत्व वाली राष्टीय स्वतंत्र पार्टी 120 सीटों पर विजय प्राप्त कर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है जबकि दशकों तक राज करने वाली नेपाली कांग्रेस को मतदाताओे के आक्रोश का सामना करना पड़ा और वह मात्र 17 सीटो पर ही सिमट कर रह गई । कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी केवल सात -सात सीटों पर ही सिमट कर रह गईं। नेपाल में चुनाव मतपत्र के माध्यम से कराए जाते हैं और वहां इस बार 60 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मत का प्रयोग कर ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन किया है।
कौन हैं बालेन शाह – रैपर से काठमांडू के मेयर बने बालेन शाह मधेशी समाज के नेता हैं जो पहली बार देश के प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। दस वर्ष पूर्व तक किसी मधेशी नेता का प्रधानमंत्री बनना अकल्पनीय था। मधेशी लोगों की भाषा ,संस्कृति और रहन -सहन भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों से बहुत मिलता है। ये लोग मुख्य रूप से मधेश या तराई क्षेत्र में रहते हैं जो नेपाल और भारत का सीमावर्ती क्षेत्र है। मधेशी समुदाय में मैथिली, भोजपुरी, अवधी और हिंदी जैसी भाषाएं बोलने वाले लोग हैं। लंबे समय तक नेपाल की राजनीति में इन्हें प्रतिनिधित्व और अधिकारों को लेकर संघर्ष करना पड़ा जिसके कारण कई बार अलग मधेश राज्य बनाने की मांग को लेकर तीव्र आंदोलन हुए। अब पहली बार एक मधेशी नेता को वहां का प्रधानमंत्री बनने का अवसर प्राप्त होने जा रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान बालेन ने स्वयं को मधेश का बेटा बताया था और उनकी पार्टी ने, “अबकी बार बालेन सरकार” नारे के साथ अभियान प्रारंभ किया था। मधेश प्रांत के आठ जिलों की कुल 32सीटों में अधिकतर पर स्वतंत्र पार्टी को भारी सफलता प्राप्त हुई है।
जेन- जी के व्यापक समर्थन से नेपाल के नए प्रधानमंत्री बनने जा रहे बालेन शाह के समक्ष अनेक चुनौतियां भी हैं। नेपाल में भड़के जन आंदोलन के दौरान सबसे बड़ा मुद्दा युवाओं के लिए रोजगार की भारी कमी, पलायन का और भ्रष्टाचार का था। स्वाभाविक तौर पर जनता इन समस्याओं का समाधान मांगेगी। नेपाल के नए प्रधानमंत्री को विदेश नीति के अतंर्गत भारत और चीन के मध्य सामंजस्य व संतुलन स्थापित करके चलना होगा। भारत को लेकर बालेन कई बार विवादों में रहे हैं। एक बार बालेन शाह ने अपने कार्यालय में ग्रेटर नेपाल का नक्शा लगा लिया था जिसमें भारत के अनेक क्षेत्रों को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था बाद में विवाद व आलोचना के कारण बालेन को वह नक्शा हटाना पड़ा था । पूर्व प्रधानमंत्री ओली भी इस प्रकार की नादानियां करते रहे हैं और उन्हें भारत से पंगा लेने का पुरस्कार भी वहां की जनता ने दे दिया है। वह आदिपुरूष फिल्म और माता सीता को नेपाल की बेटी बताकर भी भारत के साथ भिड़ गए थे। बालेन को भारत और नेपाल के रोटी-बेटी सम्बन्ध को समझना होगा।
राजनैतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि बालेन शाह भारत का खुलकर विरोध करने की स्थिति में कतई नहीं हैं क्योंकि नेपाल में जिन- जिन लोगों ने भारत के साथ सामरिक चतुराई दिखाने का प्रयास किया है वो नेपथ्य में चले गए हैं। बालेन शाह ने राष्ट्रवाद के नाम पर कई बार भारत से पंगा लिया है और भारत के खिलाफ नैरेटिव खड़ा करने का प्रयास किया है। यद्यपि बालेन शाह ने भारत में ही अपनी पढ़ाई पूरी की किंतु उनका भारत विरोधी दृष्टिकोण कई बार सामने आ चुका है। नए संसद भवन में बने अखंड भारत के मानचित्र पर उन्होंने घोर आपत्ति जताई थी जबकि बालेन ने नेपाल के नक्शे में यूपी, बिहार से लेकर बंगाल तक के अनेक हिस्सों को नेपाल का बता दिया था। बालेन ने भारत ,अमेरिका और चीन के खिलाफ एक पोस्ट लिखा था जिसमें सबसे बड़ा भाग भारत के खिलाफ था, इस पोस्ट पर राजनैतिक विवाद होने पर उन्होंने यह पोस्ट वापस ले ली थी। आदिपुरूष फिल्म के दौरान हुए विवाद के समय उन्होंने अपनी आपत्ति प्रकट की थी और यहां तक धमकी दे डाली थी कि जब तक उनकी आपत्ति का निराकरण नहीं जाता तब तक वह नेपाल की राजधानी काठमांडू व अन्य शहरों मे भारतीय फिल्मों को नहीं चलने देगे। यही कारण है कि भारत नेपाल के घटनाक्रमों पर बराबर नजर बनाए रखे हुए है और वहां की स्थिति पर काफी संतुलित बयान दे रहा है क्योंकि बालेन शाह के साथ भारत का कोई बहुत अच्छा अनुभव नहीं रहा है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई भी नेपाल की राजनीति को प्रभावित करने के लिए अपनी गतिविधियां लगातार संचालित कर रही है। चुनावों के दौरान भी भारत के सटे सीमावर्ती क्षेत्रों में आईएसआई ने दंगे फैलाने की साजिशें रची थीं।
इन सबके बाद भी दशकों बाद नेपाल में पूर्ण बहुमत की सरकार आने से एक नई आशा बंधी है कि अब वहां स्थिर विकास हो सकेगा और युवाओं की अपेक्षाएं पूरी हो सकेंगी। बालेन शाह राष्ट्रवादी और मधेशी ब्राह्मण नेता हैं, भारत अपना रुख उनके प्रति सकारात्मक रखेगा क्योंकि बालेन शाह चाहते है कि यदि उन्हें बराबरी का सम्मान दिया गया तो वह प्रथम दृष्टया भारत के साथ ही जाना पसंद करेंगे। नेपाल की नई सरकार को नेपाल का पुनर्निर्माण करना है और उसमें भी युवाओं की आकांक्षा व सपनो को पूरा करना है इसलिए नये शासक को सभी के साथ मिलकर चलना ही होगा।

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योगी के विदेशी दौरों में सनातन धर्म और विकसित भारत का जलवा https://visionviksitbharat.com/the-global-presence-of-sanatan-dharma-and-a-developed-india-reflected-in-yogis-foreign-visits/ https://visionviksitbharat.com/the-global-presence-of-sanatan-dharma-and-a-developed-india-reflected-in-yogis-foreign-visits/#respond Sat, 14 Mar 2026 17:35:35 +0000 https://visionviksitbharat.com/?p=2032 प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ देश के ऐसे प्रथम मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने भगवा वस्त्र धारण कर सिंगापुर और जापान की सफल विदेश यात्रा की और सनातन की धर्म ध्वजा फहराकर…

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प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ देश के ऐसे प्रथम मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने भगवा वस्त्र धारण कर सिंगापुर और जापान की सफल विदेश यात्रा की और सनातन की धर्म ध्वजा फहराकर एक नया कीर्तिमान स्थापित करने में सफल रहे। मुख्यमंत्री योगी सिंगापुर और जापान से प्रदेश के विकास के लिए अनेक निवेश प्रस्ताव लेकर आए हैं और कई समझौतों पर हस्ताक्षर भी किए हैं, स्वाभाविक है इससे प्रदेश के विकास को एक नया बल मिलेगा।
गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी की पहली विदेश यात्रा जापान की थी और मुख्यमंत्री योगी भी अपनी विदेश यात्रा में सिंगापुर होते हुए जापान पहुंचे यानी कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अब प्रदेश के विकास को गति देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के पदचिह्नों का अनुगमन कर रहे हैं। दोनों ही देशों में मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में जय श्रीराम की गूंज रही, अयोध्या में दिव्य व भव्य राम मंदिर से लेकर काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के निर्माण का उल्लास सिंगापुर और जापान में भी दिखाई दिया। साथ ही मुख्यमंत्री सिंगापुर और जापान में जो बोल रहे थे उसका प्रभाव यूपी व देश की राजनीति पर भी दिखाई दे रहा था। योगी जी के वक्तव्यों पर वार पलटवार खूब हुए किंतु इन विदेश यात्राओं से यह तय हो गया कि अब यूपी का विकास थमने वाला नहीं है । पीडीए वाले हों या फिर बहुजन समाजवादी अब कोई भी यूपी में योगी जी को नहीं रोक सकता।
सिंगापुर व जापान के दौरे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 60 से अधिक संवाद कार्यक्रमों में भाग लिया और राज्य में निवेश को लेकर 500 से अधिक निवेशकों के साथ संपर्क करके निवेश का आमंत्रण दिया। योगी जी की यात्रा के दौरान 1.5लाख करोड़ रुपए के निवेश को लेकर विभिन्न कंपनियों के साथ समझौते हुए और 2.5 लाख करोड़ रुपए के निवेश के प्रस्ताव राज्य सरकार के प्रतिनिधिमंडल को मिले हैं। यह निवेश धरातल पर उतरने के बाद राज्य के पांच लाख युवाओं को कौशल विकास रोजगार के अवसर मिलेंगे।
मुख्यमंत्री की सिंगापुर और जापान यात्रा के दौरान सिंगापुर टोक्यो और यामानाशी में तीन बड़े निवेश रोड शो भी आयोजित किए गए । इनमें करीब 500 निवेशकों और वित्तीय संसाधनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। जापान में मुख्यमंत्री योगी ने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि हम सूर्यपुत्र हैं ओैर हमें सूर्य जैसी रोशनी चाहिए। उन्होंने निवेशकों को बताया कि यूपी में अब कोई दंगा नहीं होता है, सब चंगा है। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जिनकी प्रवृत्ति डकैती की थी उन्होंने यूपी को अंधेरे में रखा। अंधेरे मे काम करने वालों को उजाला रास नहीं आता। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने प्रदेश को भय और भ्रष्टाचार से मुक्त कर उजाले की ओर अग्रसर किया है। उन्होंने बताया कि पहले जहां प्रदेश को दंगों और कर्फ्यू की खबरों से पहचाना जाता था वहीं अब दीपोत्सव, महाकुंभ और वैश्विक निवेश उसकी नई पहचान बन रहे हैं। अयोध्या में दीपोत्सव, काशी में देव दीपावली और मथुरा -वृन्दावन में रंगोत्सव सकारात्मक परिवर्तन के प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 156 करोड़ से अधिक पर्यटक आए।
निवेश और औद्योगिक साझेदारियों के साथ सिंगापुर और जापान का दौरा यूपी की सांस्कृतिक विरासत के प्रसार के लिए भी महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ है। अपनी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री योगी ने प्रमुख नेताओं और कॉर्पोरेट जगत के प्रतिनिधियों और बच्चों को यूपी के पारंपरिक शिल्प से तैयार 500 से अधिक विशिष्ट स्मृति चिह्न भेंट कर प्रदेश की कारीगरी को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई। यह पहल वोकल फॉर लोकल तथा आत्मनिर्भर भारत की सोच को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने का अहम हिस्सा रही। निवेश वार्ताओं के समानांतर सांस्कृतिक प्रतीकों के माध्यम से मुख्यमंत्री ने यह संदेश देने का भी प्रयास किया कि यूपी केवल निवेश का गंतव्य नहीं अपितु समृद्ध परंपरा और शिल्प कौशल की धरती भी है। मुख्यमंत्री ने सिंगापुर और जापान के बच्चों के लिए मंडला आर्ट से बनी 300 कलाकृतियां तैयार करवाई थीं।
विदेशियों ने यूपी की बारीक शिल्पकला की खुले मन से प्रशंसा की। उपहारों में फिरोजाबाद के रंगीन कांच से बनी भगवान श्रीराम, शिव ,राधा -कृष्ण और बुद्ध की प्रतिमाएं विशेष आकर्षण का केंद्र रही। मुरादाबाद से ब्रास की शिव व बुद्ध प्रतिमाएं, वाराणसी की गुलाबी मीनाकरी से सुसज्जित काशी विश्वनाथ मंदिर का मॉडल, बुद्ध और मोर की कलाकृतियां तथा सहारनपुर की लकड़ी से तैयार शिव और राधा कृष्ण की प्रतिमाएं भेट कीं। इन उपहारों को पाकर बच्चों और निवेशकों के चेहरे खिल उठे। बनारस की मीनाकरी ने विदेशी प्रतिनिधियों को प्रभावित किया। मुख्यमंत्री ने सिंगापुर की धरती से जेवर एयरपोर्ट का जल्द संचालन प्रारंभ होने की घोषणा की और बताया कि अब प्रदेश का विकास रुकने वाला नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने विदेशी दौरे में हिंदी भाषा में संवाद स्थापित कर सभी हिंदी प्रेमियों का भी दिल जीत लिया।
सिंगापुर और जापान दोनों ही देशों में मुख्यमंत्री योगी को अपने बीच देखकर भारतीय समुदाय में उत्साह छा गया और लगभग हर कार्यक्रम में “योगी -योगी“ और जयश्रीराम के नारे लगे। मुख्यमंत्री ने निवेशकों को राज्य की औद्योगिक नीतियों, इन्फ्रास्ट्रक्चर और बड़े उपभेक्ता बाजार को निवेश के अनुकूल बताया। ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टरइलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, डाटा सेंटर, लाजिस्टिक, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और स्किल डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में सहयोग की सहमति बनी। मुख्यमंत्री ने यामानाशी में ग्रीन हाइड्रोजन के प्लांट का भी भ्रमण किया। उल्लेखनीय है कि गोरखपुर के खानीपुर गांव में प्रदेश का पहला ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट आरंभ हो चुका है।
एक ओर जहां प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सिंगापुर और जापान में उत्तर प्रदेश का झंडा गाड़ रहे थे वही दूसरी ओर प्रदेश के उपमुख्यंत्री केशव प्रसाद मौर्य जर्मनी में प्रदेश की ध्वजा लहरा रहे थे । उप मुख्यमंत्री भी प्रदेश के विकास के लिए निवेशकों को आकर्षित करने में सफल रहे। इन निवेश प्रस्तावों के धरातल पर उतरते ही प्रदेश में आर्थिक बदलाव का अनुभव होगा।

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अब आतंकवाद पर होगा निर्णायक “प्रहार“ https://visionviksitbharat.com/now-there-will-be-a-decisive-strike-against-terrorism/ https://visionviksitbharat.com/now-there-will-be-a-decisive-strike-against-terrorism/#respond Sat, 14 Mar 2026 17:25:23 +0000 https://visionviksitbharat.com/?p=2030 विभाजन की विभीषिका के साथ स्वतंत्र हुआ भारत, स्वतंत्रता के बाद से ही आतंकवाद से पीड़ित रहा किन्तु अभी तक उसके पास आतंकवाद से लड़ने की कोई स्पष्ट नीति या…

