ऑपरेशन सिन्दूर: बदलती सुरक्षा नीति, सैन्य ताकत और अंतरराष्ट्रीय स्थिति का अनोखा संदर्भ बिंदु

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‘ऑपरेशन सिन्दूर’ केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि विश्व को भारत का ऐतिहासिक सन्देश है कि भारत आतंक को सहने वाला नहीं, बल्कि निर्णायक प्रतिकार करने वाला राष्ट्र है। इस ऑपरेशन के मूल में वह गहन पीड़ा थी जिसे भारत ने पिछले दो दशकों में बार-बार आतंकवादी हमलों के माध्यम से झेला है। 2001 का संसद हमला, 2008 का मुंबई ताज हमला, 2016 का उरी हमला, 2019 का पुलवामा हमला और अब हालिया पहलगाम की घटना, ये भारत की अस्मिता पर सीधे प्रहार थे। इन हमलों में निर्दोष नागरिकों की जानें गईं, अनगिनत घर उजड़ गए, माताओं की गोद सूनी हुई और सिन्दूर उजड़ गए। इसलिए एक ऐसे प्रतिकार की आवश्यकता थी, जो न केवल आतंकियों के मन में भय पैदा करे, बल्कि उन्हें पनाह देने वाले पाकिस्तान के लिए भी एक ऐसी पीड़ा बन जाए, जो उसकी स्मृति में हमेशा दर्ज रहे।

यह ऑपरेशन दुनिया के लिए एक नज़ीर बन गया है। नज़ीर इसलिए नहीं कि भारत ने सिर्फ अपने दशकों की पीड़ा का बदला लिया, बल्कि इसलिए क्योंकि भारत ने इस्लामिक आतंकवाद के विरुद्ध लड़ने की एक प्रभावी और नैतिक रणनीति प्रस्तुत की है। यह विश्व इतिहास में पहली बार है जब किसी देश ने इतने संगठित और सटीक ढंग से आतंकी हमलों का जवाब उस राष्ट्र के भीतर जाकर दिया, जिसने आतंक को अपनी कूटनीति और अस्तित्व का आधार बना रखा है। जिस देश ने परमाणु शक्ति की आड़ लेकर वर्षों तक आतंक को शह दी, भारत ने उसी के घर में घुसकर मारा और यह स्पष्ट कर दिया कि यह ‘नया भारत’ है। अब कोई भी आतंकी हमला महज सुरक्षा का मामला नहीं रहेगा, वह भारत के लिए युद्ध की घोषणा मानी जाएगी। और भारत उसका उत्तर युद्ध स्तर पर ही देगा। इस ऐतिहासिक ऑपरेशन की सफलता के तीन स्तम्भ हैं: भारतीय सेना,  जिसने दुश्मन को असाधारण सटीकता और रणनीतिक कौशल दिखाई है। मजबूत राजनीतिक नेतृत्व,  जिसने स्पष्ट कर दिया कि भारत की सुरक्षा, संप्रभुता और आत्मसम्मान पर कोई समझौता नहीं होगा। और जन चेतना, जो इस राष्ट्र की शक्ति है। कश्मीर से कन्याकुमारी और अरुणाचल से सोमनाथ तक हर भारतवासी ने एक स्वर में कहा: तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहें।”

भारत ने बदल दी आतंक के विरुद्ध लड़ाई की परिभाषा 

पिछले एक दशक में भारत ने आतंकी हमलों के खिलाफ अपनी रणनीति बदल दी है. 2016 में उरी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए आतंकियों के ठिकानों को ध्वस्त किया और लगभग 40 आतंकवादियों को मार गिराया। इसके बाद 2019 में पुलवामा हमले के जवाब में बालाकोट एयर स्ट्राइक में भारतीय वायुसेना ने 300 से अधिक आतंकियों को खत्म किया। और अब ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ ने तो पाकिस्तान को उसकी धरती पर जाकर वह संदेश दिया है जो अब तक केवल भारत की सहनशीलता पर भरोसा करने वाले देशों के लिए कल्पना से परे था। इस बार का नुकसान इतना भयावह था कि आतंकी कमांडरों के जनाजे में पाकिस्तान के टॉप आर्मी अफसर तक शामिल होने को मजबूर हुए। ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ आने वाले समय में केवल एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक केस स्टडी के रूप में जाना जाएगा। यह वह अध्ययन होगा जिसे देश-विदेश के रक्षा संस्थानों और सैन्य प्रशिक्षण केंद्रों में पढ़ाया जाएगा। एक आदर्श उदाहरण के रूप में, कि आतंकवाद के विरुद्ध निर्णायक और सटीक कार्यवाही कैसे की जाती है। यह ऑपरेशन दुनिया को निरंतर यह स्मरण कराता रहेगा कि भारत आतंक के खिलाफ किस हद तक जा सकता है, और किस रूप में उसे कुचल सकता है। इस ऑपरेशन का विश्लेषण बहुआयामी होगा जिसमें सैन्य रणनीति, कूटनीति, राजनीतिक नेतृत्व और जन समर्थन प्रमुख हिस्से होंगे।