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विभाजन की विभीषिका के साथ स्वतंत्र हुआ भारत, स्वतंत्रता के बाद से ही आतंकवाद से पीड़ित रहा किन्तु अभी तक उसके पास आतंकवाद से लड़ने की कोई स्पष्ट नीति या रणनीति ही नहीं थी। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहनशीलता (जीरो टॉलरेंस) की नीति स्पष्ट हुयी। पहली बार माओवाद जैसे आतंकवाद को समाप्त करने के लिए एक तारीख तय की गई और उस दिशा में काम हुआ जिसका प्रभाव दिखाई देने लगा है। आतंकवादी हमले होने पर सीमा पार जाकर आतंकवादियों का दमन किया जाता है। अब भारत शत्रु के घर में घुसकर बदला लेता है, ऑपरेशन सिंदूर में भारत का क्रोध सम्पूर्ण विश्व ने देखा है।
आतंकवाद के बढ़ते खतरों व देश विरोधी षड्यंत्रों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने देश में पहली आतंकवाद रोधी नीति “प्रहार” जारी की है। प्रहार आतंकवाद के खिलाफ एक बहुस्तरीय रणनीति है जो खुफिया जानकारी के आधार पर चरमपंथी हिंसा की रोकथाम और उसे निष्क्रिय करने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य आतंकवादियों, उनके वित्तपोषकों और समर्थको को धन, हथियार और सुरक्षित ठिकानों तक पहुंच से वंचित करना है। इसमें साइबर क्राइम, ड्रोन हमलों. सीमा पार आतंकवाद और जटिल सुरक्षा खतरों से निपटने के सुगठित राष्ट्रीय ढांचे का भी उल्लेख किया गया है।
आजकल बहुत से आतंकवादी संगठन युवाओं की भर्ती के लिए इंटरनेट मीडिया का सहारा ले रहे हैं, इंटरनेट के माध्यम से ही साइबर ठगी आदि करके लिए धन संग्रह कर रहे हैं व लोगों की मानसिकता को अपने पक्ष में करने के लिए छद्म तरीके से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर काम कर रहे हैं, प्रहार रणनीति आतंकवाद के इन नए तरीकों से निपटने का मार्ग दिखाती है।
केंद्रीय गृहमंत्रालय द्वारा जारी की गई प्रहार रणनीति, भारत के अन्दर या विदेश से उत्पन्न होने वाले आतंकी खतरों का सामना करने के लिए सात प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। इसमें पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा गया है कि, भारत के पड़ोस में अस्थिरता का इतिहास रहा है जिसके कारण अराजक क्षेत्र उत्पन्न हुए हैं। इसके अलावा इस क्षेत्र के कुछ देशों ने कभी -कभी आतंकवाद को राज्यनीति के एक साधन के रूप मे इस्तेमाल किया है। इसके बावजूद भारत आतंकवाद को किसी विशेष धर्म, जातीयता, राष्टीयता या सभ्यता से नहीं जोड़ता। भारत ने हमेशा आतंकवाद और किसी भी तत्व द्वारा, किसी भी घोषित या अघोषित उद्देश्य की प्राप्ति के लिए इसके उपयोग की स्पष्ट व निर्विवाद रूप से निंदा की है।
नीति दस्तावेज में कहा गया है कि भारत लगातार आतंकवाद के पीड़ितों के साथ खड़ा रहा है और इस पर अडिग है कि दुनिया में हिंसा का कोई औचित्य नहीं हो सकता। यही सैद्धांतिक दृष्टिकोण आतंकवाद के विरुद्ध नई दिल्ली की शून्य सहिष्णुता की नीति का आधार है। दस्तावेज में कहा गया है, भारत लंबे समय से सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद से प्रभावित रहा है, जिसमें जेहादी आतंकवादी संगठन और उनके सहयोगी संगठन भारत में आतंकी हमलों की योजना बनाने, समन्वय करने, सुविधा प्रदान करने एवं उन्हें अंजाम देने में संलिप्त हैं। भारत अलकायदा और इस्लामिक स्टेट आफ इराक एंड सीरिया जैसे वैश्विक आंतकी समूहों के निशाने पर रहा है। जो स्लीपर सेल्स के माध्यम से देश में हिंसा भड़काने का प्रयास कर रहे हैं।
नई प्रहार नीति मे बताया गया है कि, विदेशीर धरती से संचालित आतंकवादियों ने भारत में हिंसा को बढ़ावा देने के लिए साजिशें रची हैं और उनके लिए काम करने वाले पंजाब व जम्मू कश्मीर में आतंकी गतिविधियों और हमलो को अंजाम देने के लिए ड्रोन सहित नवीनतम तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। साजो सा’मान प्राप्त करने के लिए संगठित आपराधिक नेटवर्क से संपर्क स्थापित कर रहे हैं। अब आतकी इंटरनेट के नये तरीकों का भरपूर उपयोग करने लगे हैं।
प्रहार (PRAHAAR) की परिभाषा अंग्रेजी के सात शब्दों मे संयोजित है, जिसमें पहला है पी से प्रिवेंशन यानी नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए आतंकी हमलो की रोकथाम। दूसरा है आर से रिस्पॉन्स अर्थात त्वरित, आनुपातिक और सुनियोजित सैन्य व नागरिक प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना। तीसरा है ए से एग्रीगेटिंग इंटरनल कैपासिटीज अर्थात आतंरिक क्षमताओं को एकीकृत करना जिसमें केंद्र और राज्य की एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाना और सुरक्षा बलों का आधुनिक तकनीक (AI, ड्रोन) से लैस करना शामिल है। चौथा है एच से ह्यूमन राइट्स एंड रूल आफ ला -खतरों को कम करने के लिए मानवाधिकार और कानून व्यवस्था पर आधारित प्रतिक्रिया। पांचवां ए से अटेन्यूएटिंग रेडिकलाजेशन यानी कट्टरता सहित आतंकवाद में सहायता करने वाली परिस्थितियों को कम करना। छठा भी ए से है – एलाइनिंग इंटरनेशनल एफर्ट्स जिसमें आतंकवाद से मुकाबले के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में समन्वय करना शामिल है तथा अंतिम और सातवां है आर से रिकवरी एंड रेसिलिएंस यानी समग्र समाज को मानसिक और भौतिक रूप से सशक्त बनाना।
प्रहार नीति का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य यह भी है कि जेसे ही आतंकी समूहों की साजिश का पता चले उसे उसी समय समाप्त कर देना भी है। गृह मंत्रालय की यह नीति उसी समय आई है जब हाल ही में तमिलनाडु से 6 संदिग्धों को पकड़ा गया है और उनसे काफी सनसनीखेज जानकारियां सामने आ रही है।
भारत सरकार की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को प्रधानमंत्री मोदी हर वैश्विक मंच पर दोहराते रहे हैं किंतु अब सरकार ने प्रहार नीति जारी करके अपना संकल्प स्पष्ट कर दिया है कि भारत के खिलाफ साजिश रचने वाले चाहे जहां पर भी बसे हों बच नहीं सकेंगे।

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एआई सम्मेलन – भारत की अभूतपूर्व सफलता और व्यथित कांग्रेस https://visionviksitbharat.com/ai-summit-indias-unprecedented-success-and-the-distressed-congress/ https://visionviksitbharat.com/ai-summit-indias-unprecedented-success-and-the-distressed-congress/#respond Sat, 14 Mar 2026 17:19:16 +0000 https://visionviksitbharat.com/?p=2028 नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन में आए विश्व के बड़े बड़े नेता इस पहल से अचंभित थे और भारत की प्रगति की प्रशंसा करते नहीं…

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नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन में आए विश्व के बड़े बड़े नेता इस पहल से अचंभित थे और भारत की प्रगति की प्रशंसा करते नहीं थक रहे थे। बड़ी बड़ी एआई कंपनियां व निवेशक भारत के साथ समझौते कर रही थीं। जन सामान्य गर्वित हो रहा था क्योंकि यहाँ भारत की युवा प्रतिभाओं की सराहना हो रही थी। सदा से ही राष्ट्र विमुख रही कांग्रेस पार्टी से ये देखा नहीं गया और उनके कुछ चुनिंदा कार्यकर्ता वहां अर्धनग्न होकर प्रदर्शन करने पहुँच गए। वास्तव में अब कांग्रेस पार्टी अब प्रधानमंत्री मोदी व भाजपा का विरोध करते -करते पूरी तरह भारत विरोधी हो गई है।
कांग्रेस का यह विरोध ऐसा ही था जैसे जब प्राचीन काल में जब ऋषि गण अपने आश्रमो मे किसी अच्छे कार्य के लिए यज्ञादि करते थे तो कुछ राक्षस उस यज्ञ को अपवित्र करने के लिए यज्ञकुंड में हड्डियां डालकर उसे अपवित्र करने का प्रयास करते थे। कांग्रेस ने जो कृत्य विदेशी मेहमानों के समक्ष किया है उससे स्पष्ट है कि कांग्रेस घोर अराजकतावादी बन चुकी है जिसकी अब सारी उम्मीदें समाप्त होती जा रही हैं।
एआई समिट कांग्रेस द्वारा की गई इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना से भारत का जेन- जी भी नाराज़ है जिसको भड़काकर कांग्रेस सड़क पर लाना चाहत है। भाजपा कांग्रेस द्वारा दिए गए इस अवसर को गंवाना नहीं चाहती । पार्टी की तरफ से संपूर्ण भारत में कांग्रेस कर्यालयों के बाहर धरना -प्रदर्शन आयोजित हो रहे हैं। मेरठ में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी भी कांग्रेस पर हमलावर हुए ओैर कहा कि कांग्रेस ने एआई समिट को अपनी नग्न राजनीति का अखाड़ा बना दिया है। उन्होंने कांग्रेस से पूछा कि देश तो जानता ही है कि आप पहले से ही नंगे हो फिर कपड़े उतारने की जरूरत क्यों पड़ी? यह दिखाता है कि देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस अब वैचारिक रूप से कितनी दिवालिया और दरिद्र हो गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने मीडिया से अपील करते हुए कहा कि जब मैं कांग्रेस की आलोचना करता हूं तो ऐसी सुर्खियां न चलाएं कि मोदी ने विपक्ष पर हमला बोला। कांग्रेस को बचाने की ये चालाकियां बंद करें।
इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस को सपा बसपा सहित कई अन्य छोटे क्षेत्रीय दलो का समर्थन नहीं मिला है जिनको कांग्रेस इंडी ब्लॉक की पार्टियाँ कहती है। कांग्रेस के इस कृत्य का लालू यादव की पार्टी राजद ने भी कड़ा विरोध किया है। जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी विरोध किया है। कांग्रेस ने इस तरह का प्रदर्शन करके सहयोगी दलों के बीच भी अपनी फजीहत करवा ली है। आगामी समय में यह दल कांग्रेस से दूरी बनाने पर विचार भी कर सकते हैं यही कारण हे कि इन सभी दलों की प्रधानमंत्री मोदी ने सराहना की है।
कांग्रेस के नेता और प्रवक्ता जिस प्रकार टी वी चैनलों व सोशल मीडिया पर इस हरकत को सही ठहरा रहे हैं उससे स्पष्ट है कि यह कांग्रेस पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की ही योजना थी। उनका कहना है कि लोकतंत्र मे अपनी बात कहने और सरकार का विरोध करने का अधिकार सबको है, उन्होंने अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग किया है। कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की इस हरकत से पुराने परंपरागत कांग्रेसी से भी खुश नहीं हैं और अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहे है। पुराने कांग्रेस नेताओं को इस घटना से कोई हैरानी नहीं है अपितु उनका कहना है कि यह बदली हुई कांग्रेस की बदलती हुई संस्कृति की निशानी है। कांग्रेस नेता शशि थरूर भी एआई समिट को अत्यंत सफल आयोजन बता रहे हैं और कांग्रेस के अर्धनग्न प्रदर्शन की निंदा कर रहे हैं। दरअसल प्रधानमंत्री मोदी की छवि को नुकसान पहुंचाने के चक्कर में कांग्रेस ने भारत की छवि व भारतीय संस्कृति को नुकसान पहुंचाया और इस तरह होली के स्वागत में अपने मुंह पर ही कालिख मल ली।
कांग्रेस के नेताओं की दिली इच्छा रही है कि किसी न किसी प्रकार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भारत की छवि को पूरी दुनिया में खराब किया जाए और भारत में बांग्लादेश व नेपाल जैसी अराजकता का वातावरण पैदा कर अपना स्वार्थ सिद्ध किया जाए किंतु उसका यह सपना पूरा नहीं हो पा रहा है और यही कारण है कि कांग्रेस हताश होकर नंगी राजनीति पर उतर आई है।

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युवाओं व नारी सशक्तीकरण को समर्पित है यूपी बजट https://visionviksitbharat.com/the-uttar-pradesh-budget-is-dedicated-to-youth-and-women-empowerment/ https://visionviksitbharat.com/the-uttar-pradesh-budget-is-dedicated-to-youth-and-women-empowerment/#respond Sat, 14 Mar 2026 17:13:52 +0000 https://visionviksitbharat.com/?p=2025 विगत कुछ माह से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जनसमुदाय को सरकार के निर्णयों से अवगत कराने के लिए पाती लिखने का अभिनव प्रयोग कर रहे हैं। इस बार…

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विगत कुछ माह से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जनसमुदाय को सरकार के निर्णयों से अवगत कराने के लिए पाती लिखने का अभिनव प्रयोग कर रहे हैं। इस बार बजट के बाद लिखी अपनी पाती में उन्होंने उत्तर प्रदेश के वित्त वर्ष 2026-27 के बजट की विशेषताओ पर प्रकाश डाला है। मुख्यमंत्री ने लिखा है कि यह बजट युवाओं व नारी शक्ति के लिए एक ऐतिहासिक बजट है। उत्तर प्रदेश का यह बजट नवाचार का बजट है। नवनिर्माण के 9 वर्षों की यह यात्रा प्रगति के पथ पर अग्रसर है।
मुख्यमत्री योगी पूर्व में भी कह चुके हैं कि विगत नौ वर्षों में यूपी असीमित क्षमताओं वाला प्रदेश बन चुका है।इस बजट में युवाओं को रोजगार उपलबध कराने के लिए एमएसएमई, स्टार्टअप, ओडीओपी और स्थानीय उद्यमों को विकसित करते हुए वृहद निवेश की नई योजनाओं को प्रारंभ करने का प्रावधान किया गया है। उभरती हुई नयी तकनीकीकी कई बड़ी घोषणाएं हुई हैं। प्रदेश में पहली बार स्टेट डेटा अथारिटी का गठन करने की ऐतिहासिक पहल की गई है। यह प्रदेश में वास्तविक समय पर आंकड़ों के संग्रह और इसके अनुश्रवण के साथ भविष्य की योजनाओं को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाएगा। उत्तर प्रदेश एआई मिशन, एआई डेटा लैब, एआई सेंटरऑफ एक्सीलेंस तथा डेटा सेंटर क्लस्टर प्रदेश को अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी एआइ एवं डीप टेक के क्षेत्र में एक एक नए वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायक होंगे। बजट के अनुसार ”टेक युवा समर्थ युवा” योजना के अंतर्गत 25 लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया जायेगा।
बजट में एआई को प्राथमिकता दी गई है जिसके लिए 225 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इंडिया एआई मिशन के अंतर्गत प्रदेश की 49 आईटीआई में एआइ लैब स्थापित की जाएगी। एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और एआई ठेटा लैब की स्थापना के लिए 32.32 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। साइबर सुरक्षा को भी बजट में अहम स्थान मिला हे। प्रदेश में पहली बार स्टार्ट अप इन्क्यूबेटर हब बनने जा रहा है इस कार्य के लिए 30 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। यू -हब का मुख्यालय लखनऊ और दूसरा इन्क्यूबेटर गौतमबुद्धनगर में बनाया जाएगा। यू -हब से ऐसे स्टार्टअप को बढ़ावा दिया जाएगा ।राजधानी के परिषदीय विद्यालयों को एआई से जोड़़ा जाएगा। स्मार्ट कक्षाओं में छात्रों को परंपरागत के साथ आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षा मिलेगी।
युवाओ के लिए रोजगार के नए क्षेत्रो का सृजन किया जा रहा है। हथकरघा, पावरलूम और गारमेंटिंग सेक्टर में रोजगार सृजन पर विशेष बल दिया गया है। वस्त्र उद्योग के क्षेत्र में 30 हजार रोजागर सृजन का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग योजना के अंतर्गत वर्ष 2026 -27 में 800 इकाइयों की स्थापना कर 16हजार लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य है। पंडित दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना के अंतर्गत उत्पादन के लिए 10 करोड़ और खजनी गोरखपुर स्थित कम्बल उत्पादन केंद्र के आधुनिकीकरण के लिए भी पर्याप्त धन की व्यवस्था की गई है।
युवाओ के लिए पर्यटन के माध्यम से भी रोजगार सृजन करने की व्यवस्था बजट में की गई है । इसके लिए युवा पर्यटन क्लब बनाए जाएंगे। युवाओं को पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार के लिए तैयार किया जाएगा। गोरखपुर में स्टेट इंस्टीटयूट ऑफ होटल मैनेजमेंट की स्थापना की जाएगी और फूड क्राफ्ट इंस्टिट्यूट अलीगढ़ को उच्चीकृत कर स्टेट इंस्टीटयूट ऑफ होटल मैनेजमेंट बनाया जाएगा। वहीं युवा पर्यटन क्लबॉन के लिए तीन करोड़ का प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के अंतर्गत निःशुल्क कोचिंग व्यवस्था तथा मुख्यमंत्री फेलोशिप कार्यक्रम से युवाओं के लिए अवसरों के नए द्वार खुल रहे हैं। बजट मे एमएसएमई सेक्टर को पर्याप्त धन मिलने से लघु सूक्ष्म और मध्यम उद्यम को बढ़ावा मिलने से युवाओ के लिए रोजगार और नौकरी के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। युवाओ के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए मंडल मुख्यालय वाले प्रत्येक जनपद में खेल विद्यालय व मैदान बनाने की योजना है जिसके अंतर्गत 2030 के कामनवेल्थ गेम्स एवं 2036 के ओलंपिक के लिए प्रतिभाओं को निखारा जाएगा।
महिला एवं बाल विकास के लिए कुल 18,620 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। महिला उद्यमिता को प्रोत्साहन देने के लिए महिला उद्यमी उत्पाद विपणन योजना, महिला उद्यमी क्रेडिट कार्ड योजना एवं जनपद स्तर पर श्रमजीवी महिला छात्रावास प्रस्तावित है। बजट मे मुख्यमंत्री महिला उद्यमी उत्पाद विपणन योजना के लिए 100 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है जबकि महिला क्रेडिट कार्ड योजना के लिए 151.04 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। इसके तहत महिलाओं को ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। महिला सामर्थ्य योजना के अंतर्गत गोरखपुर, बरेली और रायबरेली में दुग्ध कंपनियों का गठन कर दुग्ध संग्रहण व विपणन का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। निराश्रित महिला पेंशन योजना में 3500 करोड़ रुपए, छात्रावासो के निर्माण के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री श्रमजीवी महिला छात्रावास निर्माण योजना के लिए 35 करोड़ रुपए, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के लिए 252 करोड़ रुपए और मुख्यमंत्री बाल आश्रय योजना के अतंर्गत भवन निर्माण के लिए 80 करेड रुपए का प्रावधान किया गया है।
बजट में इस बार धन का आवंटन इस प्रकार से किया गया है यदि सरकार आगे कोई बड़ी योजना घोषित करती है तो उसके लिए भी पर्याप्त धन उपलब्ध रहे जैसे किअभी बुजुर्ग और वृद्ध महिलाओ के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन में वृद्धि करने से लेकर 60 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुकी महिलाओं के लिए सरकारी बसों में निःशुक्ल यात्रा की व्यवस्था प्रस्तावित है।नवरात्रि के अवसर पर विशेष अभियान चलाये जाते हैं जिनके लिए धन की पर्याप्त व्यवस्था की गई है।
प्रदेश सरकार के बजट को लेकर महिलाओं का कहना है कि इस बर के बजट से बेटियों की पढ़ाईसे लेकर विअव्ह तक की चिंता कम होरही है। यह बजट गरीब महिलाओं को व्यापक रूप से सहारा देने वाला है। इस बजट से कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढे़गी। स्वयं सहायता समूहो के लिए की गई घोषणाओं से महिला समूह के उत्पादों को बाजार दिलाने से गांव की महिलाएं आत्मनिर्भर बनेंगी।

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जो कहा वो किया – आपरेशन सिंदूर https://visionviksitbharat.com/modi-gov-operation-sindoor/ https://visionviksitbharat.com/modi-gov-operation-sindoor/#respond Thu, 08 May 2025 05:53:58 +0000 https://visionviksitbharat.com/?p=1729   “आपरेशन सिंदूर“ प्रधानमंत्री मोदी के उत्कृष्ट नेतृत्व का श्रेष्ठ उदाहरण है। यह आपरेशन बिना किसी दोष का अद्भुत प्रस्तुतीकरण रहा जिसमेंआतंकी ठिकानों और आतंकवादियों को छोड़कर किसी भी निर्दोष…

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“आपरेशन सिंदूर“ प्रधानमंत्री मोदी के उत्कृष्ट नेतृत्व का श्रेष्ठ उदाहरण है। यह आपरेशन बिना किसी दोष का अद्भुत प्रस्तुतीकरण रहा जिसमेंआतंकी ठिकानों और आतंकवादियों को छोड़कर किसी भी निर्दोष नागरिक या पाक सेना के जवान को नुकसान नहीं पहुंचा और भारतीय सेना अपनी कार्यवाही को पूरा करके सकुशल घर वापस आ गई।

 

अप्रैल 22, 2025 पहलगाम में 26-निहत्थे निर्दोष हिन्दुओं की धर्म पूछकर हत्या से पूरा देश आहत था। दुःख और क्रोध दोनों चरम पर थे। गृहमंत्री अमित शाह समाचार मिलते ही घटनास्थल पर पहुँच गए। प्रधानमंत्री अपनी विदेश यात्रा संक्षिप्त कर स्वदेश लौटे। अगले ही दिन मधुबनी रैली में घोषणा की, इस बार ऐसा दंड मिलेगा जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी, इस संकल्प को उन्होंने अपने मन की बात कार्यक्रम में दोहराया। गृहमुंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री के संकल्प को बल देते हुए कहा, “हम एक – एक आतंकी को चुन- चुन कर मारेंगे“ और अंत में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि ये मेरा उत्तरदायित्व है कि देशवासी जो कुछ चाहते हैं वह सब कुछ मोदी सरकार में होकर रहेगा। इन वक्तव्यों के पीछे सरकार और सेना के सभी संकल्पबद्ध राष्ट्रभक्त सामरिक और रणनीतिक तैयारियां कर रहे थे।

पहलगाम की आतंकी घटना के पश्चात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेना को सही समय, सही स्थान और सही लक्ष्य चुन कर सटीक वार करने की छूट दे दी थी। भारतीय सेना ने 6-7 मई 2025 की मध्यरात्रि को अपने पराक्रम का प्रदर्शन करके हर भारतीय का मस्तक गर्व से ऊंचा कर दिया। आज हर भारतीय नागरिक अपनी सेना के साहस को प्रणाम कर रहा है और सेना के साथ खड़ा है। जैसे ही ऑपरेशन सिंदूर के सफलतापूर्वक लांच होने की सूचना आई रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा “भारत माता की जय“ और उसके बाद भारत ही नहीं अपितु पूरे विश्व में ऑपरेशन सिंदूर ट्रेंड करने लगा। भारत पाक सीमा तथा पीओके पर 9 आतंकी ठिकानों के तबाह होते ही देश के अनेक हिस्सों में उत्सव का वातावरण बन गया।

लम्बे विचार विमर्श और तैयारियों, कूटनीतिक पक्ष को साधने के साथ सटीक रणनीति का उपयोग करते हुए “आपरेशन सिंदूर“ के माध्यम से भारतीय सेना ने पक्के सबूतों के साथ पाकिस्तान और गुलाम जम्मू -कश्मीर में स्थित आतंकी ठिकानों पर हमलाकर उन्हें तबाह कर दिया। भारत ने पंजाब प्रांत के बहालवपुर जैश -ए -मोहम्मद के संस्थापक मसूद अजहर के ठिकाने पर जोरदार मिसाइल अटैक किसा जिससे मसूद अजहर के परिवार के 14 सदस्यों के मारे जाने की खबर आ रही है। पाकिस्तानी सेना के चीन में बने एचक्यू -9 एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देते हुए भारतीय सेना ने 9 आतंकी ठिकानों को ध्वस्त करके भारत के सभी दुश्मनों को साफ संदेश दिया है कि अगर कोई उसे छेडे़गा तो वह अब घर में घुसकर मारेगा। यह नया भारत है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार देश के दुश्मनों को उसी भाषा में जवाब दे रही है जो भाषा वो समझते हैं । भारत को परमाणु हमले की धमकी देने वाले फिलहाल किसी बिल में छुपे हैं और अपने देशवसियों को कुछ बता पाने की स्थिति में ही नहीं रह गये हैं। जिन आतंकियों ने पहलगाम में निर्दोषों की हत्याएं करते समय उनकी पत्नियों या परिजनों से कहा था कि हम तुमको नहीं मारेंगे, जाओ मोदी को जाकर बता दो उनको प्रधानमंत्री मोदी ने बता दिया है कि वो सुन चुके हैं । उत्तर इतना तगड़ा और सधा हुआ दिया है कि आज पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठन, सेना व वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई हैरान हैं।

आपरेशन सिंदूर“ को मोदी सरकार में अब तक हुई स्ट्राइक्स में सबसे अलग माना जा रहा है। “आपरेशन सिंदूर“ प्रधानमंत्री मोदी के उत्कृष्ट नेतृत्व का श्रेष्ठ उदाहरण है। यह आपरेशन बिना किसी दोष का अद्भुत प्रस्तुतीकरण रहा जिसमेंआतंकी ठिकानों और आतंकवादियों को छोड़कर किसी भी निर्दोष नागरिक या पाक सेना के जवान को नुकसान नहीं पहुंचा और भारतीय सेना अपनी कार्यवाही को पूरा करके सकुशल घर वापस आ गई।

अब पाकिस्तान को यह समझ में नहीं आ रहा है कि वह पूरे घटनाक्रम पर क्या प्रतिक्रिया व्यक्त करे हालांकि पाक प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ की लंबी आपात बैठक के बाद पाक का बयान आया है कि उसे भारत पर जवाबी कार्यवाही करने का अधिकार प्राप्त है। पहलगाम घटना के बाद से पाकिस्तानी सेना एलओसी पर लगातार फायरिंग कर रही है जिसका भारतीय सेना भी पूरी बहादुरी के साथ लगातार जवाब दे रही है। भारत पाकिस्तान को लगातार चेतावनी दे रहा है कि एलओसी पर फायरिंग बंद करो नहीं तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहो।

आतंकी ठिकानों पर हमले से आतंकी संगठनों की जड़ें हिलीं -भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के अंतर्गत पाकिस्तान और पीओके में 9 आतंकी ठिकानो को तबाह कर दिया है। इसमें कम से कम 120 आतंकवादियों के मारे जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है। यह संख्या बढ़ भी सकती है। पाकिस्तान केवल 26 लोगों के ही मारे जाने का दावा कर रहा है। माना जा रहा है कि इस हमले में सबसे अधिक नुकसान जैश -ए- मोहम्मद के संस्थापक मसूद अजहर को हुआ है और उसके परिवार के 14 सदस्यों को मार गिराया गया है।

जिन 9 ठिकानों को निशाना बनाया गया, उनमें बहावलपुर का मरकज सुभान अल्लाह यह जैश -ए -मोहम्मद का प्रशिक्षण केंद्र है।14 फरवरी 2019 को पुलवामा में हुए हमले में इस केंद्र की मुख्य भूमिका रही है। यहां जैश – ऐ- मोहम्मद के सरगना मालना मसूद अजहर अपने परिवार तथा सहयोगियों के साथ रहता था और आतंकियों को प्रशिक्षित कर उन्हें भारत भेजता था। दूसरा -सबसे बड़ा हमला पंजाब के मुरिदके स्थित मरकजा तैयबा पर हुआ – यह लश्कर ए तैयबा का मुख्य प्रशिक्षण केंद्र है यहां आतंकियों को हर प्रकार से प्रशिक्षित किया जाता है। यहां पर हर वर्ष एक हजार छात्रों की भर्ती की जाती है ओसामा बिन लादेन ने यहां एक मस्जिद व गेस्ट हाउस के निर्माण में आर्थिक मदद की थी व 26/11के मुंबई हमलावरों को प्रशिक्षित किया गया था। इसमें अजमल कसाब भी शामिल था।(पंजाब, पाकिस्तान) के नरावेल जिले में सरजाल तेहर कलां के शकरगढ़ में स्थित यह जैश- ए- मोहम्मद का लांचिग पैड है । यह एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मे संचालित होता है यहसीमासे लगभग 6 किमी दूर है और यहां पर सुरंग निर्माण ड्रोन आदि का संचालन सिखाया जाता है ।

इसी प्रकार सियालकोट का महमूना जोया सेंटर इसका इस्तेमाल हिजबुल मुजाहिदीन करता है। बरनाला का मरकज अहले हदीस यह भी लश्कर को सेंटर है। कोटली का मरकज अब्बास भी एक मुख्य आतंकी केंद्र है जहां पर बड़े आतंकी सरगना घुसपैठ की योजना बनाते हैं और उन्हें सीमा पार कराने में मदद तक करते हैं। मुजफ्फराबाद का शावाई नाल्लाह कैंप भी एक बहुत बड़ा आतंकी शिविर केंद्र है । मुज़फ्फराबाद में लाल किले के सामने स्थित यह जैश -ए मोहम्मद का मुख्य केंद्र है यहां पर पाकिस्तानी सेना के रेंजर आतंकियो को प्रशिक्षण देते हैं। इन सभी केंद्रों पर किसी भी समय में 100 से 600 आतंकी रहते हैं।

आज यह सभी प्रशिक्षण केंद्र व लॉचिंग पैड ध्वस्त हो चके हैं और पाकिस्तान में हाहाकर मचा हुआ है। भारतीय सेना का बदला पूरा हो जाने के बाद भारतीय सेना के इतिहास में पहली बार दो महिला अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम का पत्रकार वार्ता में विधिवत वीडियो जारी किया और ऑपरेशन सिन्दूर की पूरी जानकारी दी।

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ऐतिहासिक निर्णय है जातिगत जनगणना https://visionviksitbharat.com/the-historic-decision-is-the-caste-based-census/ https://visionviksitbharat.com/the-historic-decision-is-the-caste-based-census/#respond Thu, 08 May 2025 05:47:56 +0000 https://visionviksitbharat.com/?p=1724   जातिगत जनगणना पर संघ का दृष्टिकोण भी स्पष्ट है कि यदि जातिगत जनगणना का उद्देश्य न्याय ओैर कल्याण है तो समर्थन योग्य है और यदि उसका उद्देश्य राजनीति और…

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जातिगत जनगणना पर संघ का दृष्टिकोण भी स्पष्ट है कि यदि जातिगत जनगणना का उद्देश्य न्याय ओैर कल्याण है तो समर्थन योग्य है और यदि उसका उद्देश्य राजनीति और समाज को बांटना है तो उसका सदैव विरोध है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इस निर्णय का समर्थन किया है।

 

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा धर्म पूछकर किये गये हिन्दू नरसंहार के बाद जनमानस में उपजे आक्रोष और पाकिस्तान पर कार्यवाही की प्रतीक्षा कर रहा आम जनमानस तथा राजनैतिक दल उस समय हैरान रह गए जब केंद्र सरकार ने जातिगत जनगणना कराने का बड़ा निर्णय सुनाया। केंद्र सरकार का यह निर्णय आते ही देश का राजनैतिक विमर्श जातिगत जनगणना पर केन्द्रित हो गया। आमजन यद्यपि यह सोच रहा है कि इस समय जब हम आतंकवादियों के शवों की प्रतीक्षा कर रहे हैं उस समय प्रधानमंत्री जी को ये क्या सूझ पड़ी, किन्तु आश्वस्त है कि प्रधानमंत्री जी ने ऐसा किया है तो अवश्य इसके पीछे कुछ रणनीति होगी। उधर कांग्रेस के नेतृत्व में इंडी गठबंधन इसे अपनी विजय बताकर प्रसन्नता व्यक्त कर रहा है। कांग्रेस तो इतनी आतुर हो गई कि उसने सोशल मीडिया पर, “सरकार उनकी, सिस्टम हमारा” कैप्शन के साथ राहुल का प्रचार आरम्भ कर दिया, फिर उनको याद दिलाना पड़ा कि ये फिल्म में एक खलनायिका द्वारा कहे गए शब्द हैं जो आतंकवादियों के साथ है।

पहलगाम आतंकी हमले के पश्चात प्रधानमंत्री जी ने कदा रुख अपनाया है और कहा है, हम आतंकवादियों तथा उनके पीछे छुपे लोगों का धरती के अंत तक पीछा करेंगे और सजा देंगे। प्रधानमंत्री ने इस बार पाकिस्तान को कल्पना से अधिक दंड मिलने की बात भी कही है। संभव है, इस प्रक्रिया में समय लगे और लम्बे समय तक युद्ध की परिस्थितियां बनी रहें। उस समय में विपक्ष अपना राजनैतिक अस्तित्व बचाए रखने के लिए क्या – क्या कर सकता है? स्वाभाविक रूप से जाती जनगणना जैसे मुद्दों को हवा देगा। भारत की अवश्यम्भावी विजय के उपरांत विपक्ष के पास क्या मुद्दा होगा? स्वाभाविक है वो पुनः अत्यंत आक्रामक रूप से जातिगत जनगणना के मुद्दे को उठाएगा यही कारण है कि केंद्र सरकार ने पहले ही जातिगत जनगणना का निर्णय लेकर उन वर्गों की चिंताओं को दूर कर दिया है जो मानती है कि जातिगत जनगणना उनके पक्ष में होगी और जिनको विश्वास में लेकर राहुल गाँधी तथा उनके मित्र देश और समाज का वातावरण बिगाड़ सकते हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सामाजिक समरसता के विचारों को आत्मसात करते हुए तथा संघ को अपने निर्णय में साथ लेकर केंद्र सरकार ने यह निर्णय लिया है।

कांग्रेस ने जातिगत जनगणना को एक राजनतिक हथियार के रूप में उपयोग करके 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के मिशन 400 को पूरा होने से रोक दिया यद्यपि उसके बाद हरियाणा, दिल्ली और महाराष्ट्र में भाजपा के नए नारों “एक रहेंगे नेक रहेंगे“ और “बटेंगे तो कटेंगे“ ने परिस्थितियाँ पूरी तरह बदल दीं। वर्तमान में भारत -पाक के मध्य चल रहे तनाव के समय सरकार द्वारा लिया गया जातिगत जनगणना का निर्णय विपक्ष के लिए तनाव पैदा करने है भले ही इस समय वो इस फैसले को अपनी जीत मानकर जश्न मना रहा है। वास्तविकता यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सहयोगियों व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ मिलकर विरोधी दलों के खतरनाक राजनीतिक एजेंडे पर पॉलटिकिल सर्जिकल स्ट्राइक कर दी है और एक बड़ा मुद्दा उनके हाथों से छीन लिया है।

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सदन और सदन के बाहर हमेशा यही कहते थे कि जब भी हमें मौका मिलेगा हम संसद से जातिगत जनगणना का प्रस्ताव पारित करवाकर रहेंगे। प्रधानमंत्री मोदी जी ने उनके इस कथन का पटाक्षेप कर दिया है और यह भी स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस जातिगत जनगणना पर केवल राजनीति ही करती रही है।