ऑपरेशन सिन्दूर: भारत की सैन्य शक्ति का ठोस साक्ष्य 

भारत ने ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ के अंतर्गत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में स्थित कुल 9 हाई-वैल्यू आतंकी लॉन्चपैड्स को सफलतापूर्वक ध्वस्त कर दिया। ये ठिकाने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों के प्रमुख प्रशिक्षण और संचालन केंद्र थे, जो भारत के विरुद्ध आतंकी साजिशों की योजना बनाते थे। यह ऑपरेशन केवल PoJK तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पाकिस्तान के भीतर सैकड़ों किलोमीटर अंदर तक भारतीय सेना की सटीक और साहसिक कार्यवाही का प्रमाण भी रहा। भारतीय वायुसेना ने पंजाब प्रांत के गहराई में स्थित आतंकवादी अड्डों को भी निशाना बनाया। जिन क्षेत्रों को लक्षित किया गया उनमें बहावलपुर जैसे अति संवेदनशील आतंकी गढ़ भी शामिल थे।

यह ऑपरेशन न केवल आतंक के विरुद्ध भारत की निर्णायक नीति का प्रमाण था, बल्कि यह विश्व को भारत की सैन्य शक्ति, रणनीतिक सूझबूझ और तकनीकी आत्मनिर्भरता का ठोस साक्ष्य भी प्रदान करता है। भारत ने मात्र 23 मिनट में इस अभूतपूर्व हमले को अंजाम दिया और पाकिस्तान की चीनी तकनीक आधारित सुरक्षा प्रणाली की वास्तविकता को उजागर कर दिया। भारतीय लड़ाकू विमानों ने अत्यधिक सटीकता के साथ बिना किसी नागरिक क्षति के मिशन को पूरा किया, जो भारत की तकनीकी प्रगति, रणनीतिक सूझबूझ, और मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाता है। विशेष उल्लेखनीय है स्वदेशी आकाशतीर’ एयर डिफेंस सिस्टम, जिसने सैकड़ों पाकिस्तानी ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही ध्वस्त कर दिया। यह न केवल भारत की रक्षा तकनीक का उदाहरण है, बल्कि भविष्य के वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की बढ़ती भूमिका का संकेत भी है। इतना ही नहीं, 9 और 10 मई की रात भारत ने जो सैन्य कार्रवाई की, वह इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज की जाएगी। भारतीय वायुसेना ने एक परमाणु संपन्न देश की वायुशक्ति को चुनौती देते हुए उसके 11 प्रमुख एयरबेस को निशाना बनाया, जिनमें नूर खान, सरगोधा, रफीक़ी, मुरिद, सुक्कुर, सियालकोट, पस्रूर, चूनियां, स्कारू, भोला री और जैकबाबाद शामिल हैं। इनमें से कई ऐसे एयरबेस थे (जैसे नूर खान और सरगोधा)  जिन्हें पाकिस्तान अपनी सबसे सुरक्षित सैन्य परिसंपत्तियों में गिनता था। इस पूरे ऑपरेशन का सबसे बड़ा तथ्य यह है कि केवल तीन घंटे की कार्रवाई में भारत ने पाकिस्तान की वायुसेना के 20% बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया।

कूटनीतिक रूप से सशक्त भारत: ऑपरेशन सिन्दूर का वैश्विक संदेश

जब पहलगाम में आतंकी हमला हुआ तब दुनिया भर से इस कायराना हरकत की निंदा की गई। संयुक्त राष्ट्र सहित अनेक देशों ने भारत के साथ खड़े होने की बात कही। लेकिन जब भारत ने इसका सटीक, साहसिक और निर्णायक उत्तर ऑपरेशन सिन्दूर के माध्यम से दिया, तब एक सवाल उठ खड़ा हुआ कि दुनिया इस प्रतिकार को किस दृष्टि से देखेगी? कुछ वर्गों ने तर्क देना शुरू कर दिया कि भारत कूटनीतिक रूप से अकेला पड़ गया है। चीन और तुर्की ने खुलकर पाकिस्तान के पक्ष में बयान दिए। लेकिन सवाल है कि इसमें नया क्या है? क्या यह पहले से ज्ञात नहीं था कि चीन पाकिस्तान का रणनीतिक साझेदार है? क्या हमें यह नहीं मालूम कि धारा 370 हटाने के समय तुर्की ने भारत के खिलाफ क्या प्रतिक्रिया दी थी? फिर आज इसे लेकर आश्चर्य क्यों?