वर्ष 1931 में जब देश में अंग्रेजों की सरकार थी तब जातिगत जनगणना हुई थी, स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत में अधिकांश समय कांग्रेस की सरकारें ही रहीं किंतु कांग्रेस ने कभी भी जातिगत जनगणना करवाने का साहस नहीं किया अपितु पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से लेकर मनमोहन सिंह सरकार के गृहमंत्री पी चिदम्बरम तक ने सदन मे खड़े होकर 16 बिन्दुओं को आधार मानकर जातिगत जनगणना का कड़ा विरोध किया था और इसे देशहित के खिलाफ बताया था। यह एक कटु सत्य है किआज जिस कांग्रेस के नेता राहुल गाँधी जातिगत जनगणना के नाम पर देश को अराजकता की आग में झोकने का प्रयास कर रहे हैं उस कांग्रेस ने जातिगत जनगणना का हमेशा विरोध किया और इसे लागू नहीं होने दिया।

पत्रकार वार्ता में जातिगत जनगणना के निर्णय की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि जातिगत जनगणना कराना समता, समरसता, सुशासन और सामाजिक न्याय के एक नये युग का आरंभ है। अब जातिगत जनगणना का मुद्दा पूरी तरह से बीजेपी के पाले में है। भाजपा ने कभी भी जातिगत जनगणना का विरोध नहीं किया। स्मरणीय है कि जब बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री नीतिश कुमार इंडी गठबंधन में शामिल थे और उन्होंने जातिगत जनगणना को लेकर सर्वदलीय बैठक बुलाई थी तब बीजेपी ने भी उस बैठक में भाग लिया था और जातिगत जनगणना का समर्थन किया था यद्यपि बीजेपी को विपक्ष के तौर तरीकों पर आपत्ति थी क्योंकि जनगणना मूलतः केंद सरकार का विषय है और इसमें राज्य सरकारों की कोई भूमिका नहीं है। अभी तक जिन राज्यों में यह जनगणना हुई है वह राजनीति से प्रेरित तथा सामाजिक तनाव बढ़ाने वाली रही है।

केंद्र सरकार की जातिगत जनगणना से पहली बार वास्तविक आंकड़े सामने आयेंगे।इस जनगणना के माध्यम से कई चीजे स्पष्ट हो सकेंगी जिसमें एक यह बड़ा मुददा भी है कि हर जाति के दंबग लोग ही आरक्षण का लाभ उठाते चले आ रहे हैं जबकि उन्हीं जातियों और समाज के अन्य लोग पिछड़ते ही चले जा रहे हैं, उन्हें आरक्षण व सरकार की अन्य सुविधाओं का प्रत्यक्ष लाभ नहीं मिल पा रहा है अर्थात क्रीमिलेयर का भी वास्तविक वर्गीकरण हो सकेगा।

विपक्ष की जातिगत जनगणना केवल हिंदू समाज को जातियों में विभाजित करने की नीयत से थी जबकि मोदी सरकार अब संपूर्णता के आधार पर जातिगत जनगणना कराने जा रही हैं देश के इतिहास में पहली बार मुस्लिम समाज की जातियों की भी जनगणना होने जा रही है। इस जनगणना के माध्यम से धर्मांतरण करने वालों का आंकड़ा भी जुटाया जायेगा। धर्म परिवर्तन करने के कारण देश के कई हिस्सों की जनसंख्या और भौगोलिक संरचना में तेजी से बदलाव देखा गया है ।ऐसे में सरकार के यह भी पता करने का इरादा है कि किन धर्मों और जाति विशेष के लोगों में धर्मांतरण हुआ और किस हिस्से में इसका प्रभाव अधिक है। जातिगत जनगणना का परिणाम सामने आने के बाद सामाजिक आर्थिक स्थिति का सटीक डेटा मिल सकेगा। वंचित समूहों के लिए नीतियां बनाने में मदद मिल सकेगी संसाधनों और अवसरो का समान वितरण हो सकेगा तथा समाजिक असमानता को कम करने में मदद मिलने के साथ जाति व्यवस्था के कारण होने वाले भेदभाव की समस्या का भी समाधान हो सकेगा।

जातिगत जनगणना पर संघ का दृष्टिकोण भी स्पष्ट है कि यदि जातिगत जनगणना का उद्देश्य न्याय ओैर कल्याण है तो समर्थन योग्य है और यदि उसका उद्देश्य राजनीति और समाज को बांटना है तो उसका सदैव विरोध है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इस निर्णय का समर्थन किया है। संघ का विचार है कि “जाति का अंत आांकड़ों से नहीं, आत्मीयता से होगा लेकिन आंकड़ो के बिना न तो नीति बनेगी न्याय मिलेगा।“ वैसे भी संघ का मूल कार्य सामाजिक समरसता ही है और वह आगामी समय में सामाजिक समरसता का एक महा अभियान चलाने वाला है। वर्तमान जातिगत जनगणना का स्वरूप संघ के दृष्टिकोण से मेल खाता है।

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हिन्दुओं पर आतंक की कुदृष्टि एवं मोदी की कल्पना से भी बड़ी सजा का संकल्प https://visionviksitbharat.com/a-resolve-to-punish-those-who-cast-a-terrorizing-eye-on-hindus-with-consequences-beyond-imagination/ https://visionviksitbharat.com/a-resolve-to-punish-those-who-cast-a-terrorizing-eye-on-hindus-with-consequences-beyond-imagination/#respond Fri, 25 Apr 2025 05:53:01 +0000 https://visionviksitbharat.com/?p=1655 जब ऐसा प्रतीत होने लगा कि कश्मीर आतंकवाद के साए से निकलकर विकास और शांति के पथ पर आगे बढ़ रहा है तब ही पाकिस्तान ने अपने आतंकी संगठनों और…

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जब ऐसा प्रतीत होने लगा कि कश्मीर आतंकवाद के साए से निकलकर विकास और शांति के पथ पर आगे बढ़ रहा है तब ही पाकिस्तान ने अपने आतंकी संगठनों और कश्मीर में अपने बचे खुचे स्लीपर सेल की सहायता से एक बार फिर आतंक का नंगा नाच किया। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में जो हुआ उसने देश की नब्बे के दशक की डरावनी स्मृतियां ताज़ी कर दीं। हथियारबंद आतंकवादियों ने बैसरन पहुंचे हिन्दू पर्यटकों अंधाधुंध फायरिंग कर मौत के घाट उतार दिया। हिन्दुओं से उनका धर्म पूछा, कलमा सुनाने को कहा, नीचे के कपड़े उतारकर मजहब जांचा और सिर में गोली मार दी। बिलखते हुए औरतों और बच्चों से कहा जाओ- मोदी को बताओ।

आतंकवादियों ने यह घृणित काम उस समय किया जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे डी वेंस भारत में थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब के दौरे पर। आतंकवादियों ने हिंदुओं का नरसंहार करने के लिए मंगलवार का दिन चुना जिसे हिन्दू बहुत पवित्र मानते हैं। आतंकवादी बॉडी कैमरा पहने हुए थे, उन्होंने हत्याओं का वीडियो भी बनाया। पाकिस्तानी आतंकवादियों ने सोचा था कि ऐसा कुछ करके वो भारत को एक बार फिर अस्थिर कर देंगे लेकिन वो भूल गए कि अब भारत बहुत आगे बढ़ चुका है और ईंट का जवाब पत्थर से देगा। घटना की सूचना आते ही प्रधानमंत्री सऊदी अरब से, गृह मंत्री से बात करते हैं और गृहमंत्री अमित शाह तत्काल श्रीनगर पहंचकर सुरक्षा समीखा बैठकें करते हैं, घटन स्थल पर जाते हैं, पीड़ितों से मिलते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना दौरा बीच में ही छोड़कर वापस आ जाते हैं और एअरपोर्ट पर भी बैठक कर अद्यतन जानकारी लेते हैं । वित्तमंत्री अमेरिका से भारत निकल पड़ती हैं। उसी दिन कैबिनेट समिति की बैठक होती है और पाकिस्तान सम्बन्धी कूटनीतिक निर्णय लिए जाते हैं। पहलगाम हिंदू नर संहार के प्रत्येक पीड़ित का शव सैनिक सम्मान के साथ घर पहुंचाया जा रहा है।

भारत सरकार ने पाकिस्तान को कूटनीतिक दृष्टि से कड़ा संदेश देते हुए 1960 का सिन्धु जल समझौता निलंबित कर दिया है, ज्ञातव्य है कि 1965 और 1971 के युद्ध में भी इसे निलंबित नहीं किया गया था। अटारी बार्डर बंद कर दिया गया है। सभी पाकिस्तानी नागरिकों का वीजा रद्द करते हुए उनको 48 घंटे में भारत छोड़ने के लिए कहा गया है और भारत अपने नागरिकों को पाकिस्तान से वापस बुला रहा है। दूतावासों अधिकारियों की संख्या 55 से घटाकर 30 की जा रही है। यही नहीं भारतीय सेनाओं को हाई एलर्ट कर दिया गया है । कश्मीर घाटी में भी आपरेशन आलआउट में तीव्रता लाई जा रही है। भारत के सभी प्रमुख राजनयिकों के साथ बैठक करके उन्हें भारत के पक्ष से अवगत करा दिया है। रूस, अमेरिका, इजराइल, इटली जैसे सभी प्रमुख राष्ट्रों ने भारत की आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता ( जीरो टॉलरेंस) की नीति का समर्थन किया है।

प्रधानमंत्री ने 24 अप्रैल को बिहार के मधुबनी में अत्यंत सख्त शब्दों का प्रयोग करते हुए चेतावनी दी है, कि इस घटना में शामिल तथा इसके पीछे के षड्यंत्रकारियों की पहचान करके उनको दंड देने के लिए भारत धरती के किसी भी कोने में जाएगा। इस बार इन षड्यंत्रकारियों को ऐसा दंड मिलेगा जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं करी होगी। अब उनकी बची खुची जमीन को भी मिट्टी में मिलाने का समय आ गया है। प्रधानमंत्री जी ने इस बात को अंग्रेजी में दोहराते हुए, सम्पूर्ण विश्व को भी ये सन्देश दिया कि. भारत अब रुकने वाला नहीं है।
धारा 370 हटने के बाद से ही पाकिस्तान तथा उसके आतंकी नेटवर्क में बेचैनी थी और ये लोग बड़ी वारदात को अंजाम देने का लगातार प्रयास कर रहे थे अंततः उमर अब्दुल्ला सरकार की सरकार वापस आने के बाद उनको यह मौका मिल ही गया। आतंकवादी गुट कश्मीर में लगातार बढ़ रहे पर्यटन से परेशान थे क्योंकि गरीब कश्मीरी मुसलमानों जिनमें गुज्जर, बकरवाल जैसे शिया मुस्लमान शामिल हैं उनसे उनको समर्थन नहीं मिल पा रहा था। कश्मीर के गरीब परिवार पर्यटकों के आगमन से ही फलते -फूलते हैं और उनका जीवन -यापन चलता है। बीते दिनों घाटी में पर्यटकों के खिलाफ बयानबाजी की गई और पर्यटकों के खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास किया गया इनमें सत्ताधारी ओमर अब्दुल्ला की पार्टी के लोग भी शामिल थे।

आज प्रधानमंत्री के अनथक प्रयासों से कश्मीर के हालात भले ही बदल रहे हों लेकिन स्थानीय स्तर पर विशेष रूप से घटी के अब्दुल्ला और मुफ़्ती परिवारों के आस पास अभी भी ऐसे तत्व मौजूद हैं जिनके मन में पाकिस्तान के प्रति प्रेम जागता रहता है और वो अनर्गल बयानबाजी करते रहते हैं। पहलगाम की आतंकी घटना जहाँ घटी वो स्थान अमरनाथ यात्रा के दौरान ही खुलता है, इस स्थान को टूर ऑपरेटर्स ने बिना सुरक्षा बलों को सूचित किये कैसे खोल दिया? वो कौन से टूर ऑपरेटर्स हैं? स्वाभाविक है ये हमला बिना स्थानीय लोगों की मिलीभगत के नहीं हुआ है और यही कारण है कि हमलावरों की खोज, पहचान के लिए अब तक 500 से अधिक संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है।

आतंकी हमले में मारे गए मंजुनाथ की पत्नीपल्लवी राव, जिनसे आतंकियों ने कहा – जाओ मोदी को बताओ ने , रिपब्लिक चैनल पर अर्नब गोस्वामी से बात करते हुए कहा – “मेरी एक ही रिक्वेस्ट है मोदी जी से कि भारत का सुनते ही आतंकियों को कांपना चाहिए” और मोदी जी ने पुरे विश्व के समक्ष इसकी घोषणा भी कर दी है। उधर मुस्लिम तुष्टीकरण में अंधे दल इस दुखद अवसर को भी अपने वोट बैंक को खुश करने के लिए भुना लेना चाहते हैं । पहले कांग्रेस पार्टी के दामाद राबर्ट्र वार्ड्रा ने हैरान करने वाला बयान दिया फिर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने पहलगाम आतंकी हमले को महज एक हादसा बताकर हल्का करने का असफल प्रयास किया,इसी प्रकार का आपत्तिजनक बयान शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने दिया। इन सभी दलों के नेता और प्रवक्ता इस सत्य को झुठलाने में लगे हैं कि आतंकवादियों ने घर्म पूछकर हिंदुओं का नरसंहार किया है। यह लोग पाकिस्तान की निंदा तक नही कर पा रहे हैं, इनका व्यवहार पाकिस्तान व आंतकियों के लिए कवर फायर का काम कर रहा है।

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भारतीय मिसाइलों व रक्षा उपकरणों का बज रहा दुनिया में डंका https://visionviksitbharat.com/indian-missiles-and-defense-equipment-are-earning-global-acclaim/ https://visionviksitbharat.com/indian-missiles-and-defense-equipment-are-earning-global-acclaim/#respond Fri, 25 Apr 2025 05:47:11 +0000 https://visionviksitbharat.com/?p=1652 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सर्वांगीण विकास के पथ पर बढ़ता हुआ आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है। रक्षा क्षेत्र भी इस धारा से अछूता नहीं है इसमें भी…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सर्वांगीण विकास के पथ पर बढ़ता हुआ आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है। रक्षा क्षेत्र भी इस धारा से अछूता नहीं है इसमें भी अहम और व्यापक परिवर्तन दिख रहा है । 2014 के पूर्व मात्र एक दशक पूर्व तक भारत की पहचान रक्षा उपकरणों के खरीदार की हुआ करती थी। रक्षा खरीद में घोटालों के समाचार आना सामान्य बात थी फिर भी ख़रीदे गए हथियारों की समय पर आपूर्ति नहीं होती थी।

मोदी जी के नेतृत्व में ये परिस्थितियाँ तीव्रता के साथ बदल रही हैं। अब भारत जल, थल और नभ तीनों सेनाओं के सभी अंगों को सुदृढ़ करने के लिए दिन-रात प्रयास कर रहा है जिससे रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता और बल दोनों निरंतर बढ़ रहे हैं। भारत के रक्षा वैज्ञानिक निरंतर शोध में में व्यस्त हैं। हर दिन किसी न किसी मिसाइल का सफल परीक्षण किया जा रहा है, रक्षा उपकरणों का उत्पादन बढ़ाया जा रहा है जिसके फलस्वरूप भारत की मिसाइलों व रक्षा उपकरणों का डंका विश्व बार में बजने लगा है। अब भारत रक्षा उपकरणों तथा तकनीक का क्रेता ही नहीं विक्रेता भी बन रहा है। द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के अंतर्गत होने वाले समझौतों में भारत यह बात भी शामिल करता है कि क्रय किये जा रहे हथियारों का निर्माण व सम्बंधित प्रशिक्षण भी भारत में हो। राफेल लड़ाकू विमान इसका प्रमुख उदाहरण है।

आज भारतीय मिसाइलों की क्षमता से विश्व प्रभावित हो रहा है और कई देश भारतीय मिसाइलें खरीदकर उन्हें अपनी सीमाओं की सुरक्षा में लगाना चाहते हैं । वह छोटे देश तथा जिनकी सीमा चीन से लगी हुई है या फिर जिन पर विस्तारवादी चीन की गिद्ध दृष्टि लगी है, विशेष रूप से भारत की ब्रह्मोस मिसाइल खरीदकर अपने यहां तैनात कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक कुशल रणनीतिकार की तरह चीन व पाकिस्तान को चारों ओर से घेरने का काम कर रहे हैं, जिसमें ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें महत्वपूर्ण हैं। ब्रह्मोस एक ऐसी उन्नत मिसाइल है जिसे न केवल दक्षिण चीन सागर के राष्ट्र अपितु बड़े मुस्लिम राष्ट्र भी खरीद रहे हैं।

चीन के शत्रु फिलीपींस को भारत ने ब्रह्मोस दी है। फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइलो का निर्यात भारत द्वारा किसी भी देश के साथ किया गया अब तक का सबसे बड़ा रक्षा विक्रय समझौता है। भारत ने ब्रह्मोस सुपर सोनिक मिसाइल की आपूर्ति के लिए जनवरी 2022 में फिलीपींस के साथ 375 मिलियन डालर का समझौता किया था जो कि अब लागू हो चुका है। अप्रैल- 2024 फिलीपींस को ब्रह्मोस की पहली खेप मिली । इंडोनेशिया भी भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल खरीदने वाला है। वियतनाम और मलेशिया जैसे दक्षिण पूर्व एशियाई देशों ने भी इस अत्याधुनिक मिसाइल को खरीदने में रुचि दिखाई है।

आगामी दिनों में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश भी ब्रह्मोस मिसाइल के बड़े खरीददार बन सकते हैं। श्रीलंका जैसे छोटे देश जिनकी सीमा चीन से मिलती है उन सभी देशों के साथ ब्रह्मोस को तैनात करने के लिए बातचीत चल रही है। साथ ही यह वर्ष ब्रह्मोस मिसाइल का 25वां वर्ष मनाया जा रहा है इसलिए 25 देशों के साथ ब्रह्मोस की डील को लेकर वार्ता चल रही है जिसमें कुछ देशों के साथ वार्ता अंतिम चरण में पहंच चुकी है।

ब्रह्मोस की विषेषता – सबसे तेज सुपरसेनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस भूमि, वायु, जल यानि समुद्र की गहराइयों में भी पलक झपकते ही शत्रु को निशाना बना लेती है। 12 जून 2001 को मिसाइल ने अपनी पहली सफल उड़ान भरी थी । यह भारत और रूस की एक संयुक्त परियोजना है जिस पर लगातार काम चल रहा है। इस मिसाइल का नामकरण भारत की नदी ब्रह्मपुत्र और मास्को की नदी मोसक्वा के नाम पर किया गया है। 24 जनवरी 2024 के ब्रह्मोस के नये उन्नत वर्जन का सफल परीक्षण किया गया। मिसाइल की रेंज को बढ़ाया गया है और साथ ही तकनीक को भी बेहतर बनाया गया है।यह मिसाइल अपनी सटीकता के लिए जानी जाती है। अब इस मिसाइल की रेंज बढ़कर 800 किमी हो गई है जबकि पहले रेंज केवल 200 किमी तक ही सीमित थी। यह हवा में ही रास्ता बदलने तथा चलते फिरते टारगेट को भी ध्वस्त करने में सक्षम है। यह 10 मीटर की ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम हैं । यह एक ऐसी मिसाइल है जिसे शत्रु अपने रडार से देख नहीं पायेगा। यह मिसाइल 1200 यूनिट की ऊर्जा पैदा करती है जो किसी भी बड़े टारगेट को पलक झपकते ही ध्वस्त कर सकती है। ब्रह्मोस मिसाइल भारतीय नौसेना के कई युद्धपोतों पर तैनात है।

ब्रह्मोस मिसाइल के बाद भारत के कई अन्य हथियार भी विदेशी की सेनाओं में होंगे जिसमें आकाश मिसाइल, अर्जुन टैंक, लाइट एयरक्राफ्ट जैसे कई उपकरण शामिल हैं जिनके निर्यात करने की तैयारियां चल रही हैं।

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भारत कोई धर्मशाला नहीं : बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ ऐतिहासिक कदम https://visionviksitbharat.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%88-%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%be/ https://visionviksitbharat.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%88-%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%be/#respond Fri, 25 Apr 2025 05:43:29 +0000 https://visionviksitbharat.com/?p=1649 2025 में बजट के अतिरिक्त भी कई ऐतिहासिक विधेयक पारित हुए हें जिनमें से एक है आब्रजन और विदेशियों विषयक विधेयक -2025 । यह विधेयक भारत को वर्ष 2047 तक…

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2025 में बजट के अतिरिक्त भी कई ऐतिहासिक विधेयक पारित हुए हें जिनमें से एक है आब्रजन और विदेशियों विषयक विधेयक -2025 । यह विधेयक भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में अग्रणी भूमिका निभाने वाला तो है ही साथ ही भारत की आंतरिक व वाह्य सुरक्षा तंत्र और आर्थिक तंत्र को भी मजबूत बनाने वाला भी है। जब यह विधेयक अधिसूचित होकर पूरे भारत में लागू हो जायेगा तब बांग्लादेशी व रोहिंग्याओं की अवैध घुसपैठ सहित अनेक प्रकार के अपराधों पर भी लगाम लग सकेगी।

इस विधेयक के कानून बन जाने के बाद कोई भी विदेशी नागरिक पहले की तरह भारत में घुस कर, भारत के किसी भी हिस्से में जाकर निवास करते हुए भारत विरोधी गतिविधियों में संलिप्त नहीं हो पाएगा। अब सीमा पार करने वाले हर व्यक्ति का पूरा डाटा एकत्र किया जायेगा । अभी भारत आने वाले विदेशी नागरिकों का कोई डाटा उपलब्ध नहीं है। यह विधेयक भारत की एकता, अखंडता तथा सुरक्षा के लिए अतयंत महत्वपूर्ण है । इस बिल के लागू हो जाने के बाद अवैध रोहिंग्या/बांग्लादेशी घुसपैठ पर रोकथाम ही नहीं लगेगी अपितु ऐसे अराजक तत्व जो समाज में घुल मिलकर छोटे मोटे अपराधों में संलिप्त हो रहे हैं तथा समाज का वातावरण प्रदूषित करते हुए लवजिहाद व धर्मान्तरण जैसी गतिविधियों में संलिप्त हो जाते हैं उनसे भी निपटा जा सकेगा।

इस विधेयक पर संसद के दोनों सदनों में चर्चा के दौरान स्पष्ट हुआ कि भारत में अवैध घुसपैठ की समस्या कितना विकराल रूप ले चुकी है। भारत के सभी मेट्रो शहर अवैध अराजक तत्वों के निशाने पर हैं। भारत के अधिकांश सीमावर्ती क्षेत्रों तथा समस्त पूर्वी राज्यों जिनमें असम और पश्चिम बंगाल प्रमुख हैं में यह समस्या नासूर बन चुकी है। पश्चिम बंगाल के तीन सीमावर्ती जिलों की डेमेग्राफी अवैध घुसपैठ के कारण बदल चुकी है । गृह राज्यमंत्री नित्यांद राय ने जब सदन में बताया कि बांग्लादेशी घुसपैठ की सबसे अधिक समस्या कांग्रेस शासित राज्यों कर्नाटक, झारखंड, तेलंगना तथा तृणमूल कांग्रेस शासित राज्य पश्चिम बंगाल में है क्योंकि यहां की राज्य सरकारें सहयोग नहीं कर रही हैं तब विपक्षी दलो ने हंगामा करते हुए सदन का बहिष्कार कर दिया। गृहराज्य मंत्री ने अवगत कराया कि बंगाल सरकार सीमा पर बाड़ नहीं लगाने दे रही है साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सीमा पर टीएमसी के कार्यकर्ता ही बीएसएफ के कार्यों में बाधा डालने का काम कर रहे हैं जिसके कारण बांग्लादेशी घुसपैठ पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। लोकसभा में बहस के दौरान ही गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट कर दिया कि भारत कोई “धर्मशाला“ नहीं हैं।

विधेयक पर बहस के दौरान घुसपैठ व शरणार्थी शब्द को स्पष्ट किया गया क्योंकि विपक्षी दलों के सांसद तुष्टिकरण की विकृत राजनीति के कारण इन दोनों शब्दों का घालमेल कर रहे थे। ये विपक्षी सांसद इस विधयेक को वसुधैव कुटुंबकम की भवना से परे बताकर भ्रम व अराजकता की राजनीति करने का प्रयास कर रहे थे किंतु सरकार ने अपने तर्कों से विपक्ष को बेनकाब कर दिया जिसके परिणामस्वरूप वे राज्यसभा में हंगामा करते हुए सदन से बाहर चले गये।

इस नये कानून में विदेशी अधिनियम 1946, पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम 1920 तथा विदेशियों का पंजीकरण अधिनियम 1939 और आब्रजन (वाहक दायित्व ) अधिनियम 2000 को निरस्त करते हुए एक नया व्यापक कानून बनाने की आवयकता की पहचान करते हुए नया आब्रजन और विदेशी विधेयक 2025 लाया गया है। नये कानून का एक उद्देश्य यह भी है कि कानूनों की बहुलता और अतिव्यापन से बचा जाये तथा विदेशियों से संबंधित मामलों को विनियमित किया जाए, जिसमें वीजा की आवश्यकता, पंजीकरण और अन्य यात्रा संबंधी दस्तावेज (पासपोर्ट) आदि शामिल है । इस नये कानून के माध्यम से भारत में प्रवेश करने और बाहर जाने वाले सभी लोगों के लिए सभी प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया जा सकेगा।

नये कानून के अनुसार किसी भी विदेशी को बिना वैध पासपोर्ट या दस्तावेजों के भारत आने पर 7 साल की जेल और 10 लाख रुपये का जुर्माना देना होगा। गलत जानकारी देने या दस्तावेजों में गड़बड़ी करने पर 3 साल की जेल और 3 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है। भारत में बिना वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेजों के माध्यम से प्रवेश करने पर तुरंत हिरासत में लिया जायेगा। अब इस विधेयक के नये नियमों के अनुरूप अगर कोई मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है तो अधिक कड़ी कार्यवाही की जायेगी। यह विधेयक केंद्र सरकार को उन स्थानों का नियंत्रण करने का अधिकार भी देता है जहां विदेशियो काआना जाना लगा रहता है । इसके तहत मालिक को परिसर को बंद करने, निर्दिष्ट शर्तों के साथ इसके उपयोग की अनुमति देने या सभी या निर्दिष्ट वर्ग के विदेशियों को प्रवेश देने से मना करने का अधिकार का दिया गया है।

निरस्त किये गए कानून की कमियों का लाभ उठाकर ही बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भारत आ रहे थे क्योंकि उस क़ानून में उनकी जांच करने तथा व्यापक पूछताछ की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी। इसी कारण से आज लाखों की संख्या में अवैध नागरिक भारत में रह रहे हैं और अब वह राष्ट्रीय समाजिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं।

गृहमंत्री अमित शाह ने सदन में अपने भाषण के दौरान कहा कि हम नियम बनाकर अवैध घुसपैठ को रोक रहे हैं। हमारी सीमा पर कुछ संवदेनशील स्थान हैं, सेना के अड्डे हैं, उनको दुनियाभर के लिए खुला नहीं छोड़ सकते। पहले भी घुसपैठियो को रोका जा सकता था किंतु कोई नियम नहीं था अतः हमने नियम बनाने का साहस किया है । इस नये कानून से भारत आने वाले विदेशी नागरिकों की जानकारी पुख्ता होगी । सुरक्षा की दृष्टि से ड्रग्स कार्टल, घुसपैठियों की कार्टल, हवाला व्यापारियों को समाप्त करने की व्यवस्था इस विधेयक में की गई है।
गृहमंत्री अमित शाह ने सदन को बताया कि सबसे अधिक बांग्लादेशी व रोहिंग्याओं की घुसपैठ बंगाल से हो रही है। अब तक जितने घुसपैठिये पकड़े गये हैं, उनके आधार कार्ड बंगाल के 24 परगना क्षेत्र के है। तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता ही इन लोगों के अवैध कागज बनवा रहे हैं। नये कानून में अवैध कागज बनवाने वाले भी सजा के दायरे में आ गये हैं। नया कानून 36 धाराओं में निहित है । सभी को कानूनी रूप दिया गया है । सदन में गृहमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि अब जो भारत में केवल भारत के हित के लिए आयेगा वहीं यहां पर रह सकेगा। अब भारत धर्मशाला नही है । सरकार उन लोगों का स्वागत करने के लिए तैयार है जो पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, सेवा या व्यापार के लिए भारत आना चाहते हैं सरकार केवल उन लोगों को भारत आने से रोकेगी जिनके इरादे गलत हैं और जो हमारे लिए खतरा पैदा करेंगे उनसे गंभीरता से निपटा जायेगा।

इस कानून के माध्यम से भारत में गैरकानूनी तरीके से घुसना और यहां बसना मुश्किल हो जायेगा। रोहिंग्या/ बांग्लादेशी घुसपैठ अब चुनाव में भी एक बड़ा मुददा बन गई है । दिल्ली में तो आम आदमी पार्टी कई विधायक बांग्लादेशी व रोहिंग्याओं का फर्जी पासपोर्ट, आधार कार्ड व राशन कार्ड आदि बनवा रहे थे जिनकी जांच चल रही है । केंद्र की सरकार को पूर्ण विश्वास है कि नक्सलवाद, आतंकवाद की तरह आने वाले समय में रोहिंग्या/ बांग्लादेशी घुसपैठ का भी समाधान हो जायेगा और भारत तीव्रता के साथ विकास के पथपर अग्रसर हो सकेगा।

 

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उत्तर प्रदेश का उत्कर्ष काल https://visionviksitbharat.com/the-zenith-of-uttar-pradesh/ https://visionviksitbharat.com/the-zenith-of-uttar-pradesh/#respond Wed, 02 Apr 2025 04:56:46 +0000 https://visionviksitbharat.com/?p=1567   8 वर्षों में प्रति व्यक्ति आय 46 हजार से बढ़कर 1 लाख 24 हजार हो गयी है। अब प्रदेश में आयुध निर्माण भी होने लगा है। महिला, किसान, छात्र,…

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8 वर्षों में प्रति व्यक्ति आय 46 हजार से बढ़कर 1 लाख 24 हजार हो गयी है। अब प्रदेश में आयुध निर्माण भी होने लगा है। महिला, किसान, छात्र, युवा सभी वर्ग के लोग सरकारी योजनाओं से सीधे लाभान्वित हो रहे हैं।

 

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के 8 वर्ष का कार्यकाल पूर्ण हो चुका है। इन 8 वर्षों की सफलताओं और उपलब्धियों को आधार बनाकर भारतीय जनता पार्टी ने मिशन 2027 की तैयारियां भी आरम्भ कर दी हैं। प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने 25 से 27 मार्च 2025 तक हर जिले में तीन दिवसीय विकास उत्सव मनाया जिसमें सरकार की उपलब्धियों का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत किया गया तथा विभिन्न लाभार्थियों से संपर्क कर धरातल को भी परखा गया। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि “प्रदेश वही है, तंत्र वही है बस सरकार बदलने से बदलाव हुआ है और प्रदेश बीमारू प्रदेश से देश का ग्रोथ इंजन बन रहा है, आज प्रदेश श्रम शक्ति से अर्थ शक्ति बने की ओर अग्रसर है।
भाजपा का दावा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में, सबका साथ सबका विकास की नीति व अपराध पर जीरो टालरेंस की नीति को सफलता के साथ पूरा किया जा रहा है। अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करते हुए 222 दुर्दांत अपराधियों का एनकाउंटर किया गया और 930 से अधिक अपराधियों के खिलाफ एरनएसए की कार्यवाही हो चुकी है।

मुख्यमंत्री योगी की बुलडोजर बाबा की छवि प्रदेश की जनता को पसंद है। अब तो अन्य राज्यों में भी लोग “मुख्यमंत्री हो तो योगी जैसा” की बात करने लगे हैं। प्रदेश के अपराधियों में भय का वातावरण उत्पन्न हुआ है क्योंकि अपराधी अगर अपराध करके दूसरे राज्यों में भागकर संरक्षण प्राप्त करने का प्रयास करता है तब भी वह बच नहीं पा रहा है । बेहतर होती कानून व्यवस्था के कारण प्रदेश के हर क्षेत्र में सर्वांगीण विकास में योगदान देने के लिए राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय निवेशक आकर्षित हो रहे हैं। प्रदेश में सांप्रदायिक दंगे नहीं होते, जिससे हिंदू व मुसलमान दोनों ही सुरक्षित महसूस करते हैं। प्रदेश में लव जिहाद व धर्मांतरण जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कानून बनाये गये हैं। प्रदेश में परीक्षाओं में होने वाली नकल को रोकने के लिए भी प्रभावी कानून बनाया गया है जिसका प्रभाव भी दिख रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में सनातन की पुनर्प्रतिष्ठा हो रही है। अयोध्या में प्रभु राम की जन्मस्थली पर दिव्य भव्य मंदिर का उदघाटन संपन्न होने, काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का निर्माण होने और अब प्रयागराज में महाकुंभ -2025 के सफल आयोजन से सनातन धर्मियों के बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता बढ़ी है। आस्था के केन्द्रों के विकास के कारण प्रदेश में तीर्थाटन के लिए आने वालों की संख्या में रिकार्ड वृद्धि हो रही है । अयोध्या, काशी, मथुरा सहित अन्य सभी धार्मिक स्थलों ने घरेलू पर्यटन के क्षेत्र में प्रदेश को बड़ी बढ़त दिलाई है। वर्ष 2024 में प्रदेश में 64.90 करोड़ पर्यटकों का आगमन हुआ जिसके अंतर्गत विदेशी पर्यटकों की संख्या में 6.67 लाख थी। प्रदेश में धार्मिक पर्यटन सहित पर्यटन की अन्य संभावनाओं का भी विकास किया जा रहा है।