असल में, यह कहना कि भारत कूटनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ गया, एक भ्रम फैलाने वाला तर्क है। ऐसे लोगों से यह पूछा जाना चाहिए कि क्या किसी प्रमुख इस्लामिक देश ने इस बार पाकिस्तान के समर्थन में भारत के खिलाफ बयान जारी किया? क्या इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने भारत के विरोध में कोई प्रस्ताव पारित किया? क्या सऊदी अरब ने कुछ कहा? सच्चाई यह है कि भारत आज विश्व मंच पर एक स्वतंत्र और निर्णायक राष्ट्र के रूप में खड़ा है, जो किसी के दबाव में नहीं बल्कि अपनी नीति और संप्रभुता के आधार पर निर्णय लेता है। प्रधानमंत्री ने स्वयं स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की ओर से DGMO स्तर पर युद्धविराम का अनुरोध किया गया था, न कि किसी तीसरे देश की मध्यस्थता से। उन्होंने यह भी दो टूक कहा कि अब पाकिस्तान से कोई बातचीत होगी तो वह सिर्फ पाक अधिकृत कश्मीर पर होगी।

दरअसल, एक सीमित और पूर्वाग्रही वर्ग है, जो पहले भारत को बार-बार उकसा रहा था कि “आख़िर कब तक सहते रहेंगे?” लेकिन जब भारत ने साहसिक और निर्णायक कार्यवाही कर दी, तो वही वर्ग अब उसकी तीव्रता से असहज होकर इसे “कूटनीतिक अलगाव” का नाम देने लगा है। इनकी समस्या यह नहीं है कि भारत ने जवाब क्यों दिया, बल्कि यह है कि भारत ने इतना प्रभावी और योजनाबद्ध जवाब कैसे दे दिया। अब ये लोग कभी ट्रंप के ट्वीट्स का हवाला देते हैं, तो कभी विदेशी मीडिया की अपुष्ट और भ्रामक रिपोर्टों को पकड़कर भारत पर सवाल उठा रहे हैं। हकीकत यह है कि इस पूरे अभियान को लेकर न सेना ने, न सरकार ने और न ही जनता के स्तर पर कहीं भी ऐसा संकेत दिया कि भारत किसी कूटनीतिक दबाव में आया हो या अलग-थलग पड़ा हो। बल्कि इस बार तो हमला इतना स्पष्ट और सटीक था कि पाकिस्तान खुद ही अगले दिन से इसके प्रमाण देना शुरू कर चुका था। यही तथ्य दिखाने के लिए काफी है कि भारत ने किस स्तर और कितनी गहराई तक जाकर पाकिस्तान को चोट पहुंचाई है। जब दुश्मन खुद अपनी स्थिति स्पष्ट करने लगे, तो यह किसी भी सैन्य अभियान की सबसे बड़ी सफलता मानी जाती है।

आने वाले वर्षों में इस अभियान पर शोध होंगे, पुस्तकें लिखी जाएंगी, और यह भारत की आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता नीति” (Zero Tolerance Against Terror) का जीवंत प्रतीक बन जाएगा। ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ भारतीय सेना की अभूतपूर्व रणनीतिक क्षमता का प्रमाण है और साथ ही यह नए वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत की उभरती भूमिका और प्रभाव को भी दर्शाता है। यह ऑपरेशन भविष्य में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति, सैन्य तैयारी और अंतरराष्ट्रीय स्थिति को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ बिंदु रहेगा।


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Vikrant Nirmala

Vikrant Nirmala, an esteemed alumnus of Banaras Hindu University (BHU), is the Founder and President of the Finance and Economics Think Council. Currently pursuing a PhD at the NIT, Rourkela, he is a distinguished thought scholar in the fields of finance and economics. Vikrant is contributing insightful articles to leading newspapers and prominent digital media platforms, showcasing his expertise in these domains.

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