एक जिला -एक उत्पाद योजना की ही तरह एक जिला एक पर्यटन स्थल का भी विकास किया जा रहा है। जैसे सीतापुर जिले में नैमिषारण्य, लखनऊ में चंद्रिका देवी मंदिर तथा पुराना हनुमान मंदिर, बाराबंकी में लोधेश्वर महादेव। मीरजापुर जिले में स्थित मां विन्ध्यवासिनी धाम में भी कारिडोर का निर्माण कार्य प्रगति पर है। अयोध्या व काशी के बाद मथुरा वृंदावन के वृहद स्तर पर विकास की बात मुख्यमंत्री जी सदा करते हैं। इस कार्य को सही रूप से पूर्ण करने के के लिए श्री अयोध्या जी तीर्थ विकास परिषद, श्री देवीपाटन तीर्थ विकास परिषद, उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद, श्री विन्ध्य धाम तीर्थ विकास परिषद, चित्रकूट धाम तीर्थ विकास परिषद एवं नैमिषारण्य धाम तीर्थ विकास परिषद का गठन किया गया है ।

प्रदेश में एक्सप्रेस -वे बन रहे हैं और फिर उसी गति से अंतर्जनपदीय सड़कों का भी निर्माण हो रहा है। 8 वर्षों में प्रति व्यक्ति आय 46 हजार से बढ़कर 1लाख 24 हजार हो गयी है। अब प्रदेश में आयुध निर्माण भी होने लगा है। महिला, किसान, छात्र, युवा सभी वर्ग के लोग सरकारी योजनाओं से सीधे लाभान्वित हो रहे हैं। प्रदेश में 8 वर्षे में पौधरोपण अभियान भी व्यापक पैमाने पर चल रहा है जिसके अंतर्गत अब तक 204 करोड़ पौधरोपण हो चुका है जिसका असर यह हुआ है कि 2 लाख एकड़ में हरीतिमा बढ़ी। प्रदेश सरकार सामाजिक सरोकारों में अग्रणी है जिसके अंतर्गत अनाथ परिवारों की सहायता की जा रही है। प्राकृतिक आपदाओं में भी सरकार भरपूर सहायता उपलब्ध करा रही है।
उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बनने की और अग्रसर है जो जीरो पावर्टी स्टेट यानि गरीबी मुक्त प्रदेश होगा। प्रदेश में 15 करोड़ नागरिकों को निशुल्क राशन का वितरण किया जा रहा है।60 लाख माताओं को प्रधानमंत्री मातृ वंदना सहायता का लाभ मिल रहा है। 1 करोड़ परिवारों को घरौनी प्रमाणपत्र मिलने से गांवों में जमीन संपत्ति संबंधी विवादों का निपटारा हो रहा है।

युवाओं को बड़ी संख्या में रोजगार उपलब्ध होने के कारण बेरोजगारी की दर मात्र 3 प्रतिशत रह गई है। केंद्र सरकार की कई जनकल्याणकारी योजनाओं को क्रियान्वित करने में प्रदेश नंबर बन चुका है, इनमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत योजना में सबसे अधिक आयुष्मान कार्ड बने हैं, प्रधामनंत्री आवास योजना के सर्वाधिक लाभर्थी उत्तर प्रदेश से हैं।स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत देश में सबसे अधिक 2.75 करेड से अधिक शौचालय बने। कौशल विकास नीति को लागू करनेवाला देश का प्रथम राज्य यूपी बना है।खाद्यान्न, दूध, आलू आंवला, आम, गन्ना, चीनी और एथेनाल उत्पादन में प्रदेश नंबर वन बन चुका है।400 लाख टन सब्जियों का उत्पादन कर यूपी देश में प्रथम स्थान पर है। एक जिला एक मेडिकल कॉलेज के अंतर्गत प्रदेश के सभी 80 जिलों में मेडिकल कालेज का संचालन किया जा रहा है।

आज प्रदेश में सर्वाधिक एयरपोर्ट हैं । 2017 से पूर्व किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि अयोध्या व श्रावस्ती में भी भव्य एयरपोर्ट बन सकता है किंतु अब एअरपोर्ट कार्य कर रहे है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि अब प्रदेश बेहतर कानून व्यवस्था के बल पर सभी क्षेत्रों मे प्रगति के पथपर अग्रसर हो रहा है। यूपी देश की बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। प्रदेश में गुलामी के प्रतीकों का महिमामंडन नहीं होता अपितु प्रदेश की योजनाओं का नामकरण महापुरुषों के नाम पर किया जा रहा है।
महाकुंभ 2025 के सफल आयोजन के बाद तो यूपी सरकार की प्रतिष्ठा पुरे विश्व में बढ़ गई है। प्रदेश में सांस्कृतिक पुनर्जागरण की गूंज सुनाई दे रही है और निस्संदेह इसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूमिका अत्यंत मतवपूर्ण है। योगी जी के नेतृत्व में प्रदेश अभ्युदय काल देख रहा है।

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भारत और मॉरीशस – प्रगाढ़ होते सम्बन्ध https://visionviksitbharat.com/india-and-mauritius-deepening-relations/ https://visionviksitbharat.com/india-and-mauritius-deepening-relations/#respond Sun, 16 Mar 2025 05:13:06 +0000 https://visionviksitbharat.com/?p=1413   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीन रामगुलाम ने अपने देश का सर्वोच्च सम्मान “द ग्रैंड कमांडर आफ द आडर आफ द स्टार एंड की ऑफ द इंडियन…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीन रामगुलाम ने अपने देश का सर्वोच्च सम्मान “द ग्रैंड कमांडर आफ द आडर आफ द स्टार एंड की ऑफ द इंडियन ओशन“ से सम्मानित किया। मॉरीशस का सर्वोच्च नागरिक सम्मान स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उन भारतीयों का सम्मान है जिन्होंने पीढ़ी दर पीढ़ी इस धरती की सेवा की और मॉरीशस को इस ऊंचाई पर लेकर आए।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय मॉरीशस की यात्रा संपन्न हो चुकी है जो कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण रही है, इस यात्रा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मॉरीशस के 57वें राष्ट्रीय दिवस पर मुख्य अतिथि रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मॉरीशस यात्रा का महत्व इस बात से ही समझा जा सकता है पोर्ट लुई एयरपोर्ट पर उनके स्वागत के लिए वहां का उच्च नेतृत्व अपने दलबल के साथ उपस्थित रहा। प्रधानमंत्री के मॉरीशस एयरपोर्ट पहुंचने पर भारतीय समुदाय की महिलाओं ने “गीत गवई” नामक पारपंरिक बिहारी सांस्कृतिक प्रस्तुति के माध्यम से उनका स्वागत किया गया।
भारत और मॉरीशस के मध्य सम्बंध वैसे तो लम्बे समय से हैं किंतु 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राजग गठबंधन की सरकार आने के बाद से ये संबंध निरंतर प्रगाढ़ हो रहे हैं। भारत और मारीशस के मध्य सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, आध्यात्मिक संबंध सदा रहे हैं जिनमें अब आर्थिक, सामरिक व रणनीतिक पक्ष भी जुड़ गए हैं। भारत और विशेष रूप से प्रधानमंत्री मोदी मॉरिशस के साथ अपने संबंधों को कितना महत्व देते है इसका पता इसी बात से चलता है कि प्रधानमंत्री मोदी 2015 में भी मॉरीशस राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए थे। भारत की वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 2024 में मारीशस के राष्ट्रीय दिवस की मुख्यअतिथि बनीं। 2014, 2019 और 2024 में मारीशस के प्रतिनिधि नरेन्द्र मोदी जी के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने आए थे। नई दिल्ली में आयोजित जी -20 शिखर सम्मेलन में मॉरीशस एक “विशेष आमंत्रित सदस्य“ था। इस अवसर पर मॉरीशस ने भारत व अन्य देशों के साथ मिलकर वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन का शुभारंभ किया था।
इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीन रामगुलाम ने अपने देश का सर्वोच्च सम्मान “द ग्रैंड कमांडर आफ द आडर आफ द स्टार एंड की ऑफ द इंडियन ओशन“ से सम्मानित किया। मॉरीशस का सर्वोच्च नागरिक सम्मान स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उन भारतीयों का सम्मान है जिन्होंने पीढ़ी दर पीढ़ी इस धरती की सेवा की और मॉरीशस को इस ऊंचाई पर लेकर आए।भारत और मॉरीशस के संबंध कितने पुराने और प्रगाढ़ है इस बात का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि 12 मार्च का दिन वही दिन है जब महात्मा गांधी ने गुलामी के खिलाफ दांडी सत्याग्रह प्रारम्भ किया था।प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में याद दिलाया कि जब अयोध्या के राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा हो रही थी तब मॉरीशस में भी आस्था और भावना का प्रबल ज्वार दिखाई पड़ रहा था। मॉरीशस सरकार ने उस दिन आधे दिन का अवकाश घोषित किया था जिससे लोग प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम सीधा देख सकें । अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने इस वर्ष घोषित मखाना बोर्ड का भी उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब भी विदेश यात्रा पर जाते है तो वहां निवास करने वाले भारतीय मूल के समुदाय को संबोधित करते हुए सांस्कृतिक ,सामाजिक व आत्मीय संबंधो को और मजबूत करने का प्रयास करते हैं जिसका व्यापक प्रभाव दोनों देशों के संबंधों पर भी पड़ता है। प्रधानमंत्री मोदी ने मॉरीशस में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि यहां की मिट्टी में, हवा में, पानी में अपनेपन का एहसास है। उन्होंने वहां उपस्थित समुदाय को भोजपुरी भाषा में भी संबोधित किया क्योंकि मॉरीशस में भारी संख्या में भोजपुरी बोलने वाले बिहारी लोग निवास करते हैं। प्रधानमंत्री के संबोधन के बीच उपस्थित जनसमुदाय भी मोदी- मोदी के नारे लगा रहा था।
रणनीतिक, कूटनीतिक और सामरिक दृष्टिकोण से मॉरीशस के साथ मजबूत रिश्ते भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यह एक ऐसा पुल है जो भारत को ग्लोबल साउथ से जोड़ता है। भारत और मॉरीशस के रिश्तों के मध्य हिंद महसागर में आपसी साझेदारी बढ़ाना मुख्य उददेश्य है।यह भारतीय सुरक्षा रणनीति का ही हिस्सा रहा है कि चागोस द्वीप पर मारीशस का समर्थन किया है क्योंकि यह विउपनिवेशकरण का हिस्सा है जो भारत की विदेश नीति का अहम् पक्ष है। चागोस द्वीप को लेकर ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच 50 वर्षों से विवाद चल रहा था और 5 माह पूर्व भारत के सहयोग से ही समझौता हुआ है।
इस बार भारत और मॉरीशस के मध्य कुल आठ समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने मॉरीशस के साथ संबंधों को और प्रगाढ़ करने के लिए मॉरिशस के नये संसद भवन का निर्माण भारत के सहयेग से संपन्न करवाने की घोषणा करी है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनरामचंद्र रामगुलाम के मध्य द्विपक्षीय स्तर की वार्ता हुई जिसमें दोनों नेताओं ने पारस्परिक संबंधों को बढ़ाने के लिए नये मार्ग खोजने पर भी विचार विमर्श किया।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत मारीशस संबंध केवल हिंद महासागर से नहीं अपितु हमारी साझी सांस्कृतिक परंपराओं ओैर मूल्यों से भी जुड़े हैं। हम आर्थिक और सामाजिक प्रगति की राह पर एक-दूसरे के साथी हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि अगले 5 वर्षो में भारत में 500 सिविल सर्वेंट को प्रशिक्षित किया जायेगा। साथ ही भारत और मॉरीशस के मध्य स्थानीय करेंसी पर व्यापार करने में सहमति बन चुकी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी यात्रा के दौरान मॉरिशस के प्रधानमंत्री नवीनरामचंद्र रामगुलाम जी व उनके परिवार को अमूल्य उपहार भेंट किये। वहीं उन्होंने प्रयागराज महाकुंभ का पवित्र जल भी भेंट किया। यह पवित्र जल वहां 1972 में बनाये गये गंगा तालाब में विधिवत पूजा अर्चना के बाद मिलाया गया जिसके बाद मॉरीशस के वे लोग जो महाकुंभ नहीं आ सके अब उस पवित्र गंगा तालाब में स्नान कर पुण्य प्राप्त कर सकेंगे। मॉरिशस का गंगा तालाब एक प्रसिद्ध संत द्वारा निर्मित किया गया है जहाँ भगवान गणेश ,शिव जी सहित हिंदू देवी“ देवताओं के मंदिर स्थित हैं । कुम्भ जल मिलने के बाद से इस स्थान की महत्ता और अधिक बढ़ गई है।
सांस्कृतिक, सामरिक, रणनीतिक सभी दृष्टियों से प्रधानमंत्री मोदी की मॉरीशस की यह यात्रा अब तक की सबसे सफल यात्रा कही जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

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सनातन, आस्था व विकास को समर्पित योगी सरकार का बजट https://visionviksitbharat.com/yogi-governments-budget-dedicated-to-sanatan-faith-and-development/ https://visionviksitbharat.com/yogi-governments-budget-dedicated-to-sanatan-faith-and-development/#respond Mon, 24 Feb 2025 11:02:51 +0000 https://visionviksitbharat.com/?p=1259   अयोध्या में पर्यटन अवस्थापना विकास के लिए 150 करोड़ रु. का प्रावधान किया गया है। इसी तरह मथुरा में 125 करोड़ नैमिषारण्य मे 100 करोड़ चित्रकूट में 50 करोड़…

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अयोध्या में पर्यटन अवस्थापना विकास के लिए 150 करोड़ रु. का प्रावधान किया गया है। इसी तरह मथुरा में 125 करोड़ नैमिषारण्य मे 100 करोड़ चित्रकूट में 50 करोड़ खर्च करने का प्रावधान किया गया है। मिर्जापुर में मां विन्ध्यवासिनी मंदिर,मां अष्टभुजा मंदिर मां काली खोह मंदिर के परिक्रमा पथ व जनसुविधा स्थलों का विकास किया जायेगा। संरक्षित मंदिरो के जीर्णोद्वार के लिए 30 करोड़, महाभारत सर्किट के पर्यटन विकास के लिए 10 करोड़, जैन सर्किट के विकास के लिए भी धन उपलब्ध कराया गया है।

 

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने वर्ष 2025 -26 के लिए सनातन को समर्पित करते हुए सामाजिक सरोकारों वाला व्यापक बजट प्रस्तुत किया है जिसमें समाज के प्रत्येक वर्ग तथा जीवन के हर क्षेत्र का ध्यान रखा गया है। सर्वसमावेशी होने के कारण छात्र, किसान, व्यापारी, महिलाएं, विषय विशेषज्ञ और उद्योगपति सभी इस बजट की सराहना कर रहे हैं। बजट में धर्मस्थलों के विकास व पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त धन दिया गया है। प्रदेश सरकार के बजट में हर उस क्षेत्र तक पहुंच बनाने का प्रयास किया गया है जो आर्थिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। बजट में अयोध्या, मथुरा, नैमिषारण्य और चित्रकूट जैसे धार्मिक स्थलों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
प्रदेश के वित्तमंत्री सुरेश खन्ना ने बजट भाषण का प्रारम्भ महाकुंभ के आयोजन से किया और फिर धर्मस्थलों के विकास के लिए अपना खजाना खोल दिया।

श्री काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर व मां विन्ध्यवासिनी कॉरिडोर की स्थापना के बाद सरकार मथुरा में श्री बांकेबिहारी जी महाराज मंदिर, मथुरा -वृंदावन कॉरिडोर का निर्माण करायेगी। इसके लिए भूमि उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 100 करोड़ और निर्माण के लिए 50 करोड़ रु. का प्रावधान किया गया है। नैमिषारण्य में वेद विज्ञान केंद्र की स्थपना के लिए 100 करोड़ रु. खर्च किये जायेंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए पहले ही 25 करोड़ बजट के साथ पांच एकड़ भूमि आवंटित की जा चुकी है। इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के केंद्र में वैदिक पर्यावरण, वैदिक गणित, वैदिक विधिशास्त्र, वैदिक योग विज्ञान, वैदिक वन औषधियां वनस्पति आदि पाठ्यक्रम होंगे। यहां पर बड़े वैदिक पुस्तकालय का भी निर्माण कराया जाएगा, साथ ही वेदशाला,वैदिक संग्रहालय, तारा मंडल, संगोष्ठी कक्ष बनाये जाएंगे। केंद्र में गुरुकुल व आधुनिक पद्धति के अंतर्गत कक्षाएं बनायी जायेंगी।

मुख्यमंत्री पर्यटन स्थल विकास योजना के तहत 400 करोड़ रु.खर्च किये जायेंगे। अयोध्या में पर्यटन अवस्थापना विकास के लिए 150 करोड़ रु. का प्रावधान किया गया है। इसी तरह मथुरा में 125 करोड़ नैमिषारण्य मे 100 करोड़ चित्रकूट में 50 करोड़ खर्च करने का प्रावधान किया गया है। मिर्जापुर में मां विन्ध्यवासिनी मंदिर,मां अष्टभुजा मंदिर मां काली खोह मंदिर के परिक्रमा पथ व जनसुविधा स्थलों का विकास किया जायेगा। संरक्षित मंदिरो के जीर्णोद्वार के लिए 30 करोड़, महाभारत सर्किट के पर्यटन विकास के लिए 10 करोड़, जैन सर्किट के विकास के लिए भी धन उपलब्ध कराया गया है। विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए भी धन का प्रावधान किया गया है।गुरुस्वामी हरिदास की स्मृति में अंतरराष्ट्रीय संगीत समारोह के लिए एक करोड़ और अयोध्या में जिला स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय के लिए भी एक करोड़ की धनराशि रखी गई है।योगी सरकार ने वर्तमान बजट से धार्मिक पर्यटन के माध्यम से सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की लौ प्रदीप्त की है।
बजट में महापुरुषों पर भी ध्यान दिया गया है जिसके अंतर्गत बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर के नाम पर लखनऊ में स्मारक और सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही हर जिले में 100 एकड़ में पीपीपी मॉडल पर सरदार पटेल जनपदीय आर्थिक क्षेत्र स्थापित किया जायेगा। संत कबीर के नाम पर 10 वस्त्रोद्योग पार्क तथा संत रविदास के नाम पर दो चर्मोद्योग स्थापित किये जाएंगे।

पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेयी के जन्म शताब्दी वर्ष में उनके सम्मान में नगरीय क्षेत्रों में पुस्तकालय की स्थापना की जाएगी।लखनऊ स्थित अटारी कृषि प्रक्षेत्र पर 251 करोड़ रु. की लागत से पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चरण सिंह के नाम पर सीड पार्क की स्थापना होगी।प्रत्येक कृषि मंडी में माता शबरी के नाम पर कैंटीन और विश्रामालाय स्थापित किये जायेंगे।बजट में युवाओं और छात्राओं को आकर्षित करने के लिए भी प्रावधान किये गये हैं। अब प्रदेश की हर मेधावी छात्रा को स्कूटी दी जायेगी छात्राओं के लिए 400 करोड़ रु. रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना का ऐलान किया गया है। यही नही माता अहिल्याबाई होल्कर के नाम पर श्रमजीवी महिलाओं के लिए छात्रावास भी बनेंगे।

प्रदेश के बजट में युवा उद्यमी अभियान के लिए भी 1000 करोड़ रु. का प्रावधान किया गया है।संपूर्ण उत्तर प्रदेश के व्यापक विकास का विस्तृत खाका बजट में रखा गया है।बजट के अनुसार अवध में केवल अयोध्या का ही विकास नहीं हो रहा अपितु अवध के हर जिले के विकास की अद्भुत पटकथा लिखी जायेगी।बजट के प्रावधान इस प्रकार से बनाये गये हैं कि एक प्रकार से यह आगामी 25 वर्षों के विकास का रोडमैप प्रस्तुत कर रहा है।

उत्तर प्रदेश में चार नए एक्सप्रेस वे के निर्माण से तीन तीर्थस्थलों काशी, प्रयागराज व हरिद्वार की यात्रा सरल हो जायेगी।चार नए एक्सप्रेस वे के लिए बजट में 1,050 करोड़ रु. की व्यवस्था कर दी गई है। गंगा एक्सप्रेस वे को प्रयागराज, मिर्जापुर , वाराणसी, चंदौली होते हुए सोनभद्र से जोड़ने के लिए विन्ध्य लिंक एक्सप्रेस वे का निर्माण किया जायेगा।इससे इस क्षेत्र के विकास की गति दोगुनी हो जायेगी व धार्मिक पर्यटन और बढ़ेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह युवाओं को रोजगार देने वाला बजट है।बजट में एमएसएमई, नई तकनीक, एआई व साइबर सुरक्षा का भी ध्यान रखा गया है।नए एक्सप्रेस- वे बनने से दूर की यात्रा आसान होगी।नए एक्सप्रेस वे बनने से व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।एआई सिटी बनाने की घोषणा से स्टार्टअप और आईटी उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।प्रदेश का बजट इंफ्रास्टक्चर को बढ़ावा देने के साथ बेरोजगारों को रोजगारपरक बनाने वाला बजट है। यह बजट राज्य की तकनीकी प्रगति औद्योगिक विकास और स्वास्थ्य अवसंरचना के लिए प्रतिबद्धता को दर्शा रहा है। प्रदेश के बजट में सड़क राजमार्ग के चौड़ीकरण पर भी पर्याप्त फोकस किया गया है। इसका सर्वाधिक लाभ राजधानी लखनऊ व उसके आसपास के जिलों व कस्बों आदि को मिलेगा ।मोहनलालगंज -गोसाईगंज होते हुए पूर्वांचल एक्सप्रेस- वे निकल रहा है इसका चौड़ीकरण किया जायेगा। इसी तरह बनी से ही एक रोड हरौनी होते हुए मोहन को निकली है इसे भी दो लेन का किया जायेगा।
यह बजट समग्र विकास वाला बजट है। इसमें किसानों, उद्यमियों, महिलाओं और युवाओं के लिए अनेक प्रावधान किये गये हैं। बजट में कोरोना काल में अनाथ 1430 बच्चों को आर्थिक सहायता प्रादन करने के लिए 250 करोड़ रु. का प्रावधान किया गया है। बजट में सात सरोकारों पर्यावरण संरक्षण ,नारी सशक्तीकरण, जल सरंक्षण, सुशिक्षित समाज, जनसंख्या नियोजन, स्वस्थ समाज, गरीबी उन्मूलन पर भी ध्यान दिया गया है।पर्यावरण संरक्षण के लिए बजट का 23 प्रतिशत हिस्सा पर्यावरण अनुकूलन पहली पर खर्च किया जायेगा।

सरकार वनीकरण, कार्बन अवशोषण और पयार्वरण एवं प्राकृतिक संसाधनों के सरंक्षण को और अधिक बढ़ावा देने जा रही है।इसी प्रकार सुशिक्षित समाज के अंतर्गत शिक्षा क्षेत्र पर कुल बजट का 13 प्रतिशत हिस्सा खर्च किया जायेगा।इसी प्रकार स्वस्थ समाज के लिए कुल बजट का छह प्रतिशत हिस्सा स्वास्थ्य क्षेत्र पर खर्च होगा। प्रदेश में जलसंरक्षण को बढ़ावा देने के लिए 4500 करोड़ रु. की व्यवस्था की गई है। इसके अंतर्गत वर्षा जल संचयन एवं भूजल संवर्धन के लिए 90 करोड़ रु. की व्यवस्था प्रस्तावित है।इसमें तालाबों का जीर्णोद्धार तथा निर्माणा भी शामिल है। जनसंख्या नियोजन के अंतर्गत युवाओं को नवाचार से जोड़ने के लिए इनोवेशन फंड स्थापित किया जा रहा है। गरीबी उन्मूलन के लिए भी 250 करोड़ रु. की व्यवस्था प्रस्तावित है। बजट में सभी मंडल मुख्यालयों पर विकास प्राधिकरणों ,नगर निकायों द्वारा कन्वेंशन सेंटर का निर्माण कराया जायेगा।ग्राम पंचायतों में वैवाहिक उत्सव एवं अन्य सामाजिक आयोजनों के लिए उत्सव भवन निर्माण की कार्ययोजना पर भी कार्य किया जायेगा।

यह बजट सभी वर्गो के लिए है अर्थात समग्रता पर आधारित है जिससे इसकी छाप वैश्विक होने जा रही है । प्रदेश की सुदृढ़ होती कानून -व्यवस्था से देश विदेश के निवेशक भी अब आकर्षित हो रहे हैं तथा प्रदेश में भारी निवेश भी हो रहा है। प्रदेश सरकार ने वर्तमान बजट से 2050 तक का लक्ष्य साधने का प्रयास किया है यही कारण है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद यह अब तक का सबसे बड़ा बजट है जिसका सीधा अर्थ यह हे कि विकास का लक्ष्य और पैमाना बहुत बड़ा है। यह तुष्टिकरण वाला बजट नहीं अपितु सभी के संतुष्टिकरण वाला बजट है।

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समान नागरिक संहिता लागू करने वाला प्रथम राज्य बना उत्तराखंड https://visionviksitbharat.com/uttarakhand-became-the-first-state-to-implement-the-uniform-civil-code/ https://visionviksitbharat.com/uttarakhand-became-the-first-state-to-implement-the-uniform-civil-code/#respond Sat, 15 Feb 2025 06:01:25 +0000 https://visionviksitbharat.com/?p=1173 देवभूमि उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है। वर्ष 2022 में उत्तराखंड विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा ने राज्य में सत्ता में आने…

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देवभूमि उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है। वर्ष 2022 में उत्तराखंड विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा ने राज्य में सत्ता में आने पर समान नागरिक संहिता लागू करने का संकल्प लिया था। मुख्यमंत्री बनते ही अपने मंत्रिपरिषद की पहली बैठक में पुष्कर सिंह धामी ने समान नागरिक संहिता के प्रस्ताव तथा उसके लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन करने की अनुमति दी थी। उत्तराखंड विधानसभा में यह विधेयक पारित हो जाने के बाद 27 जनवरी 2025 को यह कानून लागू हो गया है। कानून के क्रियान्वयन के लिए एक पोर्टल भी लांच किया गया है जिसमें सभी दिशा निर्देश जारी किये गये हैं । समान नागरिक संहिता कानून लागू होने के कारण राज्य में व्यापक बदलाव होने जा रहा है । यह कानून महिला सुरक्षा को व्यापक स्तर पर प्राथमिकता दे रहा है। यह कानून अनुसूचित जातियों/जनजातियों को छोड़कर संपूर्ण उत्तराखंड राज्य तथा राज्य से बाहर रहने वाले उत्तराखंड के समस्त निवासियों पर लागू होगा।

पोर्टल लांच करते समय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कानून में किसी भी धर्म की मूल मान्यताओं और प्रथाओं को समाप्त नहीं किया गया है। इस कानून द्वारा सभी लोगों के लिए शादी, तलाक और उत्तराधिकार के नियमों को समान किया गया है। सभी धर्म के लोग अपने- अपने रीति रिवाज के अनुसार शादी कर सकते हैं।

स्वाभाविक रूप से कांग्रेस के नेतृत्व वाली सेक्युलर ताकतों तो यह कानून पसंद नहीं आ रहा है,वहीं कुछ मुस्लिम कट्टरपंथी संगठन इस कानून को कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अनेक अवसरों पर समान नागरिक संहिता कानून की बात रख चुके हैं।स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से संबोधन तथा संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण का जवाब देते हुए भी प्रधानमंत्री मोदी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए प्रतिबद्धता जता चुके है और उत्तराखंड के माध्यम से यह पहल आगे बढ़ रही है। समान नागरिक संहिता लागू हो जाने के बाद सभी धर्म, जाति व पंथ के लोगों को समान अधिकार मिलने प्रारम्भ हो जायेंगे। इस कानून में महिलाओं को विशिष्ट लाभ प्राप्त होगा।

मुस्लिम तुष्टिकरण की विकृत राजनीति के चलते कांग्रेस ने सदा समान नागरिक संहिता का विरोध किया। अगर कांग्रेस में इच्छाशक्ति होती तो यह कानून पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू जी के समय में ही लागू हो गया होता किंतु वह मुस्लिम तुष्टिकरण में इतने डूब चुके थे कि उन्हें पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय डॉ. राजेंद्र प्रसाद सहित कई कांग्रेसी नेताओं के विचार अच्छे नहीं लगे। यहां तक कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर भी संविधान में ही समान नागरिक संहिता को रखने के प्रबल पक्षधर थे और इन्हीं सब मुद्दों के कारण डॉ.अम्बेडकर और नेहरू जी के मध्य विवाद था।
उत्तराखंड विधानसभा द्वारा पारित विधेयक चार खंडों में विभाजित है। पहला खंड – यूजीसी की धाराओं के उल्लंघन पर छह माह तक कारावास व 50 हजार रूपये जुर्माने की व्यवस्था की गई है। विवाह विच्छेद के मामलों में तीन वर्ष का कारावास रखा गया है। पुनर्विवाह के लिए तय नियम के उल्लंघन पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना व छह मास तक के कारावास का प्रबंध किया गया है।

महिलाओं को समान अधिकार- संपत्ति में सभी धर्मों की महिलाओं को समान अधिकार दिया गया है। सभी जीवित बच्चे पुत्र अथवा पुत्री संपत्ति में बराबर के अधिकारी बनाये गये हैं।अगर कसी व्यक्ति की वसीयत नहीं है और उसकी कोई संतान अथवा पत्नी नहीं है तो उत्तराधिकार के लिए रिश्तेदारों को प्राथमिकता दी गई है।

समान नागरिक संहिता का तीसरा खंड अत्यंत विशिष्ट है। जिसमें आजकल प्रचलन में आए लिव इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है । लिव इन में पैदा हुए बच्चे को भी वैध संतान माना गया है।अब नये कानून के अंतर्गत लिव इन रिलेशनशिप को कोई भी पक्ष समाप्त भी कर सकता है। यदि किसी भी धर्म का कोई पुरुष अपनी पत्नी को छोड़ देता है तो वह उसे भरण पोषण की मांग कर सकती है। किसी एक पक्ष के नाबालिग अथवा विवाहित होने पर लिव इन की अनुमति नही दी जाएगी।

उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता विधेयक में पति की क्रूरता और विवाहेत्तर संबंधों पर पत्नी को भी तलाक का अधिकार दिया गया है।प्रस्तावित कानूनों के अंतर्गत नपुंसकता या जानबूझकर यौन संबंध नहीं बनाने पर विवाह शून्य हो जायेगा। समान नागरिक संहिता में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस अधिनियम के अलावा किसी अन्य प्रथा/ परंपरा के अंतर्गत तलाक मान्य नहीं होगा। किसी प्रथा रूढ़ी या परंपरा के तहत तलाक देने पर तीन साल की जेल और सजा का प्रावधान भी किया गया है। पूर्व की पत्नी होने के बावजूद पुनर्विवाह करने पर तीन वर्ष की जेल एक लाख रुपये तक जुर्माना और सजा भी बढ़ाई जा सकती है।

यह कानून उत्तराखंड के सभी नागरिकों को समान अधिकार और अवसर देगा, विशेषकर उन महिलाओं के सम्मान व अधिकार की रक्षा होगी जिन परंपराओें में पुरुष वर्चस्व का चलन है। देवभूमि उत्तराखंड की मुस्लिम महिलाओं को अब तीन तलाक, बहुविवाह और हलाला जैसी बर्बर प्रथाओं से मुक्ति मिलेगी। लिव इन रिलेशनशिप को लेकर जो व्यवस्था समान नागरिक संहिता में की गई है उससे लव जिहाद में फंसकर अपने प्राणों तक की आहुति देने वाली बेटियों को भी एक बड़ा सुरक्षा कवच मिल गया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कई अवसरों पर माना और कहा कि केंद्र सरकार को एक समान नागरिक संहिता लानी ही चाहिए और जिसे उत्तराखंड की सरकार ने पूर्ण कर दिखाया है।उत्तराखंड विधानसभा से समान नागरिक संहिता विधेयक पारित हो जाने के बाद अब उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश आदि अनेक प्रांतों ने भी इसे लागू करने की तैयारी प्रारम्भ कर दी है।

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता कानून को यूनिफार्म की बजाय कॉमन सिविल कानून नाम दिया गया है। यह एक प्रगतिशील कानून है। इस कानून का एकमात्र उद्देश्य महिलाओं और बाल अधिकारों को सुरक्षित करना है। यह कानून लोगों के अधिकार छीनने का नहीं अपितु लोगो को अधिकार देने से सम्बंधित है।यह कानून सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस कानून से विभिन्न धर्मों के वैवाहिक रीति –रिवाजों पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। ज्ञातव्य है कि समान नागनिक संहिता के विरोधी इसे बढ़ा चढ़ाकर अपने हिसाब से प्रस्तुत कर रहे हैं। इस कानून के अंतर्गत मुसलमानों में निकाह, सिखों में आनंद कारज, हिंदुओं में अग्नि के समक्ष फेरे और ईसाई की विवाह अपनी -अपनी मान्यताओं के अनुसार ही होते रहेंगे।

उच्चतम न्यायालय ने कई अवसरों पर समान नागरिक संहिता लागू करने पर बल दिया है सन 1973 में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश एम. एच. बेग ने बहुविवाह जैसी कुप्रथा पर रोक लगाने और तलाक के मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप की सिफारिश की थी। केरल उच्च न्यायालय के जज वी. खालिद ने भी मार्च 1973 में मुसलमानों से अनुरोध किया था कि वह महिला अधिकारों की दिशा में सुधार पर ध्यान दें। 10 मई 1995 को उच्चतम न्यायालय ने तत्कालीन प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिंह राव से अनुच्छेद 44 पर पुनर्विचार करने को कहा था उस खंडपीठ में न्यायाधीश कुलदीप सिंह और आरएम सहाय शामिल थे।13 सितंबर 2019 को उच्चतम न्यायालय ने एक बार फिर समान नागरिक संहिता पर बल दिया। 11मई 1962 को कांग्रेस की राज्यसभा सांसद श्रीमती सीता परमानंद ने एक निजी विधेयक प्रस्तुत किया था जिसका शीर्षक था यूनिफार्म सिविल कोड फॉर कंट्री। 29 जुलाई 1986 को केंद्रीय विधि मंत्री हंसराज भारद्वाज ने वादा किया था कि समान नागरिक कानून के प्रस्ताव को लागू करने के लिए सरकार तीव्र गति से प्रयास कर रही है किंतु कांग्रेस यह वादा ही रह गया।

समान नागरिक कानून लागू हो जाने से सबसे अधिक सुरक्षा उन महिलाओं को प्राप्त होगी जो किसी न किसी कुप्रथा का शिकार हो रही थीं। इस कानून से लव जिहाद के माध्यम से होने वाले धर्मांतरण व अवैध गतिविधियों पर भी लगाम लग सकेगी। मुस्लिम समाज के लिए – समान नागरिक संहिता के अंतर्गत मुस्लिम समाज को अब चार शादी करने की छूट नहीं है और बिना तलाक दूसरी शादी भी नहीं हो सकती। सभी धर्मों में लड़कियों की विवाह करने की न्यूनतम आयु 18 और लड़कों की 21 वर्ष निर्धारित की गई है।

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भारत -अमेरिका मैत्री के नये युग का प्रारम्भ https://visionviksitbharat.com/a-new-chapter-of-india-usa-friendship-in-2025/ https://visionviksitbharat.com/a-new-chapter-of-india-usa-friendship-in-2025/#respond Sat, 15 Feb 2025 05:50:47 +0000 https://visionviksitbharat.com/?p=1170 पूरा विश्व जिन दो नेताओं की परस्पर भेंट की प्रतीक्षा कर रहा था, वह हो चुकी है, यानि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की…

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पूरा विश्व जिन दो नेताओं की परस्पर भेंट की प्रतीक्षा कर रहा था, वह हो चुकी है, यानि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भेंट। इस भेंट के साथ ही विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संबंधों तथा भारत और अमेरिका के मध्य द्विपक्षीय संबंधों को लेकर जो तरह- तरह के संदेह व्यक्त किये जा रहे थे वे भी दूर हो चुके हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय अमेरिका यात्रा और उनके परम मित्र अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी बहु प्रतीक्षित वार्ता भी संपन्न हो चुकी है। प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति की मित्रता किसी से छिपी नही है और इन दोनों के मिलने के बाद यदि कहीं सबसे अधिक घबराहट का वातावरण बना है तो वह डीप स्टेट है जो अमेरिका में बैठकर भारत विरोधी गतिविधियों का संचालन करता रहा है। दूसरे नंबर पर पाकिस्तान है जहां भारत विरोधी आतंकवादी गतिविधियां बेधड़क संचालित हो रही हैं। मोदी – ट्रम्प के मिलने से जो व्यक्तिगत रूप से घबरा रहा होगा वो बांग्लादेश का नया तानाशाह मोहम्मद यूनुस है, जिसके शासनकाल में अल्पसंख्यक हिंदुओं तथा राजननैतिक विरोधियों पर घोर अत्याचार हो रहा है। बांग्लादेश का भाग्य अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर छोड़ दिया है।

नरेन्द्र मोदी की इस अमेरिका यात्रा के दौरान भारत और अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए एकजुट हुए हैं जिसका उल्लेख साझा पत्रकार वार्ता में किया गया तथा पाकिस्तान,जैश- ए- मोहम्मद और लश्कर ए तैयबा जेसे खतरनाक आतंकवादी संगठनों का नाम भी लिया गया है । यह इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि पूर्ववर्ती बाइडेन प्रशासन ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में बहुत ही ढुलमुल रवैया अपनाया था।

प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा में एक अप्रत्याशित क्षण वह था जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ अपने गर्मजोशी भरे संबंधों को याद करते हुए अपनी भारत यात्रा पर लिखी एक पुस्तक भेंट की, उस समय भी ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक महान नेता बताया।

अमेरिकी राष्ट्रपति से मुलाकात के पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने अमेरिकी प्रशासन के कई महत्वपूर्ण लोगों के साथ बैठकें करीं जिनमें द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने तुलसी गबार्ड तथा एलन मस्क से लेकर अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइकल वाल्ट्ज तक से मुलाकात की। एलन मस्क के साथ जहाँ व्यापारिक हितों व समझौतों को लेकर वार्ता हुई, वहीं अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइकल वाल्ट्ज के साथ हुई बैठक में रक्षा ,तकनीक हस्तांतरण और सुरक्षा क्षेत्रों जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा हुई है। बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाल्ट्ज को “भारत का एक महान मित्र“ कहा है जिसके कई मायने निकाले जा रहे हैं। वाल्ट्ज के साथ हुई बैठक में दोनो देशों की वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा हुई है। इसमें रणनीतिक साझेदारी के साथ साथ आतंकवाद के खिलाफ लडाई, रक्षा औद्योगिक सहयोग और नागरिक परमाणु ऊर्जा पर बल दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिका में भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी के साथ भारत अमेरिका संबंधों इनोवेशन, बायो तकनीक और भविष्य को आकार देने में उद्यमिता की भूमिका पर गहन चर्चा हुई।

प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की वार्ता के बाद आयोजित साझी प्रेसवार्ता ने पूरे विश्व का ध्यान आकृष्ट किया जहाँ दोनों नेताओं की एक और एक ग्यारह वाली मित्रता एक बार फिर देखने को मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ने वर्ष 2030 तक व्यापार को 500 अरब डालर तक बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। वार्ता के दौरान रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया है जिसमें अमेरिका भारत को एफ- 35 लड़ाकू विमान बहुत जल्द देने पर सहमत हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने मुंबई हमले के सरगना तनव्वुर राणा को भारत भेजने के लिए अनुमति प्रदान कर दी है। साथ ही भारत, अमेरिका, आस्ट्रेलिया और जापान को मिलाकर 2017 मे बनाए गये क्वाड समूह को फिर मजबूत व सक्रिय करने पर बल दिया गया है। पत्रकार वार्ता में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहाकि भारत और अमेरिका के मध्य मित्रता बहुत मजबूत है इस समय दोनों देशों के सम्बन्ध सबसे अच्छे दौर में है। दोनों नेताओं ने कहा कि हम आतंकवाद के मुद्दे पर एक दूसरे के साथ दृढ़ता से खड़े हैं। दोनो नेताओं ने सीमा पार आतंकवाद के उन्मूलन के लिए ठोस कार्रवाई पर बल दिया। भारत और अमेरिका सबसे बेहतर व्यापार मार्ग के विकास के लिए संकल्पबद्ध दखे ओैर इसकी घोषणा भी कर दी गई है। यह व्यापार मार्ग भारत मध्य पूर्व- यूरोप आर्थिक गलियारा होगा जिसमें अमेरिका भी एक साझेदार होगा ।

स्पष्ट है कि अब भारत और अमेरिका के मध्य दोस्ती का एक नया दौर प्रारम्भ हो रहा है।आगामी समय में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भी भारत दौरे पर आने वाले हैं तब तक दोनों देशों के मध्य टैरिफ सहित विभिन्न विवादित मुद्दों का हल भी निकल आयेगा।

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स्पैडेक्स मिशन के साथ आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर भारत की अंतरिक्ष में लंबी छलांग https://visionviksitbharat.com/indias-giant-leap-towards-self-reliance-in-space-with-the-spadex-mission/ https://visionviksitbharat.com/indias-giant-leap-towards-self-reliance-in-space-with-the-spadex-mission/#respond Fri, 03 Jan 2025 09:05:39 +0000 https://visionviksitbharat.com/?p=570 स्पैडेक्स मिशन के साथ ही अब भारत डॉकिंग और अनडॉकिंग क्षमता प्रदर्शित करने वाला चौथा देश बनेगा। इस समय दुनिया के मात्र तीन देश अमेरिका , चीन और रूस के…

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स्पैडेक्स मिशन के साथ ही अब भारत डॉकिंग और अनडॉकिंग क्षमता प्रदर्शित करने वाला चौथा देश बनेगा। इस समय दुनिया के मात्र तीन देश अमेरिका , चीन और रूस के पास अंतरिक्ष यान को अंतरिक्ष में डॉक करने की क्षमता है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के नेतृत्व में अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत लगातार प्रगति के पथ पर बढ़ते हुए आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की ऐतिहासिक यात्रा 1962 में डा.विक्रम साराभाई के नेतृत्व में गठित भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति की स्थापना के साथ आरम्भ हुई । भारत के पहले साउंडिंग रॉकेट का प्रक्षेपण 1963 में केरल के थुंबा से हुआ था। इसरो के वर्तमान स्वरूप की स्थापना 15 अगस्त 1969 को हुई ओर इसरो का प्रथम उपग्रह आर्यभट्ट 1975 में यूएसएसआर से प्रक्षेपित किया गया। इसरो का प्रथम स्वदेशी उपग्रह एसएलवी -3 था जिसने 1980 में रोहिणी उपग्रह को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया। इसरो अपनी सफलता की यात्रा में अब तक 99 लांचिंग कर चुका है और कई कीर्तिमान स्थापित किये हैं। योजनानुसार आगे बढ़ते हुए इसरो वर्ष 2025 तथा आगे आने वाले वर्ष में वह करिश्मा करने जा रहा है जिससे पूरा भारत एक बार फिर गर्व का अनुभव करेगा।

संघर्षों को सफलता की गाथा

आरंभिक दिनों में धनी तथा वैज्ञानिक दृष्टि से आगे माने जाने वाले देशों द्वारा उपहास बनाए जाने, साईकिल व बैल गाड़ी पर लादकर रॉकेट के पुर्जे ले जाने, गरीबी के कारण अंतरिक्ष अनुसंधान पर खर्च को लेकर सवाल उठने के बाद भी भारतीय वैज्ञानिक कभी निराश नहीं हुए वह कठिन दौर अब बहुत पीछे छूट चुका है, आज चन्द्रमा पर शिव शक्ति बिंदु के रूप में तिरंगा फहरा रहा है । इसरो के वैज्ञानिकों की अडिग प्रतिबद्धता और दृढ़ता कभी डिगी नहीं, नवाचार, परिश्रम और राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पण से उन्होंने संघर्षों को सफलता की गाथा में बदल दिया।

भारत के वैज्ञानिकों ने सिद्ध कर दिया है कि संकल्प और दृष्टि के, साहसिक सपने साकार किए जा सकते हैं। इसरो ने वर्ष 2014 में प्रथम प्रयास में, सबसे कम लागत में मंगलयान मिशन को सफलतापूर्वक लांच किया। चंद्रयान -1 ने चन्द्रमा पर जल अणुओं की खोज की और वर्ष 2023 में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतपूर्वक लैंडिंग की जिसे पूरे विश्व ने टीवी पर लाइव देखा, आज लैंडिंग का यह बिंदु शिवशक्ति बिंदु के नाम से जाना जाता है ।

इसरो ने 2024 के आरम्भ में सूर्य का अध्ययन करने के लिए आदित्य एल- 1 का सफलतातपूर्वक प्रक्षेपण किया तथा अंत में स्पैडैक्स मिशन के साथ श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 44.5 मीटर लंबे ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएल वी – सी 60) रॉकेट ने दो छोटे अंतरिक्ष यानों चेजर और टारगेट के साथ सफलतापूर्वक छोड़ा है। अब चेजर और टारगेट को 475 किमीटर की वृत्ताकार कक्षा में स्थापित कर दिया गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार आगामी 7 जनवरी तक डॉकिंग प्रक्रिया पूर्ण हो जायेगी। स्पैडेक्स मिशन के साथ ही अब भारत डॉकिंग और अनडॉकिंग क्षमता प्रदर्शित करने वाला चौथा देश बनेगा। इस समय दुनिया के मात्र तीन देश अमेरिका , चीन और रूस के पास अंतरिक्ष यान को अंतरिक्ष में डॉक करने की क्षमता है।अंतरिक्ष यान से दूसरे अंतरिक्ष यान के जुड़ने को डॉकिंग और अंतरिक्ष यानों के अलग होने को अनडॉकिंग कहते हैं।

स्पैडेक्स मिशन

स्पैडेक्स मिशन भारत के लिए कई दृष्टियों से बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भविष्य के मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए महत्वपूर्ण तकनीक है।यह अतंरिक्ष में डॉकिंग के लिए बहुत ही किफायती प्रौद्योगिकी मिशन है। इसकी सफलता चंद्रमा पर मानव को भेजने व नमूने लाने के लिए जरूरी है।इसकी सफलता से भविष्य में भारत के वैज्ञानिक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के निर्माण और संचालन में भी आत्मनिर्भर होंगे क्योकि इसरो की 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की योजना है। वही एक से अधिक रॉकेट लांच करने के लिए भी इस तकनीक की जरूरत है।

यह अंतरिक्षयान दो वर्षों तक पृथ्वी की परिक्रमा करेंगे।दोनों अंतरिक्ष यानों का वजन 220 किग्रा है।इस मिशन की सफलता से अंतरिक्ष कचरे की समस्या से निपटने में भी सफलता मिलेगी। पीओईएम इसरो का प्रायोगिक मिशन है इसके तहत कक्षीय प्लेटफार्म के रूप में पीएस 4 चरण का उपयोग करके कक्षा में वैज्ञानिक प्रयोग किया जाता है।पीएसलवी -चार चरणों वाला रॉकेट है इसके पहले तीन चरण प्रयोग होने के बाद समुद्र में गिर जाते हैं और अंतिम चरण उपग्रह को कक्षा में प्रक्षेपित करने के बाद अतंरिक्ष में कबाड़ बन जाता है। पीओईएम के तहत रॉकेट के इसी चौथे चरण का इस्तेमाल वैज्ञानिक प्रयोग करने में किया जायेगा।

वर्ष 2025 में और कमाल करेगा इसरो 

अंतरिक्ष क्षेत्र के विशेषज्ञों का मत है कि अभी तक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो ने जो कुछ किया है वह तो ट्रेलर मात्र है आगामी कुछ वर्षों में इसरो के वैज्ञानिक और भी कमाल करने की तैयारी कर रहे हैं और जिसके बाद भारत का अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो जायेगा। इस वर्ष इसरो की 36 सेउपग्रहों का प्रक्षेपण करने की योजना तो है ही साथ ही रूस और अमेरिका के साथ मिलकर अंतरिक्ष यात्री भेजने की तैयारी भी है। लो अर्थ ऑर्बिट में कुल 36 सेटेलाइट लांच होने जा रहे हैं। जो देश के कई सेक्टरों को लाभान्वित करेंगे।इससे कृषि, संचार और परिवहन जैसे क्षेत्रों का सुविधा मिलेगी और आम जनजीवन में सुधार होगा।

नये वर्ष में अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की तैयारियों में प्रमुख है कि इसरो ने निजी कंपनियों को प्रक्षेपण यान के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरित करने का निर्णय लिया है। इससे भारत में प्रक्षेपण यान का एक बड़ा बाजार तैयार होने जा रहा है। इसमें एएसएलवी एक नई शक्ति के रूप में स्थापित होगा। चंद्रयान-3 और आदित्य एल -1 के बाद स्पैडेक्स मिशन की सफलता पर केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत अब स्वदेशी डॉकिंग सिस्टम विकसित करने वाला विश्व का चौथा देश बन गया है।

इसरो का यह मिशन अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक नये युग का आरम्भ है। स्पैडेक्स मिशन छोटे अंतरिक्ष यानों के साथ पहला ऐसा मिशन है। हम इसे बड़े अंतरिक्ष यानों के साथ आगे बढ़ायेंगे। मंत्री का कहना है कि नये साल में इसरो नासा सिथेंटिक एपर्चर रडार उपग्रह लांच करने के लिए तैयार है। भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान के तहत व्योममित्र रोबोट को भी इस वर्ष लांच करने की तैयारी की है। मार्च से पहले गगनयान मिशन के लिए क्रू एस्केप सिस्टम के परीक्षण की भी योजना है।

2025 के मध्य या 2026 के प्रारम्भ में ही हमारी मानव अंतरिक्ष उड़ान -गगनयान को लांच किया जायेगा। गगनयान मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्रियों को 400 किमी कक्षा में भेजा जायेगा और उन्हें भारतीय समुद्री क्षेत्र में उतारा जायेगा। जनवरी 2025 में ही जीएसएलवी मिशन के साथ 100वीं लांचिंग भी होने जा रही है। कुल मिला कर आने वाला समय भारत के सूर्य के अन्तरिक्ष में उदय होने का है।

